23 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नगर निकाय प्रमुखों से वापस, 1997 से सभी प्रमाण पत्रों की होगी जांच

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पश्चिम बंगाल: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नगर निकाय प्रमुखों से वापस, 1997 से सभी प्रमाण पत्रों की होगी जांच

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थानीय निकायों के राजनीतिक प्रतिनिधियों से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार छीन लिया है। फर्जी प्रमाण पत्रों से मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों के बीच 1997 से जारी सभी प्रमाण पत्रों की जाँच होगी और एक नया केंद्रीय डेटाबेस बनाया जाएगा।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 23 जुलाई 2026 को नगर निकाय प्रमुखों से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार वापस लिया।
अब केवल सरकारी अधिकारी ही ये प्रमाण पत्र जारी और सत्यापित कर सकेंगे; संविदा कर्मचारियों को यह अधिकार नहीं होगा।
वर्ष 1997 से जारी सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की जाँच होगी और एक नया डेटाबेस केंद्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा।
आरोप है कि फर्जी प्रमाण पत्रों का उपयोग मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने के लिए किया गया।
पुलिस बीरभूम, कूचबिहार और पश्चिम बर्दवान जिलों में छापेमारी अभियान चला रही है।
राज्यव्यापी घर-घर सर्वे के बाद अवैध प्रमाण पत्र रद्द किए जाएँगे।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 23 जुलाई 2026 को एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए नगर निगम, नगरपालिका और पंचायत जैसे स्थानीय निकायों के राजनीतिक प्रतिनिधियों से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार वापस ले लिया है। अब यह अधिकार केवल सरकारी अधिकारियों के पास होगा। यह घोषणा राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की।

मुख्य घोषणाएँ और नई व्यवस्था

मुख्य सचिव अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरे राज्य में अधिकारियों की नियुक्ति कर उन्हें जिम्मेदारियाँ सौंपेगा। उन्होंने कहा, 'राज्य का स्वास्थ्य विभाग इस काम के लिए पूरे राज्य में अधिकारियों की नियुक्ति करेगा और उन्हें जिम्मेदारियाँ सौंपेगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रमाण पत्रों का सत्यापन केवल सरकारी अधिकारी ही करेंगे — कोई संविदा कर्मचारी यह कार्य नहीं करेगा।

इसके अलावा, वर्ष 1997 से अब तक जारी किए गए सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की व्यापक जाँच की जाएगी और इसके आधार पर एक नया डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसे केंद्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

फर्जी प्रमाण पत्रों का पर्दाफाश — पृष्ठभूमि

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य पुलिस फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले गिरोहों का भंडाफोड़ करने के लिए कई जिलों में छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही है। आरोप है कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों का उपयोग मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने के लिए किया गया।

अग्रवाल ने बताया कि ये गड़बड़ियाँ मुख्य रूप से राज्य विधानसभा चुनाव से पहले चलाए गए विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान के दौरान सामने आईं। पुलिस को इस संबंध में कई शिकायतें मिली हैं।

पुलिस कार्रवाई — प्रभावित क्षेत्र

पुलिस छापेमारी और तलाशी अभियान बीरभूम जिले के सूरी, रामपुरहाट और दुबराजपुर, कूचबिहार जिले के कूचबिहार शहर तथा पश्चिम बर्दवान जिले की औद्योगिक टाउनशिप समेत कई स्थानों पर चलाई जा रही है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन अभियान के दौरान सामने आए मामलों के बाद की जा रही है।

आम जनता पर असर और सरकार का आश्वासन

मुख्य सचिव ने आम नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा, 'किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। जन्म प्रमाण पत्र का सत्यापन सिर्फ एक नियमित प्रक्रिया है।' जिन लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें घर-घर सर्वे के दौरान अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जाँच में अवैध पाए गए प्रमाण पत्र रद्द कर दिए जाएँगे।

प्रमाण पत्र जारी करने में गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। यह कदम राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

आगे की राह

नए डेटाबेस को केंद्रीय पोर्टल से जोड़ने के बाद राज्यव्यापी घर-घर सर्वे शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से लागू होती है, तो यह न केवल फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाएगी, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता भी सुनिश्चित करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस समय-सीमा को संदिग्ध बनाती है। असली सवाल यह है कि 1997 से चली आ रही इस व्यवस्था में गड़बड़ी इतने वर्षों तक क्यों नहीं पकड़ी गई। केवल अधिकार वापस लेने से समस्या हल नहीं होगी — जब तक नए डेटाबेस का सत्यापन तंत्र पारदर्शी और स्वतंत्र न हो, यह कवायद महज कागजी सुधार बनकर रह सकती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल सरकार ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का अधिकार किससे वापस लिया है?
राज्य सरकार ने नगर निगम, नगरपालिका और पंचायत जैसे स्थानीय निकायों के राजनीतिक प्रतिनिधियों से यह अधिकार वापस लिया है। अब केवल सरकारी अधिकारी ही जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी और सत्यापित कर सकेंगे।
यह फैसला क्यों लिया गया?
राज्य विधानसभा चुनाव से पहले चलाए गए विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान में बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मिले, जिनका उपयोग कथित तौर पर मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने के लिए किया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया।
1997 से जारी प्रमाण पत्रों की जाँच कैसे होगी?
राज्य का स्वास्थ्य विभाग 1997 से अब तक जारी सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की जाँच करेगा और एक नया डेटाबेस तैयार करेगा, जिसे केंद्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसके बाद घर-घर सर्वे किया जाएगा।
क्या आम नागरिकों को घबराने की जरूरत है?
मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है और किसी को घबराने की आवश्यकता नहीं है। जिन लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें घर-घर सर्वे के दौरान अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
पुलिस किन जिलों में छापेमारी कर रही है?
राज्य पुलिस बीरभूम जिले के सूरी, रामपुरहाट और दुबराजपुर, कूचबिहार जिले के कूचबिहार शहर तथा पश्चिम बर्दवान जिले की औद्योगिक टाउनशिप समेत कई स्थानों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही है।
राष्ट्र प्रेस
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