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आयुष मंत्रालय ने बताए आयुर्वेद आहार के तीन मूल स्तंभ — आहार, परंपरा और मानक

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आयुष मंत्रालय ने बताए आयुर्वेद आहार के तीन मूल स्तंभ — आहार, परंपरा और मानक

सारांश

आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद आहार को सिर्फ खान-पान नहीं, बल्कि आहार, परंपरा और मानक के त्रिस्तंभीय ढाँचे के रूप में परिभाषित किया है। खाद्य सुरक्षा और मानक (आयुर्वेद आहार) विनियम, 2022 इसे एक नियामक आधार देता है — जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जवाबदेही से जोड़ने की कोशिश है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर आयुर्वेद आहार की अवधारणा विस्तार से समझाई।
आयुर्वेद आहार के तीन मूल स्तंभ हैं — आहार , परंपरा और मानक ।
खाद्य सुरक्षा और मानक (आयुर्वेद आहार) विनियम, 2022 के तहत इसके उत्पादन और लेबलिंग का नियामक ढाँचा तैयार है।
इस ढाँचे में श्रेणी ए की विशेष व्यवस्था भी शामिल है।
आयुर्वेद में भोजन को भूख मिटाने के साधन के बजाय समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली का आधार माना गया है।

आयुष मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए आयुर्वेद आहार की अवधारणा और उसके महत्व को विस्तार से समझाया। मंत्रालय के अनुसार, आयुर्वेद आहार केवल स्वाद तक सीमित नहीं है — यह भारतीय पारंपरिक ज्ञान, सदियों पुरानी जीवनशैली और एक सुव्यवस्थित नियामक ढाँचे का संयोजन है।

आयुर्वेद आहार क्या है

आयुष मंत्रालय के अनुसार, आयुर्वेद आहार वह भोजन-व्यवस्था है जो आयुर्वेद के सिद्धांतों और भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित है। इसे समझने के लिए केवल थाली में रखे भोजन को देखना पर्याप्त नहीं है — इसके पीछे की परंपरा और उससे जुड़े मानकों को भी जानना आवश्यक है। आयुर्वेद में भोजन को मात्र भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली का अभिन्न अंग माना गया है।

तीन मूल स्तंभ जिन पर टिका है आयुर्वेद आहार

मंत्रालय ने आयुर्वेद आहार को तीन प्रमुख तत्वों में विभाजित किया — आहार, परंपरा और मानक

पहला स्तंभ है आहार — अर्थात् हम प्रतिदिन क्या खाते और पीते हैं। रोज़मर्रा की थाली में शामिल हर चीज़ इस आहार व्यवस्था का हिस्सा है। आयुर्वेद इसे केवल शारीरिक पोषण नहीं, बल्कि मन और जीवनशैली से जोड़कर देखता है।

दूसरा स्तंभ है परंपरा। भारत में भोजन से जुड़ा ज्ञान सदियों से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित होता रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम, स्थानीय उपलब्धता और पारंपरिक जानकारी के आधार पर भोजन पकाने और खाने की विभिन्न विधियाँ प्रचलित हैं। यही पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा ज्ञान आयुर्वेद आहार की नींव बनाता है।

तीसरा स्तंभ है मानक। किसी भी खाद्य पदार्थ के उत्पादन और उससे जुड़ी जानकारी को उपभोक्ता तक सटीक और ज़िम्मेदार तरीके से पहुँचाने के लिए स्पष्ट नियम ज़रूरी हैं। मानक इसी व्यवस्था की रीढ़ हैं।

नियामक ढाँचा — FSSAI के तहत विनियमन

आयुर्वेद आहार के लिए देश में एक निर्धारित नियामक व्यवस्था पहले से मौजूद है। खाद्य सुरक्षा और मानक (आयुर्वेद आहार) विनियम, 2022 के अंतर्गत इसके उत्पादन और लेबलिंग के लिए एक व्यवस्थित ढाँचा तैयार किया गया है, जिसमें श्रेणी ए की व्यवस्था भी शामिल है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद आहार उत्पादों को एक जवाबदेह और पारदर्शी प्रणाली के भीतर लाना है, ताकि उपभोक्ताओं तक सही जानकारी पहुँचे।

आम जनता पर प्रासंगिकता

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है और लोग पारंपरिक खान-पान की ओर लौट रहे हैं। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर भी 'ईटिंग पैटर्न' और 'फ़ूड सिस्टम' को लेकर बहस तेज़ हुई है, जिसमें भारतीय आयुर्वेदिक पद्धति को एक स्थायी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। आयुष मंत्रालय की यह पहल आयुर्वेद आहार को वैज्ञानिक और नियामक ढाँचे में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा और मानक (आयुर्वेद आहार) विनियम, 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से उपभोक्ताओं को प्रामाणिक आयुर्वेदिक उत्पादों की पहचान करना आसान होगा। आयुष मंत्रालय की सक्रियता यह संकेत देती है कि सरकार पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान को मुख्यधारा की नीति और जन-जागरूकता से जोड़ने में तेज़ी लाना चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा और मानक (आयुर्वेद आहार) विनियम, 2022 ज़मीन पर कितना लागू हो पाया है — बाज़ार में 'आयुर्वेदिक' लेबल वाले उत्पादों की भरमार के बीच उपभोक्ता असली और नकली की पहचान कैसे करें, इसका जवाब अभी भी अधूरा है। मंत्रालय की सोशल मीडिया सक्रियता स्वागतयोग्य है, परंतु नीति-जागरूकता और नीति-क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए ठोस निगरानी तंत्र की ज़रूरत है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद आहार क्या होता है?
आयुर्वेद आहार वह भोजन-व्यवस्था है जो आयुर्वेद के सिद्धांतों और भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित है। इसमें केवल भोजन की सामग्री नहीं, बल्कि उसे तैयार करने की विधि, परंपरा और निर्धारित मानक भी शामिल हैं।
आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद आहार के कौन-से तीन स्तंभ बताए हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार आयुर्वेद आहार के तीन मूल स्तंभ हैं — आहार (हम क्या खाते-पीते हैं), परंपरा (पीढ़ियों से चला आ रहा भोजन-ज्ञान), और मानक (उत्पादन व जानकारी के लिए निर्धारित नियामक ढाँचा)। ये तीनों मिलकर आयुर्वेद आहार की संपूर्ण अवधारणा बनाते हैं।
खाद्य सुरक्षा और मानक (आयुर्वेद आहार) विनियम, 2022 क्या है?
यह एक नियामक ढाँचा है जो आयुर्वेद आहार उत्पादों के उत्पादन और लेबलिंग को व्यवस्थित करता है। इसमें श्रेणी ए की व्यवस्था शामिल है और इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सही और जिम्मेदार जानकारी पहुँचाना है।
आयुर्वेद आहार में परंपरा का क्या महत्व है?
भारत में भोजन से जुड़ा ज्ञान सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होता रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम, स्थानीय उपलब्धता और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर भोजन तैयार करने के तरीके अलग होते हैं, और यही ज्ञान आयुर्वेद आहार की आत्मा है।
आयुर्वेद आहार आम लोगों के लिए क्यों प्रासंगिक है?
बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के बीच लोग पारंपरिक खान-पान की ओर लौट रहे हैं। आयुर्वेद आहार का नियामक ढाँचा उपभोक्ताओं को प्रामाणिक उत्पाद पहचानने में मदद करता है और बाज़ार में भ्रामक लेबलिंग से सुरक्षा प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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