20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आयुर्वेद दिवस 2026: आयुष मंत्रालय की सलाह — परफेक्ट थाली के लिए अनाज, दाल और मसालों में रखें विविधता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आयुर्वेद दिवस 2026: आयुष मंत्रालय की सलाह — परफेक्ट थाली के लिए अनाज, दाल और मसालों में रखें विविधता

सारांश

आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' है और इस बार आयुष मंत्रालय ने परफेक्ट थाली का फॉर्मूला दिया है — एक ही अनाज छोड़ें, ज्वार-बाजरा-रागी अपनाएं, दालों में विविधता रखें और मौसमी मसाले इस्तेमाल करें। यह सलाह सरकार के 'श्री अन्न' मिशन से भी जुड़ती है।

मुख्य बातें

आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' है, जो 23 सितंबर को मनाया जाएगा।
आयुष मंत्रालय ने रोज़ाना की थाली में ज्वार, बाजरा, जौ, रागी, मक्का और कोदो जैसे अनाजों को शामिल करने की सलाह दी।
मूंग, काला चना, मोठ, मसूर, अरहर, राजमा और चना — अलग-अलग दालों-फलियों को आहार में विविधता के लिए अपनाएं।
मौसमी और स्थानीय फल-सब्जियाँ जैसे पालक, मेथी, गाजर, अनार को प्राथमिकता देने की सिफारिश।
हल्दी, जीरा, दालचीनी, सोंठ, अजवाइन जैसे पारंपरिक मसाले उचित मात्रा में रोज़ इस्तेमाल करें।

आयुष मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को मनाए जाने वाले आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भारतीयों को रोज़ के भोजन में खाद्य विविधता अपनाने की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार, अच्छी सेहत के लिए पेट भरना पर्याप्त नहीं है — थाली में पोषण और विविधता दोनों ज़रूरी हैं। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' रखी गई है।

आयुर्वेद और संतुलित आहार का संबंध

आयुर्वेद में संतुलित और पौष्टिक आहार को स्वस्थ जीवन की नींव माना गया है। इस परंपरागत चिकित्सा पद्धति में मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भोजन करने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। आयुष मंत्रालय ने इसी सोच को व्यावहारिक रूप देते हुए यह दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि रोज़ाना के भोजन में अलग-अलग खाद्य समूहों को शामिल किया जाए और मौसम व क्षेत्र के अनुसार उपलब्ध खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाए।

अनाजों में विविधता क्यों जरूरी

मंत्रालय की सलाह के अनुसार, प्रतिदिन एक ही अनाज खाने के बजाय विभिन्न अनाजों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। गेहूं और चावल के अतिरिक्त ज्वार, बाजरा, जौ, रागी, मक्का और कोदो जैसे पोषणयुक्त अनाज भी आहार में सम्मिलित किए जा सकते हैं। ये मोटे अनाज न केवल फाइबर से भरपूर होते हैं, बल्कि इन्हें उगाना भी पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल है — यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब सरकार 'श्री अन्न' मिशन के तहत मिलेट्स को बढ़ावा दे रही है।

दालें और फलियां — प्रोटीन का भारतीय स्रोत

दालें और फलियाँ भारतीय भोजन का अभिन्न अंग हैं। मंत्रालय ने आहार में विभिन्न प्रकार की दालों और फलियों को शामिल करने पर ज़ोर दिया है। मूंग, काला चना, मोठ, मसूर, अरहर, राजमा और चना जैसे विकल्प दाल, सब्ज़ी, सलाद या पारंपरिक व्यंजनों के रूप में थाली में जगह पा सकते हैं। ये वनस्पति प्रोटीन के सस्ते और सुलभ स्रोत हैं, जो विशेष रूप से शाकाहारी आबादी के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

मौसमी फल-सब्जियाँ और आयुर्वेदिक मसाले

आयुर्वेद की परंपरा के अनुरूप, मंत्रालय ने ताज़े, मौसमी और स्थानीय रूप से उपलब्ध फल-सब्ज़ियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। पालक, मेथी, गाजर, कद्दू, केला, सेब और अनार जैसे विकल्प इस श्रेणी में आते हैं। इसके साथ ही जीरा, दालचीनी, सोंठ, लहसुन, इलायची, अजवाइन, हल्दी और काली मिर्च जैसे मसालों को उचित मात्रा में रोज़ के भोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है। गौरतलब है कि भारतीय रसोई में मसालों की भूमिका केवल स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं रही — इनमें से अनेक के औषधीय गुणों को आयुर्वेद सदियों से मान्यता देता आया है।

आगे की राह

23 सितंबर 2026 को आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय द्वारा देशभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य विविधता को दैनिक जीवन में अपनाने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और जीवनशैली संबंधी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर उन तबकों तक जहाँ आर्थिक मजबूरी के कारण लोग सस्ते और एकरस भोजन पर निर्भर हैं। मिलेट्स का उत्साह नीतिगत स्तर पर तो है, लेकिन बाज़ार में इनकी उपलब्धता और सामर्थ्य अभी भी असमान है। बिना सुलभ आपूर्ति और किफायती मूल्य सुनिश्चित किए, 'परफेक्ट थाली' की सलाह शहरी मध्यमवर्ग तक ही सिमट कर रह जाने का खतरा है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद दिवस 2026 कब है और इस साल की थीम क्या है?
आयुर्वेद दिवस 2026, 23 सितंबर को मनाया जाएगा और इस वर्ष की थीम 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' रखी गई है। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय खान-पान में विविधता को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है।
आयुष मंत्रालय ने परफेक्ट थाली के लिए क्या सलाह दी है?
आयुष मंत्रालय ने रोज़ाना की थाली में गेहूं-चावल के अलावा ज्वार, बाजरा, रागी जैसे मोटे अनाज, अलग-अलग दालें-फलियाँ, मौसमी सब्जियाँ-फल और हल्दी-जीरा जैसे पारंपरिक मसाले शामिल करने की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार, मौसम और क्षेत्र के अनुसार उपलब्ध खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आहार में खाद्य विविधता क्यों जरूरी है?
आयुर्वेद के अनुसार, विभिन्न खाद्य समूहों से शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं जो एकल आहार से संभव नहीं होता। खाद्य विविधता से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ और जीवनशैली संबंधी बीमारियों का जोखिम कम होता है।
आयुर्वेद में कौन-से मसाले स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने गए हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, जीरा, दालचीनी, सोंठ, लहसुन, इलायची, अजवाइन, हल्दी और काली मिर्च जैसे मसाले उचित मात्रा में रोज़ के भोजन में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा में इन मसालों को स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी मान्यता दी गई है।
थाली में कौन-सी दालें और फलियाँ शामिल करनी चाहिए?
मंत्रालय ने मूंग, काला चना, मोठ, मसूर, अरहर, राजमा और चना जैसी विविध दालें-फलियाँ आहार में शामिल करने पर ज़ोर दिया है। इन्हें दाल, सब्ज़ी, सलाद या पारंपरिक व्यंजनों के रूप में भोजन में शामिल किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले