बांसुरी स्वराज का राहुल गांधी पर प्रहार: 'पितृसत्ता' नारे पर कांग्रेस के दोहरेपन का पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने 26 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने 22 अगस्त को पुणे में राहुल गांधी द्वारा दिए गए 'पितृसत्ता को खत्म करो' के बयान को 'झूठा नैरेटिव' करार दिया और कांग्रेस पार्टी के भीतर महिलाओं के प्रति रवैये पर कई उदाहरण गिनाए।
मुख्य आरोप: नारे और हकीकत में फर्क
बांसुरी स्वराज ने कहा, 'पितृसत्ता को खत्म करो' के नारे से वह पूरी तरह सहमत हैं, लेकिन उनका सवाल यह है कि क्या यह नारा केवल पुणे के मंच तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी में 'राजनीतिक पितृसत्ता' को संरक्षण देते हैं। उनके अनुसार, राहुल गांधी के पास 'न कोई विजन है, न ही कोई सकारात्मक एजेंडा', और वे अपनी रिसर्च टीम की पर्ची के आधार पर बयान देकर मतदाताओं को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं।
कांग्रेस नेताओं के बयानों पर सवाल
बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस के भीतर महिलाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों की एक लंबी सूची प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सांसद कंगना रनौत के बारे में अभद्र टिप्पणी की, तो राहुल गांधी चुप रहे। इसी तरह, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा हेमा मालिनी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग (ECI) ने 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया, लेकिन राहुल गांधी ने एक शब्द नहीं कहा। बांसुरी स्वराज ने बताया कि उन्होंने स्वयं इस मामले में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को 'राष्ट्रपत्नी' कहे जाने और मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा 2020 में एक महिला उम्मीदवार को 'आइटम' कहे जाने पर भी उन्होंने राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस विधायक के.आर. रमेश के एक विवादास्पद बयान पर कांग्रेस विधायक और स्पीकर हंसते रहे, जबकि राहुल गांधी मौन रहे।
कर्नाटक और हिमाचल में महिला मंत्री नहीं
बांसुरी स्वराज ने तर्क दिया कि कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें हैं, फिर भी दोनों राज्यों की कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं है। उनके अनुसार, यह साबित करता है कि राहुल गांधी के लिए महिला सशक्तीकरण महज एक राजनीतिक नारा है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कांग्रेस का रुख
बांसुरी स्वराज ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने 'लाल बटन दबाकर' यह सुनिश्चित किया कि यह विधेयक पारित न हो। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी महिलाओं की भूमिका को केवल मतदाता तक सीमित रखना चाहते हैं।
वंदे मातरम पर चुनौती
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे सच में पितृसत्ता खत्म करना चाहते हैं, तो पूरा 'वंदे मातरम' गाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने एक प्रस्ताव पास कर इस गीत को छोटा कर दिया, जो संसद द्वारा 'जन गण मन' के बराबर दर्जा पाया हुआ गीत है। आगे राजनीतिक तकरार और पार्टियों के जवाब-दर-जवाब का दौर जारी रहने की संभावना है।