आयुर्वेद दिवस 2026: आयुष मंत्रालय की सलाह — परफेक्ट थाली के लिए अनाज, दाल और मसालों में रखें विविधता
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को मनाए जाने वाले आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भारतीयों को रोज़ के भोजन में खाद्य विविधता अपनाने की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार, अच्छी सेहत के लिए पेट भरना पर्याप्त नहीं है — थाली में पोषण और विविधता दोनों ज़रूरी हैं। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' रखी गई है।
आयुर्वेद और संतुलित आहार का संबंध
आयुर्वेद में संतुलित और पौष्टिक आहार को स्वस्थ जीवन की नींव माना गया है। इस परंपरागत चिकित्सा पद्धति में मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भोजन करने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। आयुष मंत्रालय ने इसी सोच को व्यावहारिक रूप देते हुए यह दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि रोज़ाना के भोजन में अलग-अलग खाद्य समूहों को शामिल किया जाए और मौसम व क्षेत्र के अनुसार उपलब्ध खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाए।
अनाजों में विविधता क्यों जरूरी
मंत्रालय की सलाह के अनुसार, प्रतिदिन एक ही अनाज खाने के बजाय विभिन्न अनाजों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। गेहूं और चावल के अतिरिक्त ज्वार, बाजरा, जौ, रागी, मक्का और कोदो जैसे पोषणयुक्त अनाज भी आहार में सम्मिलित किए जा सकते हैं। ये मोटे अनाज न केवल फाइबर से भरपूर होते हैं, बल्कि इन्हें उगाना भी पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल है — यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब सरकार 'श्री अन्न' मिशन के तहत मिलेट्स को बढ़ावा दे रही है।
दालें और फलियां — प्रोटीन का भारतीय स्रोत
दालें और फलियाँ भारतीय भोजन का अभिन्न अंग हैं। मंत्रालय ने आहार में विभिन्न प्रकार की दालों और फलियों को शामिल करने पर ज़ोर दिया है। मूंग, काला चना, मोठ, मसूर, अरहर, राजमा और चना जैसे विकल्प दाल, सब्ज़ी, सलाद या पारंपरिक व्यंजनों के रूप में थाली में जगह पा सकते हैं। ये वनस्पति प्रोटीन के सस्ते और सुलभ स्रोत हैं, जो विशेष रूप से शाकाहारी आबादी के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
मौसमी फल-सब्जियाँ और आयुर्वेदिक मसाले
आयुर्वेद की परंपरा के अनुरूप, मंत्रालय ने ताज़े, मौसमी और स्थानीय रूप से उपलब्ध फल-सब्ज़ियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। पालक, मेथी, गाजर, कद्दू, केला, सेब और अनार जैसे विकल्प इस श्रेणी में आते हैं। इसके साथ ही जीरा, दालचीनी, सोंठ, लहसुन, इलायची, अजवाइन, हल्दी और काली मिर्च जैसे मसालों को उचित मात्रा में रोज़ के भोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है। गौरतलब है कि भारतीय रसोई में मसालों की भूमिका केवल स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं रही — इनमें से अनेक के औषधीय गुणों को आयुर्वेद सदियों से मान्यता देता आया है।
आगे की राह
23 सितंबर 2026 को आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय द्वारा देशभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य विविधता को दैनिक जीवन में अपनाने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और जीवनशैली संबंधी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है।