प्रसव के बाद माँ की शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों का ध्यान जरूरी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव

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प्रसव के बाद माँ की शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों का ध्यान जरूरी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव

सारांश

प्रसव के बाद माँ की देखभाल केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। संतुलित पोषण, पर्याप्त विश्राम, परिवार का सहयोग और सकारात्मक माहौल से माँ जल्दी स्वस्थ होती है और बेहतर माँ बन पाती है।

मुख्य बातें

प्रसव के बाद माँ को शारीरिक और मानसिक दोनों देखभाल की आवश्यकता होती है।
आयरन, प्रोटीन, दूध, दालें, हरी सब्जियाँ और पानी का सेवन माँ के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
कई माताएँ प्रसव के बाद भावनात्मक उतार-चढ़ाव और अवसाद का सामना करती हैं, जिसमें परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण है।
हल्के योगासन कमर दर्द और थकान कम करने में मदद करते हैं, पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें ।
पर्याप्त नींद, विश्राम और सकारात्मक माहौल से माँ जल्दी स्वस्थ हो जाती है।

नई दिल्ली, 8 मई। माँ बनना जीवन का एक सुखद पल होता है, पर इस दौरान माँ की शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों की समान देखभाल आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव के बाद माँ को सही पोषण, पर्याप्त विश्राम और भावनात्मक सहयोग से ही वह जल्दी स्वस्थ हो पाती है और अपने शिशु की बेहतर देखभाल कर सकती है।

प्रसव के बाद शारीरिक देखभाल क्यों जरूरी है

प्रसव के दौरान माँ के शरीर पर गहरा दबाव पड़ता है, जिससे वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवधि में माँ को विशेष देखभाल, संतुलित आहार और पर्याप्त विश्राम की आवश्यकता होती है। प्रसव के बाद की पहली कुछ हफ्तों में सही देखभाल माँ के तेजी से स्वास्थ्य लाभ में मदद करती है।

पोषण का महत्व और आहार सुझाव

प्रसव के बाद माँ को संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। आयरन युक्त भोजन शरीर में रक्त की कमी को दूर करता है, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत करता है। दूध, दालें, हरी सब्जियाँ, फल और पर्याप्त पानी का सेवन माँ के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। ये पदार्थ न केवल शरीर को अंदर से शक्तिशाली बनाते हैं, बल्कि स्तन दूध के उत्पादन को भी बढ़ाते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें

कई नई माताएँ प्रसव के बाद भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अत्यधिक थकान और अवसाद का सामना करती हैं। परिवार को इस दौरान माँ की मानसिक सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सही खानपान के साथ पर्याप्त आराम और परिवार का सहयोग माँ को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक सकारात्मक और सहायक परिवेश माँ के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हल्के व्यायाम और योगासन

प्रसव के बाद कुछ सौम्य योगासन माँ की सेहत सुधारने में सहायक होते हैं। ये आसन कमर दर्द कम करने, थकान दूर करने और शरीर को लचीला बनाने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी भी योगासन को शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। शुरुआती दिनों में अत्यधिक जोरदार व्यायाम से बचना चाहिए।

माँ की देखभाल के लिए व्यावहारिक सुझाव

पौष्टिक और संतुलित आहार लें और खूब पानी पिएंपर्याप्त नींद और आराम सुनिश्चित करें। परिवार का सहयोग लें और डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाएँ और सप्लीमेंट्स लें। प्रसव के बाद माँ को किसी भी घरेलू नुस्खे को आजमाने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए

स्वस्थ माँ, स्वस्थ शिशु

विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे की नींव होती है। प्रसव के बाद माँ की देखभाल केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। सही पोषण, पर्याप्त विश्राम और सकारात्मक माहौल से माँ जल्दी स्वस्थ हो जाती है और अपने शिशु की बेहतर देखभाल कर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य को अभी भी कम महत्व दिया जाता है। प्रसवोत्तर अवसाद और भावनात्मक संकट को कई परिवारों में 'सामान्य' माना जाता है, जबकि यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। केवल शारीरिक पोषण से माँ की सेहत पूरी नहीं होती — परिवार का सहयोग, भावनात्मक समर्थन और पेशेवर मार्गदर्शन भी उतना ही आवश्यक है। जब तक हम माँ की मानसिक सेहत को शारीरिक सेहत के समान प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक माता-पितृत्व का संकट पूरी तरह दूर नहीं हो सकता।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रसव के बाद माँ को किस तरह का आहार लेना चाहिए?
प्रसव के बाद माँ को संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। आयरन युक्त खाद्य पदार्थ रक्त की कमी को दूर करते हैं, प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत करता है। दूध, दालें, हरी सब्जियाँ, फल और पर्याप्त पानी का सेवन माँ के स्वास्थ्य और स्तन दूध के उत्पादन दोनों के लिए लाभकारी है।
प्रसव के बाद माँ को मानसिक समस्याएँ क्यों होती हैं?
प्रसव के बाद कई माताएँ हार्मोनल परिवर्तन, शारीरिक थकान और जीवन में बड़े बदलाव के कारण भावनात्मक उतार-चढ़ाव, थकान और अवसाद का सामना करती हैं। इसे प्रसवोत्तर अवसाद कहा जाता है, और इसमें परिवार का सहयोग और पेशेवर सहायता महत्वपूर्ण है।
प्रसव के बाद व्यायाम कब शुरू किया जा सकता है?
प्रसव के बाद कुछ हल्के योगासन माँ की सेहत सुधारने में मदद करते हैं, पर किसी भी व्यायाम को शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। शुरुआती दिनों में अत्यधिक जोरदार व्यायाम से बचना चाहिए।
प्रसव के बाद परिवार की भूमिका क्या है?
परिवार का सहयोग प्रसव के बाद माँ की देखभाल में अत्यंत महत्वपूर्ण है। परिवार माँ को पर्याप्त विश्राम, भावनात्मक समर्थन और सकारात्मक माहौल प्रदान करके उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।
माँ को किन घरेलू नुस्खों से बचना चाहिए?
प्रसव के बाद माँ को किसी भी घरेलू नुस्खे को आजमाने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। हर माँ का शरीर अलग होता है, और जो एक के लिए फायदेमंद है, वह दूसरे के लिए हानिकारक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस