स्तनपान कराने वाली माँ की डाइट: बच्चे की इम्यूनिटी और विकास के लिए 4 जरूरी पोषक समूह
सारांश
मुख्य बातें
स्तनपान कराने वाली महिलाओं का आहार केवल उनकी अपनी सेहत तक सीमित नहीं रहता — यह सीधे शिशु के शारीरिक विकास और इम्यूनिटी को भी प्रभावित करता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा की गई जानकारी में बताया कि इस अवस्था में संतुलित और पोषण से भरपूर भोजन माँ और बच्चे दोनों के लिए अनिवार्य है। सही आहार न केवल माँ को ऊर्जावान बनाए रखता है, बल्कि बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास की नींव भी रखता है।
चार मुख्य पोषक समूह: क्या खाएँ और क्यों
मंत्रालय के अनुसार, भोजन को चार प्रमुख समूहों में बाँटा जा सकता है। पहला समूह है अनाज — जिसमें गेहूँ, चावल, बाजरा और रागी शामिल हैं। ये कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत हैं और दिनभर शरीर को ऊर्जा देते हैं।
दूसरा समूह है दालें और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ — जैसे मूंग, मसूर और चना। ये शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत में सहायक हैं और बच्चे के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
तीसरा समूह है फल और सब्जियाँ। पालक, मेथी, बथुआ जैसी हरी सब्जियाँ और केला, सेब, पपीता जैसे मौसमी फल विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये माँ की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और शरीर को मजबूत बनाते हैं।
चौथा समूह है दूध और दूध से बने उत्पाद — जैसे दही, पनीर और छाछ। ये कैल्शियम के उत्तम स्रोत हैं, जो हड्डियों को मजबूती देते हैं।
अच्छे फैट्स और अतिरिक्त पोषण
इन चार समूहों के अलावा, संतुलित मात्रा में अच्छे फैट्स का सेवन भी जरूरी बताया गया है। घी, बादाम, अखरोट, गुड़ और तिल शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देते हैं और कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं। हालाँकि, विशेषज्ञों का सुझाव है कि इनका सेवन संतुलित मात्रा में ही किया जाए, क्योंकि अत्यधिक सेवन से लाभ की जगह नुकसान हो सकता है।
सामान्य से अधिक भोजन क्यों जरूरी है
मंत्रालय के अनुसार, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सामान्य से लगभग एक चौथाई अधिक भोजन करने की सलाह दी जाती है। इसका कारण यह है कि दूध बनने की प्रक्रिया के लिए शरीर लगातार अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करता है। यदि पर्याप्त पोषण न मिले, तो माँ को थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है, जिसका असर दूध की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
पानी और आराम: उतना ही जरूरी
केवल ठोस आहार ही नहीं, बल्कि दिनभर पर्याप्त पानी पीना भी अनिवार्य है। उचित जलयोजन (हाइड्रेशन) से शरीर में दूध बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है। इसके साथ ही हल्की-फुल्की सैर और पर्याप्त आराम भी माँ के शरीर की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह ऐसे समय में और भी जरूरी हो जाता है जब शरीर प्रसव के बाद ठीक होने की प्रक्रिया में होता है।
गौरतलब है कि भारत में शिशु मृत्यु दर और कुपोषण के आँकड़ों को देखते हुए, माँ के आहार पर ध्यान देना एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता बन चुकी है। सही पोषण की शुरुआत माँ की थाली से होती है।