जापान में भालू हमले रिकॉर्ड स्तर पर, 40% से अधिक स्थानीय निकाय अभद्र शिकायतों से भी परेशान
सारांश
मुख्य बातें
जापान में इंसानों और भालुओं के बीच मुठभेड़ें अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गई हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक समाप्त हुए एक वर्ष में 50,000 से अधिक मुठभेड़ें दर्ज की गईं — जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी और अब तक का रिकॉर्ड है। रिहायशी इलाकों में भालुओं की बढ़ती आमद ने न केवल आम नागरिकों में भय का माहौल बनाया है, बल्कि स्थानीय प्रशासन के सामने एक अलग किस्म की चुनौती भी खड़ी कर दी है — अभद्र और आक्रामक शिकायतकर्ताओं की।
सर्वेक्षण में क्या सामने आया
जापान के आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय ने पिछले साल जुलाई में 40 प्रीफेक्चरल और नगरपालिका प्रशासनों का सर्वेक्षण शुरू किया था। इस सर्वेक्षण में पाया गया कि 40 प्रतिशत से अधिक स्थानीय निकायों को भालुओं से जुड़ी शिकायतों के जवाब में अभद्र व्यवहार और अत्यधिक लंबे फोन कॉल का सामना करना पड़ा। इनमें से 17 स्थानीय निकायों ने स्वीकार किया कि इन शिकायतों ने उनके नियमित कामकाज को सीधे प्रभावित किया।
इन 17 निकायों में से 10 ने बताया कि शिकायतों का जवाब देने में असाधारण समय लग रहा है — कई फोन कॉल एक घंटे से भी अधिक तक चले। वहीं पाँच स्थानीय निकायों ने कहा कि उनकी वेबसाइट और ईमेल पर संदेशों की बाढ़ आ गई।
अधिकारियों के साथ कैसा व्यवहार हुआ
कुछ मामलों में नागरिकों का रवैया बेहद आक्रामक रहा। अधिकारियों को ऐसे संदेश मिले जिनमें लिखा था — 'भालुओं को कभी मत मारना!' वहीं एक व्यक्ति बार-बार फोन करके यह माँग करता रहा कि उसे सीधे गवर्नर से बात कराई जाए।
एक अन्य मामले में, पकड़े गए भालू को छोड़े जाने के बाद प्रशासन को बड़ी संख्या में टिप्पणियाँ मिलीं, जिनमें से कुछ में पूछा गया — 'आपने उसे मारा क्यों नहीं?' इससे स्पष्ट होता है कि जनमत दो धुर विपरीत खेमों में बँटा हुआ है।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि वन्यजीव सुरक्षा के एक पैरोकार ने एक सरकारी कर्मचारी की बिना अनुमति तस्वीर खींची और उसे ऑनलाइन पोस्ट कर दिया — जो उत्पीड़न की एक गंभीर घटना मानी जा रही है।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे कर्मचारियों पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाने की जरूरत है। कुछ स्थानीय प्रशासनों ने केंद्र सरकार से ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने की माँग भी की है।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब भालुओं की बढ़ती गतिविधि ने जापान के कई इलाकों में सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है।
सुरक्षा बनाम संरक्षण का द्वंद्व
एक तरफ स्थानीय प्रशासन को नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण समर्थक भालुओं को मारने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाने की माँग कर रहे हैं। इस द्वंद्व के बीच जमीन पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारी दोनों पक्षों के दबाव में पिस रहे हैं। आगे यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार दिशानिर्देश जारी करने में कितनी तेजी दिखाती है और क्या ये दिशानिर्देश प्रशासनिक कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा दे पाते हैं।