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खसरा: बच्चों के लिए जानलेवा वायरस, WHO ने बताए 5 प्रमुख लक्षण और बचाव के उपाय

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खसरा: बच्चों के लिए जानलेवा वायरस, WHO ने बताए 5 प्रमुख लक्षण और बचाव के उपाय

सारांश

WHO के आँकड़ों के अनुसार 2024 में खसरे से अनुमानित 95,000 लोगों की मौत हुई — अधिकतर 5 वर्ष से कम उम्र के अटीकाकृत बच्चे। संगठन ने तेज़ बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते और आँखों से पानी आने समेत 5 प्रमुख लक्षण बताए हैं। टीके की दो खुराक इससे बचाव का सबसे कारगर उपाय है।

मुख्य बातें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरे के लक्षण वायरस के संपर्क के 7 से 14 दिनों बाद प्रकट होते हैं।
तेज़ बुखार, लाल आँखें, नाक बहना, शरीर पर लाल चकत्ते और गालों के अंदर सफ़ेद धब्बे इस रोग के पाँच प्रमुख लक्षण हैं।
गंभीर मामलों में निमोनिया, मस्तिष्क सूजन और दृष्टिहानि जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं।
WHO के अनुसार, 2024 में खसरे से अनुमानित 95,000 लोगों की मौत हुई, अधिकतर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे।
टीके की दो खुराकें इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका हैं; खसरे का कोई विशेष एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है।
कुपोषित और विटामिन A की कमी वाले बच्चों में जटिलताओं का जोखिम अधिक होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा बच्चों में फैलने वाली सबसे संक्रामक बीमारियों में से एक है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने मात्र से हवा के ज़रिए फैल सकती है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह रोग विशेष रूप से घातक साबित हो सकता है। WHO ने इसके लक्षणों की पहचान और बचाव को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिन पर ध्यान देना अभिभावकों के लिए अत्यंत ज़रूरी है।

खसरे के प्रमुख लक्षण

WHO के दिशानिर्देशों के अनुसार, खसरे के वायरस के संपर्क में आने के 7 से 14 दिनों के भीतर लक्षण प्रकट होते हैं। प्रारंभिक चरण में यह सामान्य बुखार या सर्दी-जुकाम जैसा प्रतीत हो सकता है, जिससे अभिभावक अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

इस रोग के पाँच प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं: तेज़ बुखार, लगातार खांसी और नाक बहना, आंखों का लाल होना तथा पानी आना, चेहरे और गर्दन से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल चकत्ते फैलना, और गालों के अंदर छोटे-छोटे सफ़ेद धब्बे (जिन्हें 'Koplik's spots' कहा जाता है) दिखाई देना। आमतौर पर शुरुआती लक्षणों के तीन से पाँच दिन बाद शरीर पर दाने उभरते हैं, जो धीरे-धीरे छाती, हाथों, पैरों और अन्य हिस्सों तक फैल जाते हैं।

गंभीर जटिलताओं का खतरा

खसरे को केवल बुखार और दाने तक सीमित मानना भूल हो सकती है। गंभीर मामलों में यह रोग निमोनिया, कान में संक्रमण, तीव्र दस्त, शरीर में जलशोष (dehydration) और मस्तिष्क में सूजन (encephalitis) जैसी स्थितियों को जन्म दे सकता है। कुछ मामलों में दृष्टिहानि का जोखिम भी रहता है।

यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक हो जाता है जब कुपोषित बच्चों, विटामिन A की कमी वाले बच्चों और कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों की संख्या विकासशील देशों में अभी भी काफ़ी अधिक है। इसके अतिरिक्त, गर्भावस्था के दौरान खसरे का संक्रमण माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है।

वैश्विक आँकड़े और भारत के लिए संदेश

WHO के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में खसरे से अनुमानित 95,000 लोगों की मृत्यु हुई। इनमें अधिकतर 5 वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे थे, जिन्हें या तो टीका नहीं लगा था या टीकाकरण अधूरा था। गौरतलब है कि यह आँकड़ा एक रोके जाने योग्य बीमारी के लिए बेहद गंभीर है, विशेषकर जब टीका सुलभ है।

बचाव: टीकाकरण सबसे कारगर उपाय

WHO के अनुसार, खसरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। बच्चों को खसरे के टीके की दो खुराकें देना अनिवार्य है, क्योंकि पहली खुराक से सभी बच्चों में पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती। भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत यह टीका निःशुल्क उपलब्ध है।

यह भी स्पष्ट करना ज़रूरी है कि खसरे का कोई विशेष एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है। चिकित्सा का ध्यान लक्षणों को नियंत्रित करने और जटिलताओं को रोकने पर केंद्रित रहता है।

इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

यदि बच्चे को सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक सुस्ती, गंभीर निर्जलीकरण या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि खसरे के किसी भी संदिग्ध लक्षण को प्रारंभिक अवस्था में ही डॉक्टर को दिखाना उचित होता है, ताकि समय पर उचित देखभाल सुनिश्चित की जा सके। जागरूकता और सतर्कता ही इस बीमारी से बच्चों को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी ढाल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मौतें — यह सवाल उठाते हैं कि भारत समेत कई देशों में टीकाकरण कवरेज अभी भी क्यों अपर्याप्त है। समस्या टीके की उपलब्धता की नहीं, बल्कि 'वैक्सीन हेज़िटेंसी' और अंतिम मील वितरण की है। देश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अधूरे टीकाकरण की दर चिंताजनक बनी हुई है, और यह खबर केवल एक स्वास्थ्य परामर्श नहीं — बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही का आईना है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खसरा क्या है और यह कैसे फैलता है?
खसरा एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से हवा के ज़रिए फैलती है। यह विशेष रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक होती है।
खसरे के प्रमुख लक्षण कौन-से हैं?
WHO के अनुसार, खसरे के पाँच प्रमुख लक्षण हैं — तेज़ बुखार, खांसी और नाक बहना, आँखों का लाल होना व पानी आना, चेहरे से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल चकत्ते और गालों के अंदर सफ़ेद धब्बे। ये लक्षण वायरस के संपर्क के 7 से 14 दिन बाद प्रकट होते हैं।
खसरे से बच्चों को कौन-सी गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं?
गंभीर मामलों में खसरे से निमोनिया, कान में संक्रमण, तीव्र दस्त, निर्जलीकरण, मस्तिष्क में सूजन और यहाँ तक कि दृष्टिहानि भी हो सकती है। कुपोषित बच्चों और विटामिन A की कमी वाले बच्चों में ये जटिलताएँ अधिक गंभीर होती हैं।
खसरे से बचाव का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
WHO के अनुसार, खसरे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। बच्चों को टीके की दो खुराकें लगवाना ज़रूरी है, क्योंकि पहली खुराक से सभी बच्चों में पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती। भारत में यह टीका राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत निःशुल्क उपलब्ध है।
2024 में खसरे से दुनियाभर में कितनी मौतें हुईं?
WHO के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में खसरे से अनुमानित 95,000 लोगों की मौत हुई। इनमें से अधिकांश 5 वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे थे जिनका टीकाकरण नहीं हुआ था या अधूरा था।
राष्ट्र प्रेस
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