13 जुलाई 2026
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बशीर बद्र का भोपाल में निधन: सीएम मोहन यादव ने एक्स पर दी श्रद्धांजलि, 91 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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बशीर बद्र का भोपाल में निधन: सीएम मोहन यादव ने एक्स पर दी श्रद्धांजलि, 91 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

सारांश

उर्दू शायरी को आम ज़ुबान देने वाले पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र अब नहीं रहे। 91 वर्ष की उम्र में भोपाल में उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित साहित्य जगत ने गहरा शोक जताया। उनकी ग़ज़लें और इंसानियत का पैगाम हमेशा जिंदा रहेगा।

मुख्य बातें

पद्मश्री सम्मानित शायर डॉ.
बशीर बद्र का 28 मई 2026 को भोपाल में 91 वर्ष की आयु में निधन।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी और परिजनों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
बद्र डिमेंशिया और उम्र से जुड़ी बीमारियों से लंबे समय से पीड़ित थे।
जन्म 15 फरवरी 1935 , अयोध्या ; असली नाम सैयद मोहम्मद बशीर ; अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षित।
मेरठ कॉलेज में उर्दू प्रोफेसर रहे; 1970-80 के दशक में ग़ज़लों ने अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

पद्मश्री सम्मानित मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का 28 मई 2026 को भोपाल में निधन हो गया। 91 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से साहित्य जगत, उर्दू अदब और शायरी प्रेमियों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।

मुख्यमंत्री की श्रद्धांजलि

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दिवंगत शायर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, 'पद्म श्री से सम्मानित, प्रसिद्ध शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।' मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि डॉ. बद्र ने अपनी रचनाओं के ज़रिये लोगों को संवेदनशीलता, अपनत्व और मानवता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी।

मोहन यादव ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की।

लंबी बीमारी से जूझ रहे थे

जानकारी के अनुसार, डॉ. बशीर बद्र लंबे समय से डिमेंशिया और उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। पिछले कुछ वर्षों में उनकी याददाश्त काफी कमज़ोर हो गई थी और वे परिचितों को भी पहचान नहीं पा रहे थे।

जीवन परिचय

डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में हुआ था। उनका असली नाम सैयद मोहम्मद बशीर था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में मेरठ कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया।

साहित्यिक विरासत

1970 और 80 के दशक में उनकी ग़ज़लों ने देश-दुनिया में विशेष पहचान बनाई। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने उर्दू शायरी को जटिल शब्दों से निकालकर आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत किया। जिंदगी की सच्चाई, रिश्तों की मिठास, मोहब्बत, दर्द और इंसानी एहसास — सब कुछ उनकी रचनाओं में बेहद खूबसूरती से झलकता था। यही कारण है कि उनकी शायरी आज भी करोड़ों दिलों में जीवित है।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने उनकी साहित्यिक सेवाओं को मान्यता देते हुए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनके निधन के साथ उर्दू अदब का एक स्वर्णिम अध्याय बंद हो गया है, लेकिन उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को मानवता और संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बद्र की शायरी एक सेतु का काम करती थी। मुख्यमंत्री की एक्स-श्रद्धांजलि राजनीतिक शिष्टाचार से आगे जाकर यह भी रेखांकित करती है कि साहित्यिक विरासत को राज्य-स्तरीय मान्यता अभी भी मिलती है। असली श्रद्धांजलि यह होगी कि उनकी रचनाओं को पाठ्यक्रम और सार्वजनिक मंचों पर जीवित रखा जाए।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. बशीर बद्र का निधन कब और कहाँ हुआ?
डॉ. बशीर बद्र का निधन 28 मई 2026 को भोपाल में हुआ। 91 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली।
बशीर बद्र कौन थे और उन्हें क्यों जाना जाता है?
डॉ. बशीर बद्र पद्मश्री सम्मानित उर्दू शायर थे, जिन्होंने उर्दू को सरल और आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत किया। 1970-80 के दशक में उनकी ग़ज़लें देश-दुनिया में मशहूर हुईं और उन्होंने मेरठ कॉलेज में उर्दू प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएँ दीं।
सीएम मोहन यादव ने बशीर बद्र को श्रद्धांजलि कैसे दी?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए डॉ. बद्र को विनम्र श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि डॉ. बद्र की शायरी मानवता और संवेदनशीलता का संदेश देती रहेगी।
बशीर बद्र की मृत्यु का कारण क्या था?
जानकारी के अनुसार डॉ. बशीर बद्र लंबे समय से डिमेंशिया और उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे। पिछले कुछ वर्षों में उनकी याददाश्त काफी कमज़ोर हो गई थी।
बशीर बद्र का जन्म कहाँ हुआ था और उनकी शिक्षा कहाँ से हुई?
डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में हुआ था और उनका असली नाम सैयद मोहम्मद बशीर था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की।
राष्ट्र प्रेस
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