23 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र रैकेट: बीरभूम, कूचबिहार समेत कई जिलों में पुलिस की छापेमारी

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पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र रैकेट: बीरभूम, कूचबिहार समेत कई जिलों में पुलिस की छापेमारी

सारांश

पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान छेड़ा है। बीरभूम, कूचबिहार और पश्चिम बर्दवान के पंचायत व नगर पालिका दफ्तरों में एक साथ छापेमारी हो रही है। आरोप है कि चुनाव-पूर्व मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों से वोटर लिस्ट में हेरफेर की गई।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल पुलिस ने 24 जुलाई 2026 को फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र रैकेट के खिलाफ बहु-जिला छापेमारी अभियान शुरू किया।
छापेमारी बीरभूम (सूरी, रामपुरहाट, दुबराजपुर), कूचबिहार और पश्चिम बर्दवान के पंचायत व नगर पालिका कार्यालयों में हो रही है।
आरोप है कि कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर वोटर लिस्ट में फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए।
पुलिस ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण रजिस्टर और संबंधित दस्तावेज जब्त किए; कर्मचारियों से पूछताछ जारी।
जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने 24 जुलाई 2026 को राज्य के कई जिलों में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ व्यापक छापेमारी अभियान शुरू किया। बीरभूम, कूचबिहार और पश्चिम बर्दवान जिलों के पंचायत व नगर पालिका कार्यालयों को इस अभियान में निशाना बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई हाल की विधानसभा चुनाव-पूर्व 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सामने आई अनियमितताओं की जाँच के तहत की जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस की छापेमारी बीरभूम जिले के सूरी, रामपुरहाट और दुबराजपुर, कूचबिहार जिले के कूचबिहार शहर तथा पश्चिम बर्दवान जिले के औद्योगिक क्षेत्र में एक साथ चलाई जा रही है। जाँच दल संबंधित कार्यालयों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का काम देखने वाले कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं। साथ ही, नगर पालिकाओं और पंचायतों के जन्म-मृत्यु पंजीकरण रजिस्टर और संबद्ध दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं।

पुलिस का बयान

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'वोटर लिस्ट में तेजी से सुधार की प्रक्रिया के दौरान पूरे राज्य में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने के आरोप सामने आए थे। आरोप है कि कुछ पंचायतों और नगर पालिकाओं के कर्मचारियों की मिलीभगत से गलत तरीके से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए और फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह सक्रिय हो गए।' उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर फर्जी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए इस अवैध गतिविधि को बढ़ावा दिया गया। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

जाँच का दायरा

जाँच में यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कोई जन्म प्रमाणपत्र गैर-कानूनी तरीके से तो जारी नहीं किया गया, या किसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रमाणपत्र तो नहीं बनाया गया। गौरतलब है कि यह मामला चुनाव-पूर्व मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से सीधे जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी है।

नए नियम और सरकारी कदम

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार के सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए। फर्जी दस्तावेजों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया में संशोधन किए और कैबिनेट बैठक के बाद एक नया नोटिफिकेशन भी जारी किया गया। इसके बावजूद कथित तौर पर इन गिरोहों ने रास्ते निकाल लिए।

आगे क्या होगा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी अभियान जारी रहेगा और जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक जाँच की जाएगी। यह देखना अहम होगा कि जाँच में कितने कर्मचारी और बिचौलिए दोषी पाए जाते हैं, और क्या यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित है या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो नियमित पंजीकरण में क्या हो रहा होगा? BJP सरकार ने नए नियम बनाए, फिर भी गिरोह सक्रिय रहे — यह नीति और क्रियान्वयन के बीच की खाई को उजागर करता है। जब तक जाँच के नतीजे सार्वजनिक नहीं होते और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, यह अभियान केवल दिखावटी सख्ती का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र रैकेट क्या है?
यह एक कथित गिरोह-नेटवर्क है जो पंचायत और नगर पालिका कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करता था। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल मतदाता सूची में फर्जी नाम दर्ज कराने के लिए किया गया।
छापेमारी किन जिलों में हो रही है?
पुलिस ने बीरभूम जिले के सूरी, रामपुरहाट और दुबराजपुर, कूचबिहार जिले के कूचबिहार शहर और पश्चिम बर्दवान जिले के औद्योगिक क्षेत्र में एक साथ छापेमारी की है।
इस रैकेट का चुनाव से क्या संबंध है?
अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह हाल की विधानसभा चुनाव-पूर्व 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सक्रिय हुआ। आरोप है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए मतदाता सूची में अवैध नाम जोड़े गए।
पुलिस इस जाँच में क्या कदम उठा रही है?
पुलिस जन्म-मृत्यु पंजीकरण रजिस्टर और दस्तावेज जब्त कर रही है, संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ का विकल्प खुला रखा है।
सरकार ने फर्जी प्रमाणपत्रों को रोकने के लिए क्या किया था?
BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव किए गए और कैबिनेट बैठक के बाद एक नया नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके बावजूद कथित तौर पर गिरोह सक्रिय रहे।
राष्ट्र प्रेस
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