2007 में दुष्कर्म के मामले में 2019 में पुनः पोस्टमार्टम; अंततः परिजनों को मिले अवशेष
सारांश
मुख्य बातें
विजयवाड़ा, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2007 में दुष्कर्म और हत्या का शिकार बनी 17 वर्षीय छात्रा आयशा मीरा के शव के अवशेष शुक्रवार को प्रशासन ने उनके माता-पिता को सौंप दिए।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2019 में इन अवशेषों का दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए उन्हें कब्र से निकाला था, जिसे विजयवाड़ा की अदालत में शमशाद बेगम और इकबाल बाशा ने प्राप्त किया।
हाल ही में अदालत ने निर्देश दिया था कि आयशा मीरा के अवशेष उनके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंपे जाएं। इन अवशेषों को बाद में तेनाली शहर में दफनाया जाएगा।
इस अवसर पर कई जनसंगठनों और न्याय की मांग कर रही महिला कार्यकर्ताओं ने शमशाद बेगम और उनके पति के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने आयशा को न्याय दिलाने की अपील करते हुए तख्तियां भी उठाई थीं।
अवशेष प्राप्त करने के बाद उन्होंने रैली निकालने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बताया कि इस रैली की अनुमति नहीं है।
शमशाद बेगम ने मीडिया से साझा किया कि 19 वर्षों
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के सभी साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है और उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से मिलने की योजना भी बनाई है।
यह मामला पहले पुलिस और फिर सीबीआई द्वारा सुलझाने में विफल रहा। पिछले सप्ताह अदालत ने सीबीआई द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए जांच बंद करने की अनुमति दी। केंद्रीय एजेंसी ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य नहीं मिले।
अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि आगे की जांच की आवश्यकता का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही यह भी दर्ज किया गया कि पीड़िता के माता-पिता ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया और आगे के कानूनी खर्च उठाने में असमर्थता जताई।
आयशा, जो बी-फार्मेसी की छात्रा थीं, 27 दिसंबर 2007 की सुबह विजयवाड़ा के निकट इब्राहिमपट्टनम स्थित एक निजी छात्रावास के बाथरूम में मृत पाई गई थीं। उनका शव खून से लथपथ अवस्था में मिला था और उनके हाथ-पैर उनके कपड़ों से पानी के नल और लोहे की रॉड से बंधे हुए थे।
पुलिस ने छात्रावास कर्मचारियों सहित कई संदिग्धों से पूछताछ की थी। नौ महीने बाद सत्यम बाबू नामक युवक को गिरफ्तार किया गया।
महिला सत्र न्यायालय ने 2010 में उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि 2017 में उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में उसे बरी कर दिया।
जनहित याचिकाओं और पीड़िता के माता-पिता की याचिका पर 2018 में उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके पश्चात 2019 में सीबीआई ने शव को दोबारा पोस्टमार्टम के लिए कब्र से निकाला।