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गुलजार के जन्मदिन पर जैकी श्रॉफ का प्यार भरा संदेश: 'आप हमारे दिलों में सदैव रहेंगे'

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गुलजार के जन्मदिन पर जैकी श्रॉफ का प्यार भरा संदेश: 'आप हमारे दिलों में सदैव रहेंगे'

सारांश

जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम पर गुलजार को जन्मदिन की बधाई दी — 'आप हमारे दिलों में सदैव रहेंगे।' 1934 में पंजाब के दीना में जन्मे गुलजार ने कार मैकेनिक से गीतकार तक का सफर तय किया और पाँच दशकों में बंदिनी से किल दिल तक हिंदी सिनेमा को अपनी कलम से संवारा।

मुख्य बातें

गुलजार ने 18 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाया; अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर भावभीनी बधाई दी।
गुलजार का असली नाम संपूरण सिंह कालरा है; जन्म 1934 में तत्कालीन पंजाब के दीना (अब पाकिस्तान) में हुआ।
करियर की शुरुआत 1963 में फिल्म बंदिनी के गीत 'मोरा गोरा अंग लेले' से, म्यूजिक डायरेक्टर एस.
फिल्मकार बिमल रॉय के सहायक रहे; मुंबई आने के बाद शुरुआत में कार मैकेनिक का काम किया।
1963 से 2014 तक पाँच दशकों में बंदिनी , स्लमडॉग मिलियनेयर , ओमकारा सहित दर्जनों फिल्मों में योगदान दिया।

मशहूर शायर, गीतकार और फिल्मकार गुलजार ने मंगलवार, 18 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाया। इस खास मौके पर बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें भावपूर्ण बधाई देते हुए कहा कि गुलजार साहब ने करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी एक अलग और अमिट जगह बनाई है। मुंबई के फिल्म जगत से यह बधाई उस शख्सियत के लिए आई, जिसने हिंदी सिनेमा और साहित्य को दशकों तक अपनी कलम से समृद्ध किया।

जैकी श्रॉफ का भावभीना संदेश

अभिनेता जैकी श्रॉफ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर गुलजार की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'गुलजार साहब आपको जन्मदिन की अनंत बधाई। आप हमारे दिलों में सदैव रहेंगे।' यह संदेश सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के बीच तेज़ी से फैला और गुलजार के चाहने वालों ने इसे खूब सराहा।

गुलजार: एक परिचय

गुलजार का असली नाम संपूरण सिंह कालरा है। उनका जन्म 1934 में तत्कालीन भारत के पंजाब के दीना इलाके में हुआ था, जो विभाजन के बाद अब पाकिस्तान का हिस्सा है। बचपन से ही लिखने का शौक रखने वाले गुलजार को अक्सर इस आदत के कारण पिता की डांट भी सुननी पड़ती थी।

लेखक बनने से पहले उन्होंने मुंबई में कार मैकेनिक के रूप में काम किया। विभाजन के बाद वे दिल्ली आए और फिर मुंबई पहुँचकर दिग्गज फिल्मकार बिमल रॉय के सहायक के रूप में काम किया। इसी दौरान उन्होंने अपना कलमी नाम पहले गुलजार दीनवी रखा और बाद में केवल गुलजार कर लिया।

करियर की शुरुआत और सिनेमाई सफर

गुलजार ने अपने गीतकार करियर की शुरुआत म्यूजिक डायरेक्टर एस. डी. बर्मन के साथ 1963 की फिल्म बंदिनी से की। उनका पहला गाना 'मोरा गोरा अंग लेले' था, जो आज भी हिंदी सिनेमा के अमर गीतों में गिना जाता है।

इसके बाद उन्होंने आनंद, मेरे अपने, मौसम, माचिस, दिल से…, ओमकारा, कमीने, गुरु, स्लमडॉग मिलियनेयर, रावण और बंटी और बबली जैसी फिल्मों के लिए यादगार गीत लिखे। साथ ही आशीर्वाद, आनंद और खामोशी जैसी फिल्मों के डायलॉग और स्क्रीनप्ले भी उनकी कलम से निकले।

साहित्य और सिनेमा में अमिट छाप

गुलजार की रचनाशीलता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उनकी कविताएँ पाठकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाती हैं — जहाँ सादगी और गहराई साथ-साथ चलती हैं। गौरतलब है कि 1963 की फिल्म बंदिनी से लेकर 2014 की फिल्म किल दिल तक, उन्होंने पाँच दशकों से भी अधिक समय तक हिंदी सिनेमा में सक्रिय योगदान दिया — यह अपने आप में एक दुर्लभ उपलब्धि है।

यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक लगता है जब हिंदी साहित्य और सिनेमा के बीच की खाई को पाटने वाले रचनाकार विरले ही मिलते हैं। गुलजार उन चुनिंदा हस्तियों में हैं जिन्होंने दोनों दुनियाओं में समान सम्मान अर्जित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब 'मोरा गोरा अंग लेले' जैसी रचनाएँ एक अलग युग की याद दिलाती हैं। कार मैकेनिक से ऑस्कर-विजेता गीतकार तक का सफर केवल प्रतिभा की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर के हिंदी सिनेमा की समावेशिता का प्रमाण भी है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुलजार का असली नाम और जन्मस्थान क्या है?
गुलजार का असली नाम संपूरण सिंह कालरा है। उनका जन्म 1934 में तत्कालीन भारतीय पंजाब के दीना इलाके में हुआ था, जो विभाजन के बाद अब पाकिस्तान का हिस्सा है।
जैकी श्रॉफ ने गुलजार को जन्मदिन की बधाई कैसे दी?
जैकी श्रॉफ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर गुलजार की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा — 'गुलजार साहब आपको जन्मदिन की अनंत बधाई। आप हमारे दिलों में सदैव रहेंगे।' यह संदेश प्रशंसकों के बीच खूब सराहा गया।
गुलजार का पहला फिल्मी गाना कौन सा था?
गुलजार का पहला फिल्मी गाना 'मोरा गोरा अंग लेले' था, जो 1963 की फिल्म बंदिनी के लिए म्यूजिक डायरेक्टर एस. डी. बर्मन के साथ लिखा गया था।
गुलजार ने फिल्मों में गीत लेखन के अलावा और क्या काम किया?
गुलजार ने गीत लेखन के साथ-साथ आशीर्वाद, आनंद और खामोशी जैसी फिल्मों के डायलॉग और स्क्रीनप्ले भी लिखे। उन्होंने फिल्म निर्देशन भी किया और बिमल रॉय के सहायक के रूप में अपने करियर की नींव रखी।
गुलजार ने किन प्रमुख फिल्मों के लिए गाने लिखे हैं?
गुलजार ने आनंद, माचिस, दिल से…, ओमकारा, कमीने, गुरु, स्लमडॉग मिलियनेयर, रावण और बंटी और बबली सहित दर्जनों फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं। उनका सफर 1963 की बंदिनी से 2014 की किल दिल तक फैला है।
राष्ट्र प्रेस
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