पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल का बड़ा कदम: 17 साल के डॉक्टर पंजीकरण का ऑडिट शुरू
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को राज्य में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों के पिछले 17 वर्षों के पंजीकरण रिकॉर्ड का व्यापक ऑडिट शुरू किया है। यह कदम कोलकाता सहित पूरे राज्य में फर्जी डॉक्टरों के मामले सामने आने की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। काउंसिल के सूत्रों के अनुसार, इस ऑडिट का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया में किसी भी फर्जी या अनियमित मामले की पहचान करना है।
ऑडिट की प्रक्रिया और दायरा
काउंसिल सूत्रों ने बताया कि संबंधित एजेंसियों को पिछले 17 वर्षों में हुए पंजीकरणों का विस्तृत विवरण एक्सेल फॉर्मेट में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इस विवरण में डॉक्टरों के नाम, आवंटित पंजीकरण संख्या, पिता का नाम, लिंग, वर्तमान पता, प्राथमिक शैक्षणिक योग्यताएँ और एमबीबीएस डिग्री प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय का नाम शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, यदि किसी डॉक्टर के पास स्नातकोत्तर या अन्य उच्च शैक्षणिक योग्यताएँ हैं, तो उन योग्यताओं का विवरण और संबंधित संस्थान का नाम भी इस जाँच के दायरे में आएगा। सूत्रों के अनुसार, केवल पंजीकरण संख्या ही नहीं, बल्कि डिग्री देने वाले संस्थानों की प्रामाणिकता की भी गहन जाँच होगी।
फर्जी डॉक्टरों पर क्या होगी कार्रवाई
काउंसिल सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यदि ऑडिट में कोई व्यक्ति फर्जी डॉक्टर पाया जाता है, तो उसका एमबीबीएस पंजीकरण तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। यह पहली बार है जब काउंसिल ने इतने बड़े पैमाने पर और इतने लंबे समयकाल के पंजीकरणों की एकसाथ समीक्षा का निर्णय लिया है।
शिकायत और राजनीतिक विवाद
इस ऑडिट की पृष्ठभूमि में 15 सितंबर 2026 को दर्ज एक महत्वपूर्ण शिकायत है। निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम संघ (APHN) के सचिव राजीव पांडे ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और राज्य में फर्जी डॉक्टरों के पंजीकरण में कथित वृद्धि को लेकर पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जाँच की माँग की।
इस शिकायत में परिषद के अध्यक्ष सुदीप्ता रॉय, सचिव सुशांत रॉय, रजिस्ट्रार मानस चक्रवर्ती, परिषद सदस्य एवं विधायक निर्मल माजी और अन्य के नाम शामिल हैं। गौरतलब है कि सुदीप्ता रॉय और निर्मल माजी दोनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है।
व्यापक संदर्भ और जनस्वास्थ्य पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अयोग्य व्यक्तियों द्वारा चिकित्सा प्रैक्टिस के मामले सामने आते रहे हैं। पश्चिम बंगाल में यह ऑडिट उन लाखों मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है जो राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं। आलोचकों का कहना है कि पंजीकरण प्रणाली में खामियाँ वर्षों से बनी रही हैं और यह ऑडिट बहुत देर से शुरू हुआ है।
आगे यह देखना होगा कि ऑडिट में कितने अनियमित पंजीकरण सामने आते हैं और क्या काउंसिल इन मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर पाती है।