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हिमाचल में संविदा चिकित्सा अधिकारियों का वेतन 78% बढ़ा, ₹33,660 से सीधे ₹60,000

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हिमाचल में संविदा चिकित्सा अधिकारियों का वेतन 78% बढ़ा, ₹33,660 से सीधे ₹60,000

सारांश

हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार ने संविदा विशेषज्ञ डॉक्टरों का वेतन एक झटके में 78% बढ़ाकर ₹60,000 कर दिया। PG छात्रों और सीनियर रेजिडेंट के वजीफे में भी 50% से 170% तक की बढ़ोतरी — दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की बड़ी कोशिश।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 5 अगस्त को संविदा व प्रशिक्षु चिकित्सा अधिकारियों (विशेषज्ञों) के वेतन में 78% वृद्धि को मंजूरी दी।
मासिक वेतन ₹33,660 से बढ़कर ₹60,000 हो गया है।
2022 में छठे वेतन आयोग के बाद वेतन ₹27,000 से ₹33,660 हुआ था; अब दूसरी बड़ी वृद्धि।
PG मेडिकल छात्रों का वजीफा — प्रथम वर्ष ₹50,000 , द्वितीय वर्ष ₹60,000 , तृतीय वर्ष ₹65,000 — पहले ही बढ़ाया जा चुका है।
सीनियर रेजिडेंट और विशेषज्ञ डॉक्टरों के वजीफे में 50% से 170% तक की बढ़ोतरी।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार, 5 अगस्त को हिमाचल प्रदेश में संविदा और प्रशिक्षु चिकित्सा अधिकारियों (विशेषज्ञों) के मासिक वेतन में 78 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी, जिससे वेतन ₹33,660 से बढ़कर ₹60,000 हो गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।

वेतन वृद्धि का पूरा विवरण

इससे पहले 2022 में छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद प्रशिक्षु चिकित्सा अधिकारियों (विशेषज्ञों) का वेतन 24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹27,000 से बढ़ाकर ₹33,660 किया गया था। अब नई वृद्धि के बाद यह ₹60,000 प्रति माह हो गया है — तीन वर्षों में कुल वृद्धि उल्लेखनीय है।

सरकारी बयान के अनुसार, इस निर्णय से विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवा देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

स्नातकोत्तर मेडिकल छात्रों के वजीफे में भी बढ़ोतरी

राज्य सरकार ने इससे पहले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल छात्रों के मासिक वजीफे में भी संशोधन किया था।

प्रथम वर्ष के PG छात्रों का वजीफा ₹40,000 से बढ़ाकर ₹50,000, द्वितीय वर्ष के लिए ₹45,000 से बढ़ाकर ₹60,000 और तृतीय वर्ष के लिए ₹50,000 से बढ़ाकर ₹65,000 कर दिया गया है। ये छात्र शैक्षणिक प्रशिक्षण के साथ-साथ रोगी देखभाल में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

सीनियर रेजिडेंट और विशेषज्ञों को भी राहत

मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत सीनियर रेजिडेंट और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों के मासिक वजीफे में 50 प्रतिशत से 170 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि इस वर्ग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को देखते हुए की गई है।

आम जनता पर असर

राज्य सरकार की मंशा है कि बेहतर वेतन पैकेज से विशेषज्ञ डॉक्टर शिमला और अन्य बड़े शहरों के बजाय दूर-दराज के क्षेत्रों में सेवा देने के लिए तैयार होंगे। इससे स्वास्थ्य सेवा के लिए राज्य से बाहर यात्रा करने की मजबूरी कम होगी और लोगों को उनके घरों के नज़दीक आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ मिल सकेंगी।

यह ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी राज्यों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। गौरतलब है कि कम वेतन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में प्रतिभाशाली डॉक्टरों को आकर्षित करने में बाधक रही हैं।

क्या होगा आगे

राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ पदों पर रिक्तियाँ भरने की प्रक्रिया तेज होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की यह श्रृंखला दर्शाती है कि सुक्खू सरकार चिकित्सा कर्मियों के मनोबल और सेवा-स्तर दोनों को एक साथ सुधारने की कोशिश कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या ₹60,000 का वेतन पैकेज वाकई विशेषज्ञ डॉक्टरों को लाहौल-स्पीति या किन्नौर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में खींच पाता है, जहाँ निजी क्षेत्र कहीं अधिक आकर्षक विकल्प देता है। पहाड़ी राज्यों में विशेषज्ञ पदों की रिक्तियाँ वर्षों से भरी नहीं जा सकी हैं — केवल वेतन नहीं, बल्कि आवास, बुनियादी ढाँचा और करियर-विकास के अवसर भी इस समीकरण का हिस्सा हैं। सुक्खू सरकार ने सही दिशा में कदम उठाया है, लेकिन बिना समग्र प्रोत्साहन नीति के यह उपाय आधा-अधूरा साबित हो सकता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों के वेतन में कितनी वृद्धि हुई है?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 5 अगस्त को संविदा और प्रशिक्षु चिकित्सा अधिकारियों (विशेषज्ञों) के वेतन में 78 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी, जिससे मासिक वेतन ₹33,660 से बढ़कर ₹60,000 हो गया है।
इससे पहले हिमाचल में डॉक्टरों का वेतन कब और कितना बढ़ा था?
2022 में छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद प्रशिक्षु चिकित्सा अधिकारियों का वेतन लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹27,000 से ₹33,660 किया गया था। अब 2026 में 78 प्रतिशत की दूसरी बड़ी वृद्धि की गई है।
हिमाचल में PG मेडिकल छात्रों का वजीफा कितना है?
राज्य सरकार ने पहले ही PG मेडिकल छात्रों के वजीफे में बढ़ोतरी की है — प्रथम वर्ष के लिए ₹50,000, द्वितीय वर्ष के लिए ₹60,000 और तृतीय वर्ष के लिए ₹65,000 प्रति माह निर्धारित किया गया है।
यह वेतन वृद्धि क्यों की गई है?
सरकार का उद्देश्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे राज्य के नागरिकों को अपने घरों के नज़दीक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकेंगी और स्वास्थ्य सेवा के लिए राज्य से बाहर जाने की मजबूरी कम होगी।
सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के वजीफे में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत सीनियर रेजिडेंट और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों के मासिक वजीफे में 50 प्रतिशत से 170 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, जो उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को देखते हुए की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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