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पश्चिम बंगाल में 2021-2026 के जन्म प्रमाण पत्रों का पुनर्सत्यापन अनिवार्य, BJP सरकार का बड़ा फैसला

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पश्चिम बंगाल में 2021-2026 के जन्म प्रमाण पत्रों का पुनर्सत्यापन अनिवार्य, BJP सरकार का बड़ा फैसला

सारांश

पश्चिम बंगाल की नई BJP सरकार ने 2021-2026 के बीच TMC शासन में जारी सभी जन्म प्रमाण पत्रों का पुनर्सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। चुनाव आयोग के SIR अभियान में सामने आए कथित फर्जी प्रमाण पत्रों की पृष्ठभूमि में यह कदम राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 अगस्त 2026 को 2021-2026 के बीच जारी सभी जन्म प्रमाण पत्रों के पुनर्सत्यापन का आदेश दिया।
मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के कार्यालय ने अधिसूचना जारी की; डिजिटल और ऑफलाइन दोनों प्रमाण पत्र जाँच के दायरे में।
ग्रामीण क्षेत्रों में BDO और शहरी क्षेत्रों में SDO सत्यापन करेंगे; आवश्यकता पर जाँच दल गठित होंगे।
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के SIR अभियान में बड़ी संख्या में कथित फर्जी प्रमाण पत्र सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया।
सत्यापन के परिणाम 'जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल' पर अपलोड किए जाएँगे; सितंबर 2026 तक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश।

पश्चिम बंगाल की नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने 21 अगस्त 2026 को एक अधिसूचना जारी कर राज्य में 2021 से 2026 के बीच जारी सभी जन्म प्रमाण पत्रों के अनिवार्य पुनर्सत्यापन का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में कई अनियमितताएँ पाई गई हैं, जिनके चलते यह कदम उठाया गया है।

पुनर्सत्यापन का दायरा और प्रक्रिया

मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पुनर्सत्यापन में डिजिटल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जारी जन्म प्रमाण पत्र शामिल होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और शहरी क्षेत्रों में उप-विभागीय अधिकारियों (SDO) को सौंपी गई है। आवश्यकता पड़ने पर BDO और SDO को विशेष जाँच दल गठित करने का अधिकार भी दिया गया है।

अधिसूचना के अनुसार, जाँच के दौरान पाए गए दस्तावेजों और उनके परिणामों को 'जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल' पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक जन्म प्रमाण पत्र के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसमें उल्लेख होगा कि संबंधित प्रमाण पत्र असली, नकली या दोषपूर्ण था।

फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला कैसे सामने आया

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के संज्ञान में बड़ी संख्या में कथित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र आए। यह ऐसे समय में आया है जब नई BJP सरकार ने सत्ता संभालते ही पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में जारी दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाने शुरू किए हैं।

गौरतलब है कि ये प्रमाण पत्र ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार के कार्यकाल में जारी किए गए थे। राज्य सचिवालय नबन्ना के एक अधिकारी के अनुसार, विलंबित पंजीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सत्यापन में क्या जाँचा जाएगा

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि प्रमाण पत्र जारी करते समय सत्यापित दस्तावेजों की गहन जाँच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं। BDO और SDO को प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी के अधिकार-क्षेत्र की भी समीक्षा करने को कहा गया है। राज्य सचिवालय के एक सूत्र के अनुसार, यदि कोई प्रमाण पत्र नकली या अवैध पाया जाता है तो उसका विशिष्ट कारण दस्तावेज में दर्ज किया जाना अनिवार्य होगा।

समयसीमा और आगे की राह

BDO और SDO को सितंबर 2026 तक यह पूरी सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। यह अभियान राज्य में दस्तावेज़ सत्यापन की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है, जिसके परिणाम आने वाले हफ्तों में सामने आएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह चुनिंदा समुदायों को प्रभावित करने वाला उपकरण बन जाएगी। विलंबित पंजीकरणों पर 'विशेष ध्यान' का उल्लेख चिंताजनक है, क्योंकि भारत में विलंबित जन्म पंजीकरण अक्सर हाशिये पर खड़े और ग्रामीण परिवारों की वास्तविकता होती है। बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र के, यह अभियान वैध नागरिकों को दस्तावेज़ी संकट में डालने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल सरकार ने जन्म प्रमाण पत्रों का पुनर्सत्यापन क्यों आदेश दिया?
नई BJP सरकार के अनुसार, 2021-2026 के बीच TMC शासन में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में कई अनियमितताएँ पाई गईं। इसके अलावा, विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग के SIR अभियान में बड़ी संख्या में कथित फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए थे।
पुनर्सत्यापन प्रक्रिया कौन करेगा और कब तक पूरी होगी?
ग्रामीण क्षेत्रों में BDO और शहरी क्षेत्रों में SDO यह सत्यापन करेंगे। दोनों अधिकारियों को सितंबर 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
पुनर्सत्यापन में किन दस्तावेजों की जाँच होगी?
डिजिटल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जारी जन्म प्रमाण पत्र जाँच के दायरे में हैं। अधिकारी यह देखेंगे कि प्रमाण पत्र जारी करते समय सत्यापित दस्तावेजों की जाँच हुई थी या नहीं और निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
यदि कोई जन्म प्रमाण पत्र नकली पाया जाए तो क्या होगा?
राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, नकली या अवैध पाए गए प्रमाण पत्र का विशिष्ट कारण दस्तावेज में दर्ज किया जाएगा और परिणाम 'जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल' पर अपलोड किए जाएँगे। प्रत्येक मामले के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना अनिवार्य होगा।
क्या यह पुनर्सत्यापन पूरे पश्चिम बंगाल में होगा?
हाँ, अधिसूचना के अनुसार यह अभियान राज्यभर में लागू होगा — ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में। विलंबित पंजीकरण वाले मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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