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गुलशन ग्रोवर जन्मदिन: घर-घर सामान बेचने वाले 'बैड मैन' ने 400+ फिल्मों में रचा इतिहास

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गुलशन ग्रोवर जन्मदिन: घर-घर सामान बेचने वाले 'बैड मैन' ने 400+ फिल्मों में रचा इतिहास

सारांश

घर-घर सामान बेचकर स्कूल की फीस जुटाने वाले गुलशन ग्रोवर आज हिंदी सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले 'बैड मैन' हैं। 400 से अधिक फिल्में, एक राष्ट्रीय पुरस्कार और दो टूटी शादियाँ — यही है उस कलाकार की असली कहानी जिसने खलनायकी को कला बना दिया।

मुख्य बातें

गुलशन ग्रोवर का जन्म 1955 में दिल्ली में हुआ; वे 21 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाते हैं।
बचपन में आर्थिक तंगी के कारण उन्हें घर-घर सामान बेचकर स्कूल फीस जुटानी पड़ती थी।
उन्होंने वर्ष 1980 में फिल्म 'हम पाँच' से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया।
अभिनय विद्यालय में पढ़ाई के दौरान अभिनेता अनिल कपूर से दोस्ती हुई।
400 से अधिक फिल्मों में काम; फिल्म 'आई एम कलाम' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता) मिला।
दो विवाह — फिलोमिना (1998–2001) और कशिश (2003–2004) — दोनों तलाक पर समाप्त; आज अकेले हैं।

हिंदी सिनेमा के मशहूर खलनायक गुलशन ग्रोवर, जिन्हें दर्शक 'बैड मैन' के नाम से जानते हैं, 21 सितंबर 2026 को अपना 71वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। दिल्ली में 1955 में जन्मे गुलशन ग्रोवर ने अपनी दमदार आवाज़ और अनूठी अदायगी से हिंदी सिनेमा के खलनायक किरदारों को एक नया आयाम दिया। आज वे भले ही बड़े सितारों की फेहरिस्त में शुमार हों, लेकिन उनका सफर संघर्षों और कठिनाइयों से भरा रहा है।

बचपन का संघर्ष

गुलशन ग्रोवर का बचपन आर्थिक तंगी की छाया में बीता। परिवार की माली हालत इतनी कमज़ोर थी कि उन्हें घर-घर जाकर सामान बेचकर अपनी स्कूल की फीस जुटानी पड़ती थी। कई बार ऐसे भी दिन आए जब उन्हें खाली पेट सोना पड़ा। गौरतलब है कि यही कठिनाइयाँ आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की नींव बनीं।

बचपन से ही अभिनय का शौक रखने वाले गुलशन ग्रोवर ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली से पूरी की। सपनों को पंख देने के लिए वे मुंबई पहुँचे, जहाँ उन्होंने एक अभिनय विद्यालय में दाखिला लिया और अभिनय की बारीकियाँ सीखीं। यहीं उनकी मुलाकात और दोस्ती अभिनेता अनिल कपूर से हुई — एक रिश्ता जो आज भी कायम है।

फिल्मी सफर की शुरुआत

गुलशन ग्रोवर ने अपने करियर की नींव थिएटर और स्टेज शो से रखी। वर्ष 1980 में फिल्म 'हम पाँच' के ज़रिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

90 के दशक में उनकी खलनायकी ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ी कि वे कई बड़े सितारों के समकक्ष चर्चा में आने लगे। यह वह दौर था जब परदे पर खलनायक का किरदार महज 'विलेन' नहीं, बल्कि एक सशक्त कलात्मक अभिव्यक्ति बन गया था।

400 से अधिक फिल्मों का सफर

अपने करियर में गुलशन ग्रोवर ने 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'दूध का कर्ज़', 'राम लखन', 'सौदागर', 'कुर्बान', 'मोहरा', 'हेराफेरी', 'इंटरनेशनल खिलाड़ी', 'लज्जा', 'एजेंट विनोद' और 'जम्बो' जैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं।

उन्होंने फिल्म 'आई एम कलाम' में अपने अभिनय से आलोचकों को भी चौंका दिया, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार — 'सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता' — से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण था कि 'बैड मैन' के भीतर एक बहुआयामी कलाकार भी बसता है।

निजी जीवन और अकेलापन

परदे पर खलनायक की भूमिका निभाने वाले गुलशन ग्रोवर का निजी जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने दो विवाह किए, लेकिन दोनों ही रिश्ते टिक नहीं सके।

उन्होंने वर्ष 1998 में फिलोमिना से पहला विवाह किया, जो वर्ष 2001 में महज तीन वर्षों में तलाक पर समाप्त हो गया। इसके बाद वर्ष 2003 में उन्होंने कशिश से दूसरा विवाह किया, परंतु यह रिश्ता भी केवल एक वर्ष ही चल सका। आज वे अकेले हैं — एक ऐसा सच जो उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व के विपरीत एक निजी खालीपन को दर्शाता है।

विरासत और आगे का रास्ता

गुलशन ग्रोवर आज भी सक्रिय हैं और हिंदी सिनेमा के उन विरल कलाकारों में से हैं जिन्होंने खलनायकी को एक कला के रूप में स्थापित किया। उनकी यात्रा इस बात की मिसाल है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रतिभा और लगन से कोई भी अपना मुकाम बना सकता है। 71वें जन्मदिन पर उनके प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि वे आने वाले वर्षों में भी अपने अभिनय से परदे को रोशन करते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस पीढ़ी के संघर्ष की दास्तान है जिसने बिना 'फिल्मी परिवार' के पृष्ठभूमि के बॉलीवुड में जगह बनाई। 'आई एम कलाम' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार यह साबित करता है कि उनकी प्रतिभा खलनायकी से कहीं आगे थी — फिर भी मुख्यधारा की चर्चा में वे अक्सर 'विलेन' की छवि तक सीमित रहे। यह हिंदी सिनेमा की उस प्रवृत्ति को उजागर करता है जहाँ सहायक और चरित्र अभिनेताओं को उनकी वास्तविक कलात्मक क्षमता के अनुरूप मान्यता नहीं मिलती।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुलशन ग्रोवर को 'बैड मैन' क्यों कहा जाता है?
गुलशन ग्रोवर को हिंदी सिनेमा में लगातार खतरनाक और दमदार खलनायक की भूमिकाएँ निभाने के कारण 'बैड मैन' का खिताब मिला। उनकी आवाज़ और अदायगी ने इस छवि को इतना पक्का कर दिया कि दर्शक उन्हें इसी नाम से पहचानने लगे।
गुलशन ग्रोवर का जन्म कब और कहाँ हुआ?
गुलशन ग्रोवर का जन्म वर्ष 1955 में दिल्ली में हुआ था। वे प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाते हैं।
गुलशन ग्रोवर को राष्ट्रीय पुरस्कार किस फिल्म के लिए मिला?
गुलशन ग्रोवर को फिल्म 'आई एम कलाम' में उनके अभिनय के लिए 'सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता' का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार उनकी बहुआयामी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण है।
गुलशन ग्रोवर ने कितनी शादियाँ कीं और क्यों टूटीं?
गुलशन ग्रोवर ने दो विवाह किए। पहला विवाह 1998 में फिलोमिना से हुआ, जो 2001 में तलाक पर समाप्त हुआ। दूसरा विवाह 2003 में कशिश से हुआ, जो लगभग एक वर्ष बाद टूट गया। दोनों रिश्ते टिक नहीं सके और वे आज अकेले जीवन जी रहे हैं।
गुलशन ग्रोवर ने हिंदी सिनेमा में डेब्यू कब किया?
गुलशन ग्रोवर ने वर्ष 1980 में फिल्म 'हम पाँच' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इससे पहले उन्होंने थिएटर और स्टेज शो में अभिनय किया था।
राष्ट्र प्रेस
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