4 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईरान की अमेरिका को 7 शर्तें: मोहसिन रेजाई बोले — शर्तें मानो, वरना बातचीत नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईरान की अमेरिका को 7 शर्तें: मोहसिन रेजाई बोले — शर्तें मानो, वरना बातचीत नहीं

सारांश

ईरान के सुरक्षा सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को साफ शब्दों में कह दिया — पहले 7 शर्तें मानो, तब बात होगी। युद्धविराम, फ्रीज़ संपत्तियाँ और समुद्री नाकेबंदी हटाना उन माँगों में शामिल हैं। शर्तें कतर और पाकिस्तान के ज़रिए वॉशिंगटन भेजी जा चुकी हैं — अब ट्रंप के जवाब का इंतजार है।

मुख्य बातें

मोहसिन रेजाई ने 20 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखीं।
शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्धविराम , फ्रीज़ ईरानी संपत्तियाँ जारी करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना शामिल हैं।
ईरान ने ये शर्तें कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के ज़रिए वॉशिंगटन तक पहुँचाई हैं।
रेजाई ने ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए कहा — 'हम निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हैं।' रेजाई ने युद्ध के लिए इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहराया।

ईरान के सुरक्षा परिषद सचिव मोहसिन रेजाई ने 20 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका को ईरान के साथ किसी भी स्तर की वार्ता फिर से शुरू करने से पहले सात शर्तें अनिवार्य रूप से स्वीकार करनी होंगी। रेजाई ने कहा कि तेहरान ने ये शर्तें कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के ज़रिए वॉशिंगटन तक पहुँचा दी हैं और अब राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार है।

एक्स पर पोस्ट कर रेजाई ने दिया सख्त संदेश

रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं। तेहरान का संदेश साफ है कि अगर वॉशिंगटन अपने ही पैदा किए हुए मुश्किल हालात से बाहर निकलना चाहता है और इस मामले में और ज़्यादा फँसने से बचना चाहता है, तो उसके पास ईरान के अधिकारों और उसकी शर्तों को मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर है और दोनों देशों के बीच सीधी वार्ता पूरी तरह ठप पड़ी है।

रेजाई की तीन प्रमुख माँगें

मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, रेजाई ने शनिवार को विदेशी मीडिया को दिए साक्षात्कार में शर्तों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि ईरान की माँगों में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, फ्रीज़ की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना शामिल हैं।

रेजाई ने अल जजीरा के हवाले से कहा कि ईरान को अमेरिकी सेना की कमज़ोरियों की पूरी जानकारी है और देश अब उसके हवाई हमलों का सामना करने के लिए 'पहले से कहीं बेहतर तरीके से तैयार' है। उन्होंने जोड़ा कि वॉशिंगटन के समझौते से पीछे हटने के बाद तेहरान ने अपनी रणनीति में आमूल बदलाव किए हैं।

नेतन्याहू पर ठीकरा, ट्रंप की धमकियों को नकारा

रेजाई ने दावा किया कि 'ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का आकलन और उनकी गणना गलत थी और यह युद्ध नेतन्याहू ने शुरू करवाया।' उन्होंने कहा, 'ट्रंप की धमकियों का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हैं।'

गौरतलब है कि यह ईरान की ओर से पिछले कई महीनों में दिया गया सबसे सीधा और कठोर बयान है, जो दर्शाता है कि तेहरान किसी भी तरह की बिना शर्त वार्ता को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

मध्यस्थता की भूमिका में कतर और पाकिस्तान

रेजाई के अनुसार, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थ सक्रिय रूप से दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि कतर के मध्यस्थ ने ईरान की शर्तें 'एक बार फिर' वॉशिंगटन को भेजी हैं। यह संकेत है कि यह कोई पहली कोशिश नहीं थी — पिछले प्रयास भी हो चुके हैं जो बेनतीजा रहे।

विश्लेषकों के अनुसार, कतर की मध्यस्थ भूमिका पश्चिम एशिया में उसकी परंपरागत कूटनीतिक स्थिति के अनुरूप है, जबकि पाकिस्तान की संलिप्तता क्षेत्रीय समीकरणों में नई परत जोड़ती है।

आगे क्या होगा

सभी की निगाहें अब राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि वॉशिंगटन ईरान की शर्तों को अस्वीकार करता है, तो कूटनीतिक गतिरोध और गहरा हो सकता है। यदि कोई आंशिक सहमति बनती है, तो नई वार्ता की संभावना खुल सकती है। फिलहाल तेहरान का संदेश स्पष्ट है — बिना शर्त वार्ता की कोई गुंजाइश नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भावनात्मक प्रतिक्रिया के साथ नहीं। असली सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन के पास घरेलू दबाव और मध्यपूर्व में बिगड़ती स्थिति के बीच इन शर्तों को गंभीरता से लेने की राजनीतिक इच्छाशक्ति है — या यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहसिन रेजाई ने अमेरिका के सामने कौन-सी शर्तें रखी हैं?
रेजाई ने सात शर्तें रखी हैं, जिनमें सभी मोर्चों पर युद्धविराम, ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्तियाँ जारी करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना प्रमुख हैं। इन शर्तों को कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के ज़रिए वॉशिंगटन तक पहुँचाया जा चुका है।
ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता क्यों रुकी हुई है?
रेजाई के अनुसार, वॉशिंगटन के पिछले समझौते से पीछे हटने के बाद तेहरान ने अपनी रणनीति बदली और बिना शर्त किसी भी वार्ता से इनकार कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने खुद ऐसे हालात पैदा किए हैं जिनसे निकलने का एकमात्र रास्ता ईरान की शर्तें मानना है।
कतर और पाकिस्तान की इसमें क्या भूमिका है?
रेजाई ने बताया कि कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच संपर्क बनाए हुए हैं। कतर के मध्यस्थ ने ईरान की शर्तें एक बार फिर वॉशिंगटन को भेजी हैं और अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार है।
रेजाई ने इस युद्ध के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
रेजाई ने इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को इस युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का ईरान को लेकर आकलन और गणना गलत थी। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप की धमकियों का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।
आगे ईरान-अमेरिका संबंधों में क्या होने की संभावना है?
अब सब कुछ राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। यदि अमेरिका शर्तें अस्वीकार करता है तो गतिरोध और गहरा होगा; यदि आंशिक सहमति बनती है तो नई वार्ता की संभावना खुल सकती है। फिलहाल तेहरान की स्थिति अटल दिखती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले