डीवीआरआरसी में लौटेगा बंगाल का प्रतिनिधि, मानसून से पहले होगी औपचारिक घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (डीवीआरआरसी) में अपना प्रतिनिधि फिर से भेजने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। नवान्न सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, यह घोषणा मानसून 2026 से पहले औपचारिक रूप से की जाएगी — जो केंद्र और राज्य के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव के अंत का संकेत है।
पृष्ठभूमि: क्यों वापस लिया गया था प्रतिनिधित्व
सितंबर 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर डीवीआरआरसी से राज्य का प्रतिनिधित्व वापस लेने की जानकारी दी थी। उनका आरोप था कि दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) मानसून के दौरान राज्य को पूर्व सूचना दिए बिना बांधों से पानी छोड़ता है, जिससे दक्षिण बंगाल के कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं।
यह कदम उस समय राजनीतिक रूप से विवादास्पद बना जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की। मंत्रालय का तर्क था कि डीवीसी जलाशयों से पानी छोड़ने का निर्णय डीवीआरआरसी की बैठक में चर्चा के बाद ही लिया जाता है, जिसमें राज्य सरकार का प्रतिनिधि भी शामिल होता है — इसलिए बिना सूचना पानी छोड़े जाने का आरोप निराधार है।
नई सरकार का रुख: टकराव से सहयोग की ओर
नवान्न सचिवालय के एक सूत्र ने बताया, 'अब केंद्र और पश्चिम बंगाल में एक ही दल की सरकार होने के कारण डीवीसी के साथ टकराव का दौर खत्म हो गया है। इसी वजह से राज्य सरकार ने मानसून से पहले डीवीआरआरसी में अपना प्रतिनिधि भेजने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जल्द औपचारिक घोषणा की जाएगी।'
सूत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय ने राज्य के बिजली और सिंचाई विभाग को डीवीसी के साथ समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश भी दे दिए हैं।
ममता सरकार का पुराना रुख
2011 से 2026 तक अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में ममता बनर्जी लगातार यह आरोप लगाती रहीं कि बाढ़ का पानी छोड़ने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार की सहमति लिए बिना एकतरफा तरीके से किए जाते हैं। उन्होंने कई बार कहा था कि डीवीसी राज्य के अनुरोधों और सुझावों की अनदेखी करते हुए बिना पूर्व सूचना जलाशयों से पानी छोड़ देता है।
गौरतलब है कि यह टकराव केवल तकनीकी नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक रंग में रंगा था — केंद्र में BJP और राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सत्ता के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान का हिस्सा।
आम जनता पर असर
डीवीआरआरसी में राज्य के प्रतिनिधित्व की वापसी का सीधा असर दक्षिण बंगाल के बाढ़-प्रभावित जिलों पर पड़ेगा। समिति में शामिल होने से राज्य सरकार को जलाशयों से पानी छोड़ने के निर्णयों में पहले से भागीदारी मिलेगी, जिससे मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सकता है।
आगे क्या होगा
नवान्न सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, औपचारिक घोषणा मानसून शुरू होने से पहले की जाएगी। यह कदम केंद्र-राज्य संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है — और यह देखना होगा कि बाढ़ नियंत्रण के मामले में यह नई साझेदारी ज़मीन पर कितनी कारगर साबित होती है।