संतुलित थाली: स्वस्थ जीवन की असली नींव — महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया सही अनुपात

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संतुलित थाली: स्वस्थ जीवन की असली नींव — महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया सही अनुपात

सारांश

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने थाली को तीन हिस्सों में बाँटने की सलाह दी है — आधी थाली मौसमी फल-सब्जियों से, एक-चौथाई अनाज से और एक-चौथाई प्रोटीन से। यह सरल फ़ॉर्मूला न केवल पोषण की ज़रूरतें पूरी करता है, बल्कि मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों से भी बचाव करता है।

मुख्य बातें

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 5 मई 2026 को X पर संतुलित थाली का सही अनुपात साझा किया।
थाली का 50% हिस्सा मौसमी फल और सब्जियों से भरा होना चाहिए।
25% हिस्सा अनाज या मोटे अनाज जैसे रागी , बाजरा , ज्वार को दिया जाए।
शेष 25% हिस्सा दालें, चना, राजमा या अंडा-मछली जैसे प्रोटीन स्रोतों से भरें।
रोज़ाना आहार में विविधता बनाए रखना कुपोषण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
दूध, दही, बादाम, अखरोट जैसे कैल्शियम और अच्छे फैट्स के स्रोत भी थाली में शामिल करें।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 5 मई 2026 को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक महत्वपूर्ण पोषण संदेश साझा किया, जिसमें बताया गया कि एक संतुलित थाली कैसी होनी चाहिए और उसमें किन खाद्य पदार्थों को कितनी मात्रा में शामिल करना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, हमारी रोज़ की थाली को तीन हिस्सों में विभाजित करना सेहत की बुनियाद है।

थाली का सही विभाजन कैसे करें

मंत्रालय की सलाह के अनुसार, थाली का आधा हिस्सा (50%) मौसमी फलों और सब्जियों से भरा होना चाहिए। हरी सब्जियाँ, गाजर, टमाटर, लौकी, पालक और मौसमी फल जैसे सेब, केला, पपीता आदि को रोज़ाना आहार में शामिल करने की सिफ़ारिश की गई है। ये खाद्य पदार्थ शरीर को आवश्यक विटामिन, मिनरल और फाइबर प्रदान करते हैं, जिससे पाचन तंत्र सुचारु रहता है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत होती है।

अनाज और मोटे अनाज की भूमिका

थाली का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा अनाज या मोटे अनाज को दिया जाना चाहिए। इसमें गेहूं की रोटी, चावल, रागी, बाजरा और ज्वार जैसी चीज़ें शामिल हो सकती हैं। ये खाद्यान्न शरीर को दिनभर ऊर्जावान बनाए रखते हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में मोटे अनाज को पुनः अपनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है, क्योंकि ये परंपरागत अनाजों की तुलना में अधिक पौष्टिक माने जाते हैं।

प्रोटीन और अच्छे फैट्स की ज़रूरत

थाली का शेष 25 प्रतिशत प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थों से भरा होना चाहिए। दालें, चना, राजमा और सोयाबीन शाकाहारी प्रोटीन के उत्तम स्रोत हैं। जो लोग मांसाहारी हैं, वे अंडा, मछली, चिकन या मीट को इस हिस्से में शामिल कर सकते हैं। प्रोटीन मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है और शरीर की आंतरिक मरम्मत में सहायक होता है।

इसके अतिरिक्त, मूंगफली, बादाम, अखरोट, तिल, अलसी के बीज और सीमित मात्रा में तेल या घी के रूप में अच्छे फैट्स भी आहार में अनिवार्य हैं, जो मस्तिष्क और हार्मोन के समुचित कार्य के लिए ज़रूरी होते हैं। दूध या दही को भी रोज़ाना डाइट में जोड़ने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये कैल्शियम के विश्वसनीय स्रोत हैं।

विविधता क्यों ज़रूरी है

मंत्रालय ने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि हर दिन एक ही प्रकार का भोजन करने से बचना चाहिए। अलग-अलग अनाज, सब्जियाँ और दालें बदल-बदलकर खाने से शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और कुपोषण का जोखिम कम होता है। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब भारत में गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह और हृदय रोगों में वृद्धि की चिंता स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा लगातार जताई जा रही है।

आगे की राह

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार का यह जन-जागरूकता अभियान खाद्य विविधता और स्थानीय मौसमी उपज को प्राथमिकता देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। संतुलित आहार को दैनिक जीवन में शामिल करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य का सबसे सुलभ और प्रभावी तरीका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। भारत में कुपोषण और मोटापा एक साथ बढ़ रहे हैं — यह 'डबल बर्डन' उन तबकों में सबसे ज़्यादा है जहाँ विविध और ताज़ा खाद्य पदार्थों तक पहुँच ही सीमित है। थाली का यह आदर्श चित्र मध्यवर्गीय शहरी परिवारों के लिए सुलभ हो सकता है, परंतु ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के लिए मौसमी फलों और प्रोटीन की नियमित उपलब्धता एक चुनौती बनी रहती है। सरकारी पोषण अभियान तब तक अधूरे हैं जब तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली में मोटे अनाज और दालों की आपूर्ति सुनिश्चित न हो।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतुलित थाली में क्या-क्या शामिल होना चाहिए?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, थाली का 50% मौसमी फल और सब्जियाँ, 25% अनाज या मोटे अनाज और 25% प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दालें, चना, राजमा या अंडा-मछली होने चाहिए। साथ ही सीमित मात्रा में अच्छे फैट्स और दूध-दही भी शामिल करें।
मोटे अनाज को थाली में क्यों शामिल करना चाहिए?
रागी, बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाज पारंपरिक अनाजों की तुलना में अधिक पौष्टिक होते हैं और शरीर को दीर्घकालिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। वर्तमान में सरकार भी इन्हें पुनः अपनाने पर ज़ोर दे रही है।
शाकाहारी लोग प्रोटीन की ज़रूरत कैसे पूरी करें?
शाकाहारी लोग दालें, चना, राजमा और सोयाबीन से पर्याप्त प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ सुलभ और किफ़ायती हैं और मांसपेशियों की मज़बूती तथा शरीर की मरम्मत में सहायक होते हैं।
रोज़ एक ही तरह का खाना खाना क्यों नुकसानदेह है?
एक ही प्रकार के भोजन से शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे कुपोषण का जोखिम बढ़ता है। मंत्रालय ने सलाह दी है कि अलग-अलग अनाज, सब्जियाँ और दालें बदल-बदलकर खाने से शरीर को संपूर्ण पोषण मिलता है।
अच्छे फैट्स के लिए रोज़ाना क्या खाएं?
मूंगफली, बादाम, अखरोट, तिल और अलसी के बीज अच्छे फैट्स के प्रमुख स्रोत हैं। सीमित मात्रा में तेल या घी भी लिया जा सकता है, जो मस्तिष्क और हार्मोन के सुचारु कार्य के लिए आवश्यक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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