असम विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर कांग्रेस का हमला, BJP बैठक में शामिल होने पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और असम विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता देबब्रत सैकिया ने गुरुवार, 17 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर गंभीर आरोप लगाए। सैकिया ने दावा किया कि 13 जुलाई को बसिष्ठा स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पार्टी की नीति निर्धारण समिति की बैठक में विधानसभा अध्यक्ष की कथित भागीदारी से उनके संवैधानिक पद की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। यह विवाद गुवाहाटी से उठा है और असम की राजनीति में नई बहस छेड़ गया है।
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सैकिया ने विधानसभा अध्यक्ष दास को एक विस्तृत पत्र लिखा, जिसमें उन्हें दूसरी बार इस संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभालने पर बधाई देते हुए उनकी कथित भागीदारी पर आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता का तर्क है कि किसी सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेना और सत्तारूढ़ दल की आंतरिक नीति संबंधी बैठक में शामिल होना — दोनों में मौलिक अंतर है।
सैकिया ने कहा, 'असम विधानसभा के करीब 89 वर्षों के इतिहास में ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया।' उनके अनुसार इस तरह की घटनाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमज़ोर हो सकता है।
संवैधानिक निष्पक्षता पर सवाल
कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष का पद स्वभाव से निष्पक्ष और दलगत राजनीति से ऊपर होना चाहिए। सैकिया ने स्पष्ट किया कि सत्तारूढ़ दल की आंतरिक नीति-निर्माण प्रक्रिया में भाग लेना इस संवैधानिक गरिमा के अनुरूप नहीं है। गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष सदन के सभी सदस्यों — सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों — का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनकी तटस्थता संसदीय लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है।
सदन में मंत्रियों के रवैये पर भी आपत्ति
सैकिया ने अपने पत्र में केवल अध्यक्ष की भागीदारी तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्नकाल और शून्यकाल में मंत्रियों के कामकाज पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि विपक्ष के सीधे सवालों का जवाब देने के बजाय मंत्री राजनीतिक बयानबाजी करते हैं, पलटकर सवाल पूछते हैं और जिम्मेदारी विपक्ष पर डालने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पीयूष हजारिका और वित्त मंत्री अजंता नियोग के साथ हाल की बहस का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके जवाब संवैधानिक सिद्धांतों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं थे।
कांग्रेस की मांग
सैकिया ने स्पष्ट किया कि मंत्रियों की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे स्वतंत्र रूप से निर्णय लें और कानून का पालन सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि मंत्रियों को यह कहना उचित नहीं है कि किसी मामले में कार्रवाई विपक्ष की राय पर निर्भर करती है — यह संवैधानिक उत्तरदायित्व से पलायन है।
आगे क्या होगा
विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BJP ने भी इस विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह मामला असम विधानसभा में औपचारिक विशेषाधिकार प्रश्न का रूप लेता है या विपक्ष इसे आगामी सत्र में उठाता है।