पश्चिम बंगाल में 375 'पशु औषधि विक्रय केंद्र' खुलेंगे, सस्ती दवाएँ और टीके होंगे उपलब्ध
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार के पशु संसाधन विकास विभाग ने राज्य में 375 उचित मूल्य वाली पशु दवा दुकानें खोलने का निर्णय लिया है, जिन्हें आधिकारिक रूप से 'पशु औषधि विक्रय केंद्र' (पीएवीके) नाम दिया गया है। विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ये केंद्र केंद्र सरकार के 'पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम' के अंतर्गत संचालित होंगे और पालतू जानवरों के मालिकों से लेकर पशुधन पर आजीविका निर्भर करने वाले किसानों तक को राहत देंगे।
केंद्रों की संरचना और वितरण
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 375 पीएवीके को तीन स्तरों पर विभाजित किया गया है। 1 मुख्य केंद्र राज्य की राजधानी कोलकाता में राज्य स्तर पर स्थापित होगा। इसके अतिरिक्त 30 जिला-स्तरीय और 344 ब्लॉक-स्तरीय पीएवीके खोले जाएंगे।
यह त्रिस्तरीय ढाँचा विशेष रूप से दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जहाँ पशुपालक अब तक महंगी निजी दुकानों पर निर्भर रहने को मजबूर थे।
क्या मिलेगा और कितने में
इन केंद्रों पर कुत्तों सहित पालतू जानवरों के लिए दवाएँ और टीके निजी पेट शॉप या पेट क्लीनिक की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध होंगे। अधिकारियों के अनुसार, जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
कोलकाता निवासी पशु प्रेमी जयिता सरकार ने कहा, 'अक्सर हमें अपने पालतू जानवरों के लिए दवाएँ और टीके — खासकर पिल्लों के लिए रेबीज के टीके — बहुत ज़्यादा कीमत पर खरीदने पड़ते हैं क्योंकि पशु चिकित्सक सिर्फ महंगी ब्रांडेड दवाएँ ही लिखते हैं। अब राज्य सरकार की इस पहल से यह समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।'
कथित घोटाले पर अंकुश लगाने की कोशिश
विभाग के अधिकारी ने स्वीकार किया कि पशु दवाओं और टीकों को लेकर कथित तौर पर एक बड़ा घोटाला लंबे समय से चल रहा है, जिसमें कुछ पशु चिकित्सकों और फार्मास्युटिकल कंपनियों के प्रतिनिधियों की संलिप्तता के आरोप लगते रहे हैं।
अधिकारी के अनुसार, कुछ पशु चिकित्सकों पर यह आरोप लगता है कि वे जेनेरिक दवाओं के बजाय खास ब्रांड की दवाएँ और टीके लिखते हैं, और इसके बदले में उन्हें भारी कमीशन तथा दवा निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों से अन्य लाभ मिलते हैं। उन्होंने कहा, 'एक बार जब ये उचित मूल्य वाली दवा की दुकानें काम करने लगेंगी, तो ऐसे कथित घोटाले अपने आप कम हो जाएंगे।'
पशुपालकों और किसानों को फायदा
यह पहल केवल शहरी पालतू जानवरों के मालिकों तक सीमित नहीं है। ब्लॉक स्तर पर 344 पीएवीके खोलने का उद्देश्य उन किसानों और ग्रामीणों की मदद करना है जो अपनी आजीविका के लिए पशुधन पर निर्भर हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पशुपालन एक महत्वपूर्ण ग्रामीण अर्थव्यवस्था है, और दवाओं की ऊँची कीमत छोटे पशुपालकों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। यह कदम उस दिशा में एक ठोस नीतिगत हस्तक्षेप माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है, और इन केंद्रों को जल्द स्थापित करने की तैयारी चल रही है। पशु संसाधन और पशु स्वास्थ्य निदेशालय इन सभी केंद्रों का संचालन करेगा। इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आपूर्ति श्रृंखला कितनी पारदर्शी और नियमित बनाई जाती है।