पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों पर लगाम कसी, नए सत्यापन प्रोटोकॉल जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 2 अक्टूबर 2026 को राज्य भर के निजी चिकित्सा संस्थानों में फर्जी पंजीकरण संख्याओं और जाली प्रमाणपत्रों के सहारे चिकित्सा कार्य करने वाले लोगों पर अंकुश लगाने के लिए कड़े सत्यापन प्रोटोकॉल जारी किए हैं। विभाग की अधिसूचना के अनुसार, अब किसी भी निजी चिकित्सा संस्थान को डॉक्टर की नियुक्ति से पहले उसकी पंजीकरण संख्या का अनिवार्य सत्यापन करना होगा।
नए प्रोटोकॉल में क्या है
पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीकरण, विनियमन और पारदर्शिता) नियम, 2017 के नियम 7(4) के तहत सभी निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियुक्त किए जाने वाले चिकित्सक के दस्तावेज़ों का पूर्ण सत्यापन हो। इसमें शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण प्रमाणपत्र और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने का वैध अधिकार — तीनों की जाँच शामिल है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अक्सर ऐसे व्यक्ति सामने आते हैं जो वैध पंजीकरण संख्या या अभ्यास की अनुमति के बिना खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज करते हैं। उन्होंने कहा, 'इससे आम लोग भ्रमित होते हैं, इसलिए हमने लाइसेंसिंग अधिकारियों को इस धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने को कहा है।'
संदेह होने पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी चिकित्सक की पहचान, योग्यता, पंजीकरण या चिकित्सा सेवाएं देने के अधिकार को लेकर कोई भी संशय उत्पन्न हो, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित किया जाए। ऐसे मामलों में पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद का ध्यान तत्काल आकर्षित किया जाना चाहिए, ताकि संबंधित डॉक्टर की योग्यता की शीघ्र पुष्टि हो सके।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी पहचान के साथ या पंजीकरण के बिना चिकित्सा सेवाएं देते हुए दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी और कड़ी सज़ा सुनिश्चित की जाएगी।
मुद्दा कैसे उठा
यह ऐसे समय में आया है जब निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के संघ ने उन मामलों को सार्वजनिक रूप से उठाया था, जिनमें वैध पंजीकरण के बिना व्यक्तियों को निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में नियुक्त किया गया था। संघ ने यह भी उजागर किया था कि ऐसे कुछ व्यक्ति निजी क्लीनिकों के ज़रिये स्वतंत्र रूप से मरीजों का उपचार कर रहे थे — जो मरीजों की जान के लिए सीधा खतरा है।
गौरतलब है कि संघ ने राज्य सरकार और चिकित्सा परिषद से अनधिकृत चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी, और इसी माँग के परिणामस्वरूप ये नए प्रोटोकॉल अस्तित्व में आए हैं।
चिकित्सक संगठनों की प्रतिक्रिया
राज्य के प्रमुख चिकित्सक संगठन पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने नए दिशानिर्देशों का स्वागत किया है। फोरम का मानना है कि इन प्रोटोकॉल से न केवल वास्तविक चिकित्सकों की साख सुरक्षित होगी, बल्कि मरीजों को भी बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
आगे क्या होगा
राज्य स्वास्थ्य विभाग के इन नए प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी लाइसेंसिंग अधिकारियों पर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सफल क्रियान्वयन के लिए पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद के साथ नियमित समन्वय और डिजिटल सत्यापन तंत्र का विकास अनिवार्य होगा। यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में जवाबदेही की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।