बस्ती के ₹63.59 करोड़ के अटल आवासीय विद्यालय में एक हफ्ते से जलभराव, छात्र अभिभावकों के पास भेजे गए
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में ₹63.59 करोड़ की लागत से निर्मित अटल आवासीय विद्यालय में करीब एक सप्ताह से डेढ़ से दो फीट तक जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है। पानी स्कूल की सीढ़ियों और हॉस्टल के प्रवेश द्वार तक पहुँच चुका है, जिससे छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है। 5 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, कक्षा 6 से 11 तक के छात्रों को 10 अक्टूबर तक उनके अभिभावकों के पास भेज दिया गया है।
जलभराव की स्थिति और छात्रों पर असर
छात्र अंश तिवारी ने बताया कि परिसर में करीब एक सप्ताह से पानी जमा है। रोज़ाना पानी के बीच से गुजरने के कारण कई छात्रों के पैरों में खुजली और दाने निकल आए हैं। छात्रों को पानी से गुजरने के बाद पैर धोने की सलाह दी जा रही है।
एक अन्य छात्र जितेंद्र ने बताया कि रात में बिजली कटने की स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि बाहर पानी भरा होने से परिसर में अंधेरे का खतरा रहता है। विद्यालय परिसर से सटकर मनोरमा नदी बहती है, जिसके ओवरफ्लो से जलभराव की स्थिति और बिगड़ती है।
अधिकारियों का निरीक्षण और कारण
श्रम विभाग की अपर आयुक्त रचना केशरवानी ने बताया कि 1 अक्टूबर 2026 को मंडलायुक्त और मुख्य विकास अधिकारी समेत अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और समस्या के समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय का क्षेत्र निचले और लो-लैंड में होने के कारण जलभराव की स्थिति बनती है।
इसके अलावा विद्यालय का सीवरेज सिस्टम जिस नाले से जुड़ा है, मनोरमा नदी में बाढ़ आने पर वह ओवरफ्लो हो जाता है और पानी वापस विद्यालय की ओर आने लगता है। बाउंड्री वॉल के नीचे से भी पानी परिसर में प्रवेश कर रहा है। 2024 में पंपिंग सेट से पानी निकालने की कोशिश में यह आशंका सामने आई थी कि पानी रिसाव के जरिए दोबारा वापस आ सकता है, इसलिए फिलहाल छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
स्थायी समाधान की कोशिशें और देरी
यह पहली बार नहीं है — जुलाई 2024 में भी जब विद्यालय में शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ था, तब भी जलभराव की समस्या सामने आई थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग भवन ने स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार की। पहले ₹725 लाख का प्रस्ताव दिया गया, जिसे बाद में संशोधित कर ₹872 लाख किया गया।
गौरतलब है कि पहले के प्रस्ताव में यह भी सुझाव था कि खर्च से पहले किसी विश्वविद्यालय या तकनीकी संस्थान से योजना का परीक्षण कराया जाए। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने इसे IIT को परीक्षण के लिए भेजा। जनवरी 2026 में हुई बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने विभाग के उच्चाधिकारियों को स्थिति स्पष्ट कर स्थायी समाधान के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे — लेकिन दो वर्षों बाद भी समस्या जस की तस है।
कक्षा 10 के मॉक टेस्ट और सोलर पैनल का खतरा
अपर आयुक्त केशरवानी ने बताया कि कक्षा 10 के छात्रों को प्रारंभ में इसलिए रोका गया था क्योंकि उनका 5 से 10 अक्टूबर तक मॉक टेस्ट निर्धारित है। इन परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बोर्ड से पहले ही भेजे जाते हैं और उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर भेजने की प्रक्रिया होती है।
हालाँकि अब जलभराव बढ़ने और स्कूल के सोलर पैनल के भी पानी में डूबने की आशंका के बाद बिजली व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी को अभिभावकों के पास भेजने का निर्णय लिया गया।
आगे की स्थिति
अपर आयुक्त के अनुसार, पहले चरण में 10 अक्टूबर 2026 तक विद्यालय बंद रहेगा। इसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। यदि जलभराव नियंत्रित हो गया तो छात्रों को 11 अक्टूबर से वापस बुलाया जा सकता है, अन्यथा छुट्टी को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। यह ₹63.59 करोड़ की सरकारी संपत्ति और उसमें पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य, दोनों के लिए एक कड़ी परीक्षा की घड़ी है।