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असम विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर कांग्रेस का हमला, BJP बैठक में शामिल होने पर उठे सवाल

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असम विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर कांग्रेस का हमला, BJP बैठक में शामिल होने पर उठे सवाल

सारांश

असम में कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर BJP की नीति निर्धारण बैठक में शामिल होने का आरोप लगाया है। देबब्रत सैकिया ने इसे 89 साल के विधानसभा इतिहास में अभूतपूर्व बताते हुए संसदीय लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास को पत्र लिखकर 13 जुलाई को BJP की नीति बैठक में उनकी कथित भागीदारी पर आपत्ति जताई।
सैकिया ने कहा कि असम विधानसभा के 89 वर्षों के इतिहास में ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया।
BJP के बसिष्ठा स्थित प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पार्टी की नीति निर्धारण समिति की बैठक में अध्यक्ष की कथित उपस्थिति विवाद की जड़ है।
कांग्रेस ने सूचना मंत्री पीयूष हजारिका और वित्त मंत्री अजंता नियोग के सदन में रवैये पर भी आपत्ति दर्ज कराई।
विधानसभा अध्यक्ष और BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस नेता और असम विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता देबब्रत सैकिया ने गुरुवार, 17 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर गंभीर आरोप लगाए। सैकिया ने दावा किया कि 13 जुलाई को बसिष्ठा स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पार्टी की नीति निर्धारण समिति की बैठक में विधानसभा अध्यक्ष की कथित भागीदारी से उनके संवैधानिक पद की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। यह विवाद गुवाहाटी से उठा है और असम की राजनीति में नई बहस छेड़ गया है।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सैकिया ने विधानसभा अध्यक्ष दास को एक विस्तृत पत्र लिखा, जिसमें उन्हें दूसरी बार इस संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभालने पर बधाई देते हुए उनकी कथित भागीदारी पर आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता का तर्क है कि किसी सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेना और सत्तारूढ़ दल की आंतरिक नीति संबंधी बैठक में शामिल होना — दोनों में मौलिक अंतर है।

सैकिया ने कहा, 'असम विधानसभा के करीब 89 वर्षों के इतिहास में ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया।' उनके अनुसार इस तरह की घटनाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमज़ोर हो सकता है।

संवैधानिक निष्पक्षता पर सवाल

कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष का पद स्वभाव से निष्पक्ष और दलगत राजनीति से ऊपर होना चाहिए। सैकिया ने स्पष्ट किया कि सत्तारूढ़ दल की आंतरिक नीति-निर्माण प्रक्रिया में भाग लेना इस संवैधानिक गरिमा के अनुरूप नहीं है। गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष सदन के सभी सदस्यों — सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों — का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनकी तटस्थता संसदीय लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है।

सदन में मंत्रियों के रवैये पर भी आपत्ति

सैकिया ने अपने पत्र में केवल अध्यक्ष की भागीदारी तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्नकाल और शून्यकाल में मंत्रियों के कामकाज पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि विपक्ष के सीधे सवालों का जवाब देने के बजाय मंत्री राजनीतिक बयानबाजी करते हैं, पलटकर सवाल पूछते हैं और जिम्मेदारी विपक्ष पर डालने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पीयूष हजारिका और वित्त मंत्री अजंता नियोग के साथ हाल की बहस का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके जवाब संवैधानिक सिद्धांतों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं थे।

कांग्रेस की मांग

सैकिया ने स्पष्ट किया कि मंत्रियों की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे स्वतंत्र रूप से निर्णय लें और कानून का पालन सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि मंत्रियों को यह कहना उचित नहीं है कि किसी मामले में कार्रवाई विपक्ष की राय पर निर्भर करती है — यह संवैधानिक उत्तरदायित्व से पलायन है।

आगे क्या होगा

विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BJP ने भी इस विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह मामला असम विधानसभा में औपचारिक विशेषाधिकार प्रश्न का रूप लेता है या विपक्ष इसे आगामी सत्र में उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह विपक्ष के लिए सदन में विशेषाधिकार प्रश्न उठाने का ठोस आधार बन सकता है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम विधानसभा अध्यक्ष पर कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया है?
कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने आरोप लगाया है कि विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास 13 जुलाई को बसिष्ठा स्थित BJP के प्रदेश मुख्यालय में पार्टी की नीति निर्धारण समिति की बैठक में कथित तौर पर शामिल हुए। सैकिया का कहना है कि यह संवैधानिक पद की निष्पक्षता के विरुद्ध है।
यह विवाद क्यों अहम है?
विधानसभा अध्यक्ष का पद संवैधानिक रूप से निष्पक्ष माना जाता है और वे सत्ता पक्ष तथा विपक्ष — दोनों के प्रतिनिधि होते हैं। सत्तारूढ़ दल की आंतरिक नीति बैठक में उनकी भागीदारी इस तटस्थता पर सवाल खड़े करती है और संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं को कमज़ोर कर सकती है।
क्या असम विधानसभा में पहले कभी ऐसा हुआ है?
कांग्रेस नेता सैकिया के अनुसार, असम विधानसभा के करीब 89 वर्षों के इतिहास में ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया। उन्होंने इसे एक अभूतपूर्व और चिंताजनक घटना बताया है।
कांग्रेस ने सदन में मंत्रियों के रवैये पर क्या आपत्ति जताई?
सैकिया ने आरोप लगाया कि प्रश्नकाल और शून्यकाल में सूचना मंत्री पीयूष हजारिका और वित्त मंत्री अजंता नियोग सहित अन्य मंत्री विपक्ष के सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी करते हैं और जिम्मेदारी विपक्ष पर डालने की कोशिश करते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष या BJP ने इस पर क्या कहा?
अभी तक विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास और BJP की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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