26 अगस्त 2026
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बांसुरी स्वराज का राहुल गांधी पर प्रहार: 'पितृसत्ता' नारे पर कांग्रेस के दोहरेपन का पर्दाफाश

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बांसुरी स्वराज का राहुल गांधी पर प्रहार: 'पितृसत्ता' नारे पर कांग्रेस के दोहरेपन का पर्दाफाश

सारांश

BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी के 'पितृसत्ता को खत्म करो' नारे को कांग्रेस के भीतर के दोहरेपन से टकराया — कर्नाटक-हिमाचल कैबिनेट में शून्य महिला मंत्री, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध, और पार्टी नेताओं की महिला-विरोधी टिप्पणियों पर राहुल गांधी की चुप्पी।

मुख्य बातें

BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने 26 अगस्त 2026 को राहुल गांधी के 'पितृसत्ता को खत्म करो' बयान पर पलटवार किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं है।
कांग्रेस पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिलाओं के लिए 33% आरक्षण ) का विरोध करने का आरोप लगाया।
सुप्रिया श्रीनेत, रणदीप सुरजेवाला, अधीर रंजन चौधरी और कमलनाथ के महिला-विरोधी कथित बयानों पर राहुल गांधी की चुप्पी को उजागर किया।
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को वंदे मातरम पूरा गाने की सीधी चुनौती दी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने 26 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने 22 अगस्त को पुणे में राहुल गांधी द्वारा दिए गए 'पितृसत्ता को खत्म करो' के बयान को 'झूठा नैरेटिव' करार दिया और कांग्रेस पार्टी के भीतर महिलाओं के प्रति रवैये पर कई उदाहरण गिनाए।

मुख्य आरोप: नारे और हकीकत में फर्क

बांसुरी स्वराज ने कहा, 'पितृसत्ता को खत्म करो' के नारे से वह पूरी तरह सहमत हैं, लेकिन उनका सवाल यह है कि क्या यह नारा केवल पुणे के मंच तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी में 'राजनीतिक पितृसत्ता' को संरक्षण देते हैं। उनके अनुसार, राहुल गांधी के पास 'न कोई विजन है, न ही कोई सकारात्मक एजेंडा', और वे अपनी रिसर्च टीम की पर्ची के आधार पर बयान देकर मतदाताओं को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं।

कांग्रेस नेताओं के बयानों पर सवाल

बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस के भीतर महिलाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों की एक लंबी सूची प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सांसद कंगना रनौत के बारे में अभद्र टिप्पणी की, तो राहुल गांधी चुप रहे। इसी तरह, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा हेमा मालिनी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग (ECI) ने 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया, लेकिन राहुल गांधी ने एक शब्द नहीं कहा। बांसुरी स्वराज ने बताया कि उन्होंने स्वयं इस मामले में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को 'राष्ट्रपत्नी' कहे जाने और मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा 2020 में एक महिला उम्मीदवार को 'आइटम' कहे जाने पर भी उन्होंने राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस विधायक के.आर. रमेश के एक विवादास्पद बयान पर कांग्रेस विधायक और स्पीकर हंसते रहे, जबकि राहुल गांधी मौन रहे।

कर्नाटक और हिमाचल में महिला मंत्री नहीं

बांसुरी स्वराज ने तर्क दिया कि कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें हैं, फिर भी दोनों राज्यों की कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं है। उनके अनुसार, यह साबित करता है कि राहुल गांधी के लिए महिला सशक्तीकरण महज एक राजनीतिक नारा है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कांग्रेस का रुख

बांसुरी स्वराज ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने 'लाल बटन दबाकर' यह सुनिश्चित किया कि यह विधेयक पारित न हो। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी महिलाओं की भूमिका को केवल मतदाता तक सीमित रखना चाहते हैं।

वंदे मातरम पर चुनौती

बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे सच में पितृसत्ता खत्म करना चाहते हैं, तो पूरा 'वंदे मातरम' गाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने एक प्रस्ताव पास कर इस गीत को छोटा कर दिया, जो संसद द्वारा 'जन गण मन' के बराबर दर्जा पाया हुआ गीत है। आगे राजनीतिक तकरार और पार्टियों के जवाब-दर-जवाब का दौर जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'whataboutery' अधिक है। असली सवाल यह है कि 'पितृसत्ता' पर बहस को नारों और उदाहरणों की जंग में बदल देने से महिला आरक्षण के क्रियान्वयन, कैबिनेट प्रतिनिधित्व या संसद में महिलाओं की भागीदारी पर कोई ठोस नीतिगत प्रगति होती है या नहीं — यह सवाल दोनों दलों पर समान रूप से लागू होता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो चुका है, लेकिन परिसीमन और जनगणना से जुड़ी शर्तों के कारण उसका लागू होना अभी अनिश्चित है — इस पर BJP भी जवाब से नहीं बच सकती।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का 'पितृसत्ता को खत्म करो' नारा केवल मंच तक सीमित है, जबकि कांग्रेस शासित कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं की महिला-विरोधी कथित टिप्पणियों पर राहुल गांधी की चुप्पी को भी उजागर किया।
राहुल गांधी ने 'पितृसत्ता को खत्म करो' बयान कब और कहाँ दिया था?
राहुल गांधी ने यह बयान 22 अगस्त 2026 को पुणे के एक मंच से दिया था। बांसुरी स्वराज ने इसे 'झूठा नैरेटिव' करार दिया और इसके 10 दिन पहले इटली की प्रधानमंत्री के बारे में कथित अभद्र मजाक का हवाला दिया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है और कांग्रेस का इस पर क्या रुख रहा?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाया गया कानून है, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। बांसुरी स्वराज का आरोप है कि कांग्रेस ने 'लाल बटन दबाकर' इस विधेयक को गिराने का प्रयास किया।
बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस के किन नेताओं के बयानों का उल्लेख किया?
उन्होंने सुप्रिया श्रीनेत (कंगना रनौत पर टिप्पणी), रणदीप सुरजेवाला (हेमा मालिनी पर अभद्र भाषा, जिस पर ECI ने 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया), अधीर रंजन चौधरी ('राष्ट्रपत्नी' टिप्पणी), कमलनाथ (2020 में 'आइटम' टिप्पणी) और कर्नाटक विधायक के.आर. रमेश के विवादास्पद बयान का उल्लेख किया।
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को क्या चुनौती दी?
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को पूरा 'वंदे मातरम' गाने की सीधी चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने एक प्रस्ताव पास कर इस गीत को छोटा कर दिया, जबकि संसद ने इसे 'जन गण मन' के बराबर दर्जा दिया हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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