7 अगस्त 2026
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पश्चिम बंगाल में प्रशिक्षु आरक्षित डॉक्टरों की सीमा 477 से बढ़ाकर 662 की गई

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पश्चिम बंगाल में प्रशिक्षु आरक्षित डॉक्टरों की सीमा 477 से बढ़ाकर 662 की गई

सारांश

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 'प्रशिक्षु आरक्षित' डॉक्टरों की सीमा 477 से बढ़ाकर 662 कर दी है — एक लंबे समय से लंबित माँग जो अब पूरी हुई। इससे अधिक सेवारत सरकारी डॉक्टर MD-MS जैसे PG पाठ्यक्रम कर सकेंगे और राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में विशेषज्ञों की कमी दूर होगी।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 7 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर 'प्रशिक्षु आरक्षित' डॉक्टरों की अधिकतम सीमा 477 से बढ़ाकर 662 की।
'प्रशिक्षु आरक्षित' श्रेणी के डॉक्टर सेवा में रहते हुए सरकार प्रायोजित PG डिग्री या डिप्लोमा ( MD/MS ) कर सकते हैं।
यह सुविधा मुख्यतः ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात चिकित्सा अधिकारियों को मिलती है।
पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने निर्णय का स्वागत किया; कहा — अब PG सीटें व्यर्थ नहीं जाएँगी।
इस बदलाव से राज्य की सरकारी चिकित्सा प्रणाली में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने और सेवा गुणवत्ता सुधरने की उम्मीद।

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 7 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर 'प्रशिक्षु आरक्षित' (Trainee Reserve) श्रेणी में रखे जा सकने वाले सेवारत सरकारी डॉक्टरों की अधिकतम संख्या 477 से बढ़ाकर 662 कर दी है। इस निर्णय का उद्देश्य राज्य की सरकारी चिकित्सा प्रणाली में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि करना है।

प्रशिक्षु आरक्षित श्रेणी क्या होती है

'प्रशिक्षु आरक्षित' श्रेणी के अंतर्गत वे सेवारत सरकारी चिकित्सा अधिकारी आते हैं, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित स्नातकोत्तर (PG) डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम — जैसे MD या MS — में प्रवेश लेने के लिए उनके नियमित कर्तव्यों से अस्थायी रूप से मुक्त किया जाता है। यह सुविधा मुख्यतः ग्रामीण या दूरस्थ चिकित्सा चौकियों में तैनात चिकित्सा अधिकारियों को प्रदान की जाती है, और इस दौरान वे सेवा में बने रहते हैं।

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य सेवा, पश्चिम बंगाल लोक स्वास्थ्य प्रशासनिक सेवा और पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य शिक्षा सेवा के चिकित्सा अधिकारी इस श्रेणी में शामिल होने के पात्र हैं।

निर्णय की पृष्ठभूमि

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कदम राज्य संचालित चिकित्सा ढाँचे में विशेषज्ञता की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है। गौरतलब है कि राज्य में विभिन्न चिकित्सा मंचों द्वारा लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की माँग की जा रही थी। उनका तर्क था कि पुरानी सीमा के कारण स्नातकोत्तर सीटें खाली रह जाती थीं, जो संसाधनों की बर्बादी थी।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में सकारात्मक सुधारों का आश्वासन दिया था।

डॉक्टर्स फोरम की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने इस निर्णय का स्वागत किया है। फोरम के एक प्रतिनिधि ने कहा कि पहले, यदि 'प्रशिक्षु आरक्षित' श्रेणी की सीमा भर जाती थी, तो योग्य होने के बावजूद कई डॉक्टर उच्च शिक्षा के अवसर से वंचित रह जाते थे। अब अधिक डॉक्टर PG पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकेंगे।

फोरम के अनुसार, इस बदलाव से स्नातकोत्तर सीटों के व्यर्थ होने की संभावना भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी, जो राज्य की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी है।

आम जनता पर असर

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि का सीधा लाभ उन मरीज़ों को मिलेगा जो सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में। अधिक सेवारत डॉक्टरों के PG योग्यता हासिल करने से राज्य के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।

आगे की राह

स्वास्थ्य विभाग की इस अधिसूचना के बाद संबंधित सेवाओं के पात्र चिकित्सा अधिकारी नई सीमा के अनुसार आवेदन कर सकेंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य के पास इन अतिरिक्त 185 डॉक्टरों की अनुपस्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त प्रतिस्थापन व्यवस्था है — विशेषकर उन ग्रामीण चौकियों पर जहाँ पहले से कर्मचारियों की कमी है। PG सीटें भरना एक लक्ष्य है, लेकिन यदि इस दौरान ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएँ कमज़ोर पड़ें, तो दीर्घकालिक लाभ अल्पकालिक व्यवधान से ढक सकता है। नीति की सफलता उसके क्रियान्वयन के विवरण पर निर्भर करेगी, जो अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में 'प्रशिक्षु आरक्षित' डॉक्टर श्रेणी क्या होती है?
'प्रशिक्षु आरक्षित' श्रेणी में वे सेवारत सरकारी चिकित्सा अधिकारी होते हैं जिन्हें राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित MD या MS जैसे PG पाठ्यक्रम करने के लिए नियमित कर्तव्यों से अस्थायी रूप से मुक्त किया जाता है, जबकि वे सेवा में बने रहते हैं। यह सुविधा मुख्यतः ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों को मिलती है।
नई अधिसूचना के तहत डॉक्टरों की सीमा कितनी बढ़ाई गई है?
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 7 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना में यह सीमा 477 से बढ़ाकर 662 कर दी है, यानी 185 अतिरिक्त डॉक्टर अब इस श्रेणी में आ सकेंगे।
इस फैसले से राज्य के मरीज़ों को क्या फायदा होगा?
अधिक सेवारत डॉक्टरों के PG योग्यता हासिल करने से सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के मरीज़ों को मिलेगा जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं।
कौन-सी सेवाओं के डॉक्टर इस श्रेणी में शामिल हो सकते हैं?
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य सेवा, पश्चिम बंगाल लोक स्वास्थ्य प्रशासनिक सेवा और पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य शिक्षा सेवा के चिकित्सा अधिकारी इस 'प्रशिक्षु आरक्षित' श्रेणी में शामिल होने के पात्र हैं।
पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने इस निर्णय पर क्या कहा?
फोरम ने इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि पहले सीमा भर जाने पर योग्य डॉक्टर PG प्रवेश से वंचित रह जाते थे। अब अधिक डॉक्टर उच्च शिक्षा ले सकेंगे और स्नातकोत्तर सीटों के व्यर्थ होने की समस्या भी दूर होगी।
राष्ट्र प्रेस
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