बंगाल-तमिलनाडु में ऐतिहासिक मतदान: 92%25 वोटिंग को नेताओं ने बताया जनादेश का संकेत

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बंगाल-तमिलनाडु में ऐतिहासिक मतदान: 92%25 वोटिंग को नेताओं ने बताया जनादेश का संकेत

सारांश

बंगाल और तमिलनाडु में 84-92%25 ऐतिहासिक मतदान के बाद राजनेताओं ने इसे जनता की बदलाव की आवाज बताया। टीएमसी, कांग्रेस और एजेयूपी ने अपनी जीत के दावे किए, जबकि ईडी और केंद्रीय बलों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठे।

Key Takeaways

  • पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 84 से 92 प्रतिशत तक ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया।
  • बंगाल मंत्री ब्रात्य बसु ने चुनाव में केंद्रीय बलों की अभूतपूर्व तैनाती की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर डाली।
  • एजेयूपी अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में 10 सीटें जीतने और खुद 70,000-80,000 वोटों से जीतने का दावा किया।
  • कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने पीएम मोदी के बंगाल में भ्रष्टाचार वाले नैरेटिव को खारिज करते हुए जनता के जमीनी अनुभव का हवाला दिया।
  • पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने तमिलनाडु में डीएमके और बंगाल में टीएमसी की सत्ता में वापसी का पूर्वानुमान लगाया।
  • सिंह देव ने ईडी के कथित राजनीतिक दुरुपयोग को बंगाल और महाराष्ट्र दोनों में एक जैसा बताया।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में 84 से 92 प्रतिशत तक का ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया है, जिसे देश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने जनता की जबरदस्त भागीदारी और सत्ता बदलाव की सामूहिक इच्छाशक्ति के रूप में व्याख्यायित किया है। इस असाधारण मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।

बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती और मंत्री बसु का बयान

कोलकाता में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ मंत्री ब्रात्य बसु ने चुनावी प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में कुछ छिटपुट घटनाएं जरूर सामने आईं, लेकिन चुनाव आयोग ने इस बार बंगाल में जिस पैमाने पर केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए, वह अभूतपूर्व है।

बसु ने कहा, "चुनाव आयोग ने डीजी, पुलिस कमिश्नर और एडीजी (कानून-व्यवस्था) तक को बदल दिया और इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय सेना बुलाई — ऐसे में चुनाव की जिम्मेदारी उन्हीं की है।" यह बयान इस बात का संकेत है कि टीएमसी किसी भी संभावित हिंसा की जिम्मेदारी सीधे चुनाव आयोग पर डालने की रणनीतिक स्थिति में है।

मुर्शिदाबाद में एजेयूपी का आत्मविश्वास

मुर्शिदाबाद से आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने दावा किया कि उनकी पार्टी मुर्शिदाबाद में 10 सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि उनकी अपनी दोनों सीटें 70,000 से 80,000 वोटों के भारी अंतर से जीती जाएंगी।

गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद बंगाल का एक संवेदनशील और मुस्लिम बहुल जिला है, जहां छोटे दलों का उभार पारंपरिक समीकरणों को बदल सकता है। एजेयूपी का यह दावा यदि आंशिक रूप से भी सच हुआ तो टीएमसी और कांग्रेस दोनों के लिए यह नुकसानदेह हो सकता है।

कांग्रेस का पलटवार — मोदी के नैरेटिव पर सवाल

दिल्ली में कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर तीखा जवाब दिया जिसमें उन्होंने बंगाल में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। अनवर ने कहा, "बंगाल की जनता उसी पर भरोसा करती है जो वे रोज अपनी आंखों से देखते हैं — वहां की सरकार ने जमीनी स्तर पर गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए ठोस काम किया है।"

यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा ने बंगाल में भ्रष्टाचार को अपना केंद्रीय चुनावी मुद्दा बनाया था। रिकॉर्ड मतदान के बाद कांग्रेस इसे अपनी रणनीति की पुष्टि मान रही है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री का चुनावी पूर्वानुमान

सरगुजा (छत्तीसगढ़) में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तमिलनाडु में डीएमके और पश्चिम बंगाल में टीएमसी सत्ता में वापसी करेगी। उनका यह पूर्वानुमान उच्च मतदान प्रतिशत को सत्तारूढ़ दलों के पक्ष में व्याख्यायित करने की कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक सोच को दर्शाता है।

सिंह देव ने ईडी की कार्रवाई पर मुंबई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "जिस तरह बंगाल में टीएमसी के खिलाफ ईडी के दुरुपयोग के आरोप लगे, उसी तरह महाराष्ट्र में भी कथित तौर पर राजनीतिक फायदे के लिए ईडी का इस्तेमाल किया गया।" यह बयान केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों के उपयोग पर विपक्ष के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को फिर से सामने लाता है।

वैश्विक संदर्भ और ईरान मुद्दे पर टिप्पणी

सिंह देव ने जहाजों पर ईरान के हमलों के वैश्विक आर्थिक प्रभाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली देश ईरान पर स्थिति सामान्य करने का दबाव बना रहे हैं और अमेरिका के साथ भी इस दिशा में बातचीत जारी है।

विश्लेषण: उच्च मतदान का राजनीतिक अर्थ

चुनावी इतिहास बताता है कि 90 प्रतिशत से अधिक मतदान आमतौर पर सत्ता-विरोधी या सत्ता-समर्थक किसी एक लहर का संकेत होता है। 2011 के बंगाल चुनाव में भी उच्च मतदान ने वाम मोर्चे की ३४ साल पुरानी सत्ता का अंत किया था। इस बार यह उच्च मतदान किसके पक्ष में जाएगा, यह मतगणना के दिन स्पष्ट होगा।

दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम न केवल इन राज्यों की राजनीति बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में मतगणना के नतीजे तय करेंगे कि जनता का यह जनादेश किस दिशा में है।

Point of View

यह लोकतंत्र की ताकत का प्रमाण है — लेकिन असली सवाल यह है कि यह ताकत किस दिशा में झुकी है। विपक्ष इसे सत्ता-विरोधी लहर बता रहा है, तो सत्तारूढ़ दल इसे अपनी नीतियों की स्वीकृति। ईडी के दुरुपयोग के आरोप और केंद्रीय बलों की बेमिसाल तैनाती यह दर्शाती है कि चुनाव केवल मतपेटी तक सीमित नहीं रहा — यह संस्थाओं की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। 2011 में जब बंगाल में इतना ही उच्च मतदान हुआ था, तो 34 साल की सत्ता पलट गई थी — इतिहास खुद को दोहराएगा या नहीं, यह मतगणना बताएगी।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

बंगाल और तमिलनाडु में कितने प्रतिशत मतदान हुआ?
दोनों राज्यों में औसतन 84 से 92 प्रतिशत तक मतदान दर्ज किया गया, जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। इसे राजनीतिक दलों ने जनता की भारी भागीदारी का प्रतीक बताया है।
बंगाल चुनाव में ब्रात्य बसु ने क्या कहा?
ब्रात्य बसु ने कहा कि चुनाव आयोग ने राज्य में डीजी, पुलिस कमिश्नर और एडीजी तक बदल दिए और बड़े पैमाने पर केंद्रीय सेना तैनात की। उन्होंने कहा कि ऐसे में चुनाव की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।
टी.एस. सिंह देव ने बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव परिणाम को लेकर क्या भविष्यवाणी की?
पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने कहा कि तमिलनाडु में डीएमके और बंगाल में टीएमसी सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईडी का राजनीतिक दुरुपयोग बंगाल और महाराष्ट्र दोनों में हुआ।
कांग्रेस ने पीएम मोदी के बंगाल भ्रष्टाचार वाले बयान पर क्या जवाब दिया?
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि बंगाल की जनता उसी बात पर भरोसा करती है जो वे रोज देखते हैं। उन्होंने कहा कि वहां की सरकार ने गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है, इसलिए जनता मोदी के नैरेटिव को नहीं मान रही।
मुर्शिदाबाद में एजेयूपी का क्या दावा है?
एजेयूपी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने दावा किया कि उनकी पार्टी मुर्शिदाबाद में 10 सीटें जीतेगी और उनकी अपनी सीटें 70,000 से 80,000 वोटों के अंतर से जीती जाएंगी। यह दावा पारंपरिक दलों के लिए चुनौती बन सकता है।
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