पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र रैकेट: बीरभूम, कूचबिहार समेत कई जिलों में पुलिस की छापेमारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने 24 जुलाई 2026 को राज्य के कई जिलों में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ व्यापक छापेमारी अभियान शुरू किया। बीरभूम, कूचबिहार और पश्चिम बर्दवान जिलों के पंचायत व नगर पालिका कार्यालयों को इस अभियान में निशाना बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई हाल की विधानसभा चुनाव-पूर्व 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सामने आई अनियमितताओं की जाँच के तहत की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस की छापेमारी बीरभूम जिले के सूरी, रामपुरहाट और दुबराजपुर, कूचबिहार जिले के कूचबिहार शहर तथा पश्चिम बर्दवान जिले के औद्योगिक क्षेत्र में एक साथ चलाई जा रही है। जाँच दल संबंधित कार्यालयों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का काम देखने वाले कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं। साथ ही, नगर पालिकाओं और पंचायतों के जन्म-मृत्यु पंजीकरण रजिस्टर और संबद्ध दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं।
पुलिस का बयान
राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'वोटर लिस्ट में तेजी से सुधार की प्रक्रिया के दौरान पूरे राज्य में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने के आरोप सामने आए थे। आरोप है कि कुछ पंचायतों और नगर पालिकाओं के कर्मचारियों की मिलीभगत से गलत तरीके से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए और फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह सक्रिय हो गए।' उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर फर्जी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए इस अवैध गतिविधि को बढ़ावा दिया गया। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
जाँच का दायरा
जाँच में यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कोई जन्म प्रमाणपत्र गैर-कानूनी तरीके से तो जारी नहीं किया गया, या किसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रमाणपत्र तो नहीं बनाया गया। गौरतलब है कि यह मामला चुनाव-पूर्व मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से सीधे जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी है।
नए नियम और सरकारी कदम
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार के सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए। फर्जी दस्तावेजों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया में संशोधन किए और कैबिनेट बैठक के बाद एक नया नोटिफिकेशन भी जारी किया गया। इसके बावजूद कथित तौर पर इन गिरोहों ने रास्ते निकाल लिए।
आगे क्या होगा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी अभियान जारी रहेगा और जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक जाँच की जाएगी। यह देखना अहम होगा कि जाँच में कितने कर्मचारी और बिचौलिए दोषी पाए जाते हैं, और क्या यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित है या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं।