14 सितंबर 2026
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बंगाल में फर्जी होम्योपैथी कॉलेज: परिषद ने राज्य सरकार को चेताया, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन नंबर का भंडाफोड़

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बंगाल में फर्जी होम्योपैथी कॉलेज: परिषद ने राज्य सरकार को चेताया, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन नंबर का भंडाफोड़

सारांश

पश्चिम बंगाल में बिना मान्यता के चल रहे होम्योपैथी कॉलेज न सिर्फ डिग्री बाँट रहे हैं, बल्कि डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर फर्जी चिकित्सकों को क्लीनिक चलाने का मौका दे रहे हैं। होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद ने राज्यभर में बिना मान्यता के चल रहे होम्योपैथी और बायोकेमिस्ट्री कॉलेजों पर 14 सितंबर 2026 को अलर्ट जारी किया।
आरोप है कि इन संस्थानों ने छात्रों को डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किए, जो पहले से पंजीकृत डॉक्टरों के नंबरों की नकल थे।
कथित तौर पर इनमें से अधिकांश संस्थान पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में खुले और इन्हें राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग से भी मान्यता नहीं मिली।
प्रभावित जिलों में कूच बिहार, नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना और वेस्ट मिदनापुर शामिल हैं।
परिषद ने मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया।
होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जनता से परिषद की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन नंबर से डॉक्टरों की प्रामाणिकता जाँचने की अपील की।

पश्चिम बंगाल की होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद ने राज्य सरकार को राज्यभर में बिना मान्यता के संचालित हो रहे होम्योपैथी और बायोकेमिस्ट्री कॉलेजों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। परिषद के अनुसार, इन अनधिकृत संस्थानों पर आरोप है कि वे अपने स्नातक छात्रों को गैरकानूनी तरीके से रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर रहे हैं — और इनमें से कई नंबर पहले से ही विधिवत पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को आवंटित रजिस्ट्रेशन नंबरों की डुप्लीकेट कॉपी बताए जा रहे हैं। यह मामला 14 सितंबर 2026 को सामने आया।

परिषद ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद ने राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल को पत्र लिखकर इन अनाधिकृत संस्थानों के विरुद्ध तत्काल और सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि स्नातक छात्रों को रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करने का अधिकार केवल होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद को है, और इस कार्य को कोई अन्य संस्था नहीं कर सकती। परिषद ने राज्य प्रशासन से इन संस्थानों तथा फर्जी रजिस्ट्रेशन के बल पर क्लीनिक चला रहे व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अपील की है।

कूच बिहार सहित चार जिलों में फर्जी कॉलेजों की चेन

परिषद के एक अंदरूनी सूत्र के अनुसार, हाल ही में उत्तरी बंगाल के कूच बिहार जिले में बिना किसी सरकारी अनुमति के चल रहे होम्योपैथी और बायोकेमिस्ट्री कॉलेजों की एक पूरी 'चेन' का पता चला है। इसके अलावा नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना और वेस्ट मिदनापुर जिलों में भी ऐसे संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इन संस्थानों को न तो राज्य की होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद से मान्यता मिली है और न ही राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग से।

तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तेजी से खुले संस्थान

परिषद का कहना है कि इनमें से अधिकांश संस्थान पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में तेजी से खुले थे। गौरतलब है कि बिना मान्यता के चल रहे ये संस्थान न केवल छात्रों का भविष्य दाँव पर लगा रहे हैं, बल्कि आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहे हैं। परिषद के सूत्र ने बताया, "इन संस्थानों से पास होने वाले कुछ छात्रों को डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन नंबर दिए गए हैं, जो पहले ही सही तरीके से रजिस्टर्ड डॉक्टरों को दिए जा चुके थे। खबर है कि कई लोग ऐसे फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों का इस्तेमाल करके अलग अलग जिलों में क्लीनिक चला रहे हैं।"

आम जनता पर असर और सतर्कता की सलाह

इस मामले के सामने आने के बाद होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जनता को सतर्क किया है। एसोसिएशन ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे किसी भी होम्योपैथिक चिकित्सक से इलाज कराने से पहले उनकी प्रामाणिकता की जाँच करें। इसके लिए वे परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 'होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर्स लिस्ट' का उपयोग कर सकते हैं, जहाँ प्रिस्क्रिप्शन पर दर्ज रजिस्ट्रेशन नंबर से डॉक्टर की असलियत की पुष्टि की जा सकती है।

आगे क्या होगा

परिषद के अनुरोध के बाद राज्य प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन फर्जी संस्थानों और उनसे जुड़े अवैध चिकित्सकों पर समय रहते नकेल नहीं कसी गई, तो मरीजों की सेहत से बड़े पैमाने पर खिलवाड़ हो सकता है। राज्य प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और जाँच के परिणाम ही तय करेंगे कि इस स्वास्थ्य घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इसका अर्थ है कि फर्जी चिकित्सक वैध डॉक्टरों की पहचान के आवरण में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब ये संस्थान कथित तौर पर पिछले कई वर्षों में तेजी से फैले, तो राज्य की निगरानी व्यवस्था कहाँ थी। परिषद का पत्र महत्वपूर्ण है, लेकिन असली परीक्षा राज्य प्रशासन की प्रतिक्रिया की गति और उसकी व्यापकता से होगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में फर्जी होम्योपैथी कॉलेजों का मामला क्या है?
पश्चिम बंगाल होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद ने राज्य में बिना मान्यता के संचालित होम्योपैथी और बायोकेमिस्ट्री कॉलेजों के खिलाफ अलर्ट जारी किया है। आरोप है कि ये संस्थान छात्रों को अवैध रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर रहे हैं, जो कानूनी रूप से केवल परिषद द्वारा दिए जा सकते हैं।
डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन नंबर से मरीजों को क्या खतरा है?
कथित तौर पर इन फर्जी संस्थानों से पास हुए कुछ छात्रों को ऐसे रजिस्ट्रेशन नंबर दिए गए हैं जो पहले से ही वैध होम्योपैथिक डॉक्टरों को आवंटित हैं। इन डुप्लीकेट नंबरों का उपयोग कर अयोग्य व्यक्ति विभिन्न जिलों में क्लीनिक चला रहे हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य को सीधा खतरा है।
कौन से जिले इस मामले में प्रभावित बताए गए हैं?
परिषद के अनुसार, कूच बिहार, नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना और वेस्ट मिदनापुर जिलों में ऐसे अनधिकृत संस्थान तेजी से बढ़े हैं। कूच बिहार में तो होम्योपैथी और बायोकेमिस्ट्री कॉलेजों की पूरी एक 'चेन' बिना सरकारी अनुमति के चल रही बताई जा रही है।
मरीज किसी होम्योपैथिक डॉक्टर की असलियत कैसे जाँचें?
होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सलाह दी है कि मरीज होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 'होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर्स लिस्ट' में जाकर प्रिस्क्रिप्शन पर दर्ज रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर डॉक्टर की प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकते हैं।
राज्य सरकार से परिषद ने क्या माँग की है?
परिषद ने मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल को पत्र लिखकर अनधिकृत संस्थानों के विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई और फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों से प्रैक्टिस कर रहे व्यक्तियों पर कानूनी कदम उठाने का अनुरोध किया है।
राष्ट्र प्रेस
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