पुलवामा के त्राल में भालू के हमले में मुश्ताक अहमद घायल, नागबल गांव में दहशत
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल क्षेत्र के नागबल गांव में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को एक भालू ने मुश्ताक अहमद पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गए। घटना उस समय हुई जब वह सुबह अपने घर से बाहर निकले थे; उन्हें तत्काल इलाज के लिए नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटनाक्रम और तत्काल प्रतिक्रिया
वन्यजीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हमले की सूचना मिलते ही एक दल को नागबल गांव भेजा गया। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से सुबह-सवेरे अकेले बाहर न निकलने की अपील की। जंगली जानवर की उपस्थिति की निगरानी के लिए गश्त तेज़ की गई है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर
यह घटना अकेली नहीं है — आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच जम्मू-कश्मीर में मानव-पशु संघर्ष के 15,661 से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें 32 लोगों की मौत हुई और 350 से अधिक लोग घायल हुए। व्यापक रूप से देखें तो 2020 से 2025 के बीच ऐसी 17,200 से अधिक घटनाएं घटीं, जिनमें 100 से अधिक जानें गईं और लगभग 1,100 लोग घायल हुए।
इन संघर्षों में मुख्य रूप से एशियाई काले भालू, हिमालयी भूरे भालू और भारतीय तेंदुए शामिल हैं। मृत्यु दर उत्तरी कश्मीर के बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा तथा डोडा, किश्तवाड़ और अनंतनाग जैसे पहाड़ी जिलों में अधिक है, जबकि जम्मू जिले में कुल घटनाओं की संख्या सर्वाधिक है।
संघर्ष के मूल कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, वनोन्मूलन, सड़क निर्माण और शहरी विस्तार वन्यजीव गलियारों को खंडित कर देते हैं, जिससे जानवर भोजन और आश्रय की तलाश में गांवों और बागों की ओर आ जाते हैं। मानव बस्तियों के पास आवारा कुत्तों की बड़ी आबादी तेंदुओं को आवासीय क्षेत्रों तक खींचती है, जबकि खुले में फेंका जाने वाला कचरा अन्य शिकारियों को आकर्षित करता है।
गौरतलब है कि शरद ऋतु में भालू शीतनिद्रा से पहले ऊर्जा संग्रह के लिए बागों और आवासीय क्षेत्रों के करीब आ जाते हैं, जिससे इस मौसम में हमलों की आशंका बढ़ जाती है। त्राल की यह घटना इसी मौसमी पैटर्न का हिस्सा मानी जा रही है।
सरकारी उपाय और ग्रामीणों की माँग
जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश में 42 वन्यजीव नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं, जो बेहोश करने वाली बंदूकों, बचाव वाहनों, पिंजरों और पाल-जालों से लैस हैं। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष वन्यजीव बचाव वाहन भी तैनात किए गए हैं।
बावजूद इसके, नागबल और आसपास के गांवों के निवासियों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर निगरानी अपर्याप्त है। उन्होंने वन्यजीव विभाग से संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और मानव बस्तियों के लिए ख़तरा बन चुके जानवरों को पकड़कर दूर स्थानांतरित करने का आग्रह किया है।
आगे की राह
मुश्ताक अहमद का अस्पताल में उपचार जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। वन्यजीव विभाग का दल भालू की उपस्थिति का पता लगाने के लिए क्षेत्र में सक्रिय है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे जम्मू-कश्मीर में वन्यजीव-मानव संघर्ष को लेकर नीतिगत उपायों की माँग लगातार तेज़ हो रही है।