बेंगलुरु आईईडी विस्फोट: 100 से अधिक सीसीटीवी खंगाले, NIA की एंट्री संभव; 5 विशेष टीमें तैनात
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के पुलकेशीनगर स्थित एक निर्माणाधीन इमारत में हुए संदिग्ध इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) विस्फोट की जांच में 23 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने बताया कि 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है और पाँच विशेष जांच दल गठित किए गए हैं। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट का इंतज़ार जारी है, जिसके बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होगी।
घटनाक्रम: कैसे हुआ विस्फोट
प्रारंभिक जांच के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन करके सुरक्षा गार्ड को एक डिब्बा उठाकर इमारत के अंदर रखने का निर्देश दिया। फोन करने वाले ने दावा किया था कि पार्सल में एक टॉर्च है। गार्ड ने निर्देशों का पालन करते हुए डिब्बा इमारत के अंदर रख दिया। जब डिब्बा खोलकर उसकी बैटरी चालू की गई, तो विस्फोट हो गया। इस धमाके में एक पेंटर सहित दो व्यक्ति घायल हो गए — एक की उँगली कट गई, दूसरे को मामूली चोटें आईं।
जांच की मुख्य चुनौतियाँ
जांच दो प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है — विस्फोटक सामग्री का स्रोत और पार्सल पहुँचाने वाले व्यक्ति की पहचान। पुलिस को संदेह है कि आरोपियों के किसी सहयोगी ने ही इसे घटनास्थल तक पहुँचाया होगा।
घायल अलाउद्दीन को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन उनके बयानों में विरोधाभास पाया गया है — एक ओर उन्होंने कहा कि किसी ने उन्हें पार्सल दिया, दूसरी ओर यह भी कहा कि पार्सल पहले से इमारत के पास रखा था। दूसरे घायल सूरज की हालत अभी बयान देने योग्य नहीं है।
इमारत के मालिक रहमान ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और किसी पुरानी दुश्मनी की जानकारी न होने की बात कही है।
NIA की संभावित एंट्री
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बेंगलुरु पुलिस से इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट माँगी है और स्थानीय पुलिस तथा 'सीन ऑफ क्राइम ऑफिसर्स' टीम की रिपोर्ट प्राप्त कर ली है। यदि जांच में और गहराई की आवश्यकता पड़ी, तो NIA घटनास्थल का स्वयं मुआयना कर सकती है। फिलहाल, ईस्ट डिवीजन के पुलिस उपायुक्त (DCP) की निगरानी में स्थानीय पुलिस और आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) की टीमें जांच कर रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
IED के इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांचकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि संदिग्ध को बैटरी सक्रिय IED बनाने की तकनीकी जानकारी कैसे मिली। उपकरण के डिज़ाइन, उसमें इस्तेमाल सामग्री और विस्फोट की विधि की गहन जांच जारी है। यह भी स्थापित करने की कोशिश हो रही है कि यह कोई बड़ी साजिश का हिस्सा है या निजी दुश्मनी।
गौरतलब है कि बेंगलुरु 'भारत की सिलिकॉन वैली' के रूप में जाना जाता है, जहाँ कई रक्षा प्रतिष्ठान, वैज्ञानिक संस्थान और अनुसंधान केंद्र स्थित हैं — इस कारण यहाँ किसी भी विस्फोटक घटना की सुरक्षा निहितार्थ और व्यापक हो जाते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि घटना के सही कारण जानने के लिए फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट का इंतज़ार आवश्यक है। आगे की जांच इस रिपोर्ट के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।