गुलशन ग्रोवर जन्मदिन: घर-घर सामान बेचने वाले 'बैड मैन' ने 400+ फिल्मों में रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा के मशहूर खलनायक गुलशन ग्रोवर, जिन्हें दर्शक 'बैड मैन' के नाम से जानते हैं, 21 सितंबर 2026 को अपना 71वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। दिल्ली में 1955 में जन्मे गुलशन ग्रोवर ने अपनी दमदार आवाज़ और अनूठी अदायगी से हिंदी सिनेमा के खलनायक किरदारों को एक नया आयाम दिया। आज वे भले ही बड़े सितारों की फेहरिस्त में शुमार हों, लेकिन उनका सफर संघर्षों और कठिनाइयों से भरा रहा है।
बचपन का संघर्ष
गुलशन ग्रोवर का बचपन आर्थिक तंगी की छाया में बीता। परिवार की माली हालत इतनी कमज़ोर थी कि उन्हें घर-घर जाकर सामान बेचकर अपनी स्कूल की फीस जुटानी पड़ती थी। कई बार ऐसे भी दिन आए जब उन्हें खाली पेट सोना पड़ा। गौरतलब है कि यही कठिनाइयाँ आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की नींव बनीं।
बचपन से ही अभिनय का शौक रखने वाले गुलशन ग्रोवर ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली से पूरी की। सपनों को पंख देने के लिए वे मुंबई पहुँचे, जहाँ उन्होंने एक अभिनय विद्यालय में दाखिला लिया और अभिनय की बारीकियाँ सीखीं। यहीं उनकी मुलाकात और दोस्ती अभिनेता अनिल कपूर से हुई — एक रिश्ता जो आज भी कायम है।
फिल्मी सफर की शुरुआत
गुलशन ग्रोवर ने अपने करियर की नींव थिएटर और स्टेज शो से रखी। वर्ष 1980 में फिल्म 'हम पाँच' के ज़रिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
90 के दशक में उनकी खलनायकी ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ी कि वे कई बड़े सितारों के समकक्ष चर्चा में आने लगे। यह वह दौर था जब परदे पर खलनायक का किरदार महज 'विलेन' नहीं, बल्कि एक सशक्त कलात्मक अभिव्यक्ति बन गया था।
400 से अधिक फिल्मों का सफर
अपने करियर में गुलशन ग्रोवर ने 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'दूध का कर्ज़', 'राम लखन', 'सौदागर', 'कुर्बान', 'मोहरा', 'हेराफेरी', 'इंटरनेशनल खिलाड़ी', 'लज्जा', 'एजेंट विनोद' और 'जम्बो' जैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं।
उन्होंने फिल्म 'आई एम कलाम' में अपने अभिनय से आलोचकों को भी चौंका दिया, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार — 'सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता' — से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण था कि 'बैड मैन' के भीतर एक बहुआयामी कलाकार भी बसता है।
निजी जीवन और अकेलापन
परदे पर खलनायक की भूमिका निभाने वाले गुलशन ग्रोवर का निजी जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने दो विवाह किए, लेकिन दोनों ही रिश्ते टिक नहीं सके।
उन्होंने वर्ष 1998 में फिलोमिना से पहला विवाह किया, जो वर्ष 2001 में महज तीन वर्षों में तलाक पर समाप्त हो गया। इसके बाद वर्ष 2003 में उन्होंने कशिश से दूसरा विवाह किया, परंतु यह रिश्ता भी केवल एक वर्ष ही चल सका। आज वे अकेले हैं — एक ऐसा सच जो उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व के विपरीत एक निजी खालीपन को दर्शाता है।
विरासत और आगे का रास्ता
गुलशन ग्रोवर आज भी सक्रिय हैं और हिंदी सिनेमा के उन विरल कलाकारों में से हैं जिन्होंने खलनायकी को एक कला के रूप में स्थापित किया। उनकी यात्रा इस बात की मिसाल है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रतिभा और लगन से कोई भी अपना मुकाम बना सकता है। 71वें जन्मदिन पर उनके प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि वे आने वाले वर्षों में भी अपने अभिनय से परदे को रोशन करते रहेंगे।