5 नवंबर 2026
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भारत-इटली नौसेनाओं के बीच पहली स्टाफ वार्ता, समुद्री सहयोग को संस्थागत रूप देने की पहल

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भारत-इटली नौसेनाओं के बीच पहली स्टाफ वार्ता, समुद्री सहयोग को संस्थागत रूप देने की पहल

सारांश

भारत और इटली की नौसेनाओं के बीच पहली बार औपचारिक स्टाफ वार्ता आयोजित हुई — यह दोनों देशों के बीच रक्षा मंत्रियों की वार्ता के बाद समुद्री संबंधों को संस्थागत धरातल देने की दिशा में अगला ठोस कदम है, जिसमें पनडुब्बी निगरानी और सूचना साझाकरण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर सहयोग प्रमुख एजेंडे में रहा।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना और इतालवी नौसेना के बीच 5 नवंबर 2026 को पहली बार औपचारिक स्टाफ वार्ता आयोजित हुई।
वार्ता में समुद्री सूचना साझाकरण , पनडुब्बी गतिविधियों की निगरानी और सैन्य प्रशिक्षण आदान-प्रदान पर चर्चा हुई।
बैठक दोनों नौसेनाओं के प्रमुखों के दिशा-निर्देशों के आधार पर आयोजित की गई।
इसी वर्ष नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इटली के रक्षा मंत्री के बीच द्विपक्षीय वार्ता हो चुकी है।
आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा उत्पादन में सहयोग और नई रक्षा क्षमताओं के विकास पर सहमति पहले ही बन चुकी है।

भारतीय नौसेना और इतालवी नौसेना के बीच 5 नवंबर 2026 को पहली बार औपचारिक स्टाफ वार्ता आयोजित की गई, जिसमें समुद्री सहयोग, सूचना साझाकरण और सैन्य प्रशिक्षण के आदान-प्रदान पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। यह वार्ता दोनों देशों की नौसेना के प्रमुखों द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई और द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को संस्थागत आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

वार्ता का मुख्य उद्देश्य

इस पहली स्टाफ वार्ता का केंद्रीय लक्ष्य दोनों नौसेनाओं के बीच साझा रणनीतिक सोच को ठोस और व्यावहारिक सहयोग में परिवर्तित करना है। बैठक में नियमित ऑपरेशनल गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने के तरीकों पर चर्चा हुई, साथ ही आपसी संपर्क को एक स्थायी संस्थागत ढाँचे में ढालने की प्रक्रिया पर भी सहमति बनाने का प्रयास किया गया।

विशेष रूप से, दोनों पक्षों ने पनडुब्बी गतिविधियों की निगरानी और समुद्र के भीतर की गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी के सहयोग के क्षेत्र में संभावनाएँ तलाशने पर जोर दिया। इसे हिंद-प्रशांत और भूमध्य सागर में बढ़ती समुद्री सक्रियता के परिप्रेक्ष्य में एक सामरिक रूप से महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

वार्ता में समुद्री सूचना साझाकरण की व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया। इसके अलावा, दोनों नौसेनाओं के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रमों और पेशेवर अनुभवों के आदान-प्रदान को संस्थागत रूप देने पर भी सहमति जताई गई। समुद्री डोमेन अवेयरनेस यानी समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों की व्यापक निगरानी को इस सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ बताया गया है।

रक्षा मंत्रियों की वार्ता का संदर्भ

गौरतलब है कि इसी वर्ष नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इटली के रक्षा मंत्री के बीच द्विपक्षीय वार्ता हो चुकी है। उस बैठक में तीनों सेनाओं के प्रमुख — नौसेना प्रमुख, वायुसेना प्रमुख और थलसेना प्रमुख — के साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

उस वार्ता में दोनों देशों ने शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान के साझा मूल्यों पर आधारित अपनी रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया था। पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर भी दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श किया था। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में सहयोग और इटली के साथ मिलकर नई रक्षा क्षमताएँ विकसित करने पर भी सहमति बनी थी।

आगे की राह

यह पहली नौसेना स्टाफ वार्ता भारत-इटली रक्षा संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में ठोस शुरुआत मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की संस्थागत वार्ताएँ भविष्य में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और तकनीकी सहयोग के लिए आधार तैयार करती हैं। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच स्थापित होने वाला यह नियमित संवाद तंत्र आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई ऊँचाइयाँ देने में सहायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पनडुब्बी निगरानी और समुद्री डोमेन अवेयरनेस जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का एजेंडे में शामिल होना इसे साधारण शिष्टाचार-भेंट से अलग करता है। यह उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें भारत यूरोपीय नौसेनाओं के साथ — विशेषकर भूमध्य सागर और हिंद-प्रशांत के संगम पर — अपनी उपस्थिति को संस्थागत रूप दे रहा है। ध्यान देने योग्य यह है कि इटली NATO का सदस्य है और इस साझेदारी की गहराई भारत के पश्चिम एशिया नीति तथा यूरोपीय सुरक्षा ढाँचे से उसके जुड़ाव को भी दर्शाती है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और इटली की नौसेनाओं के बीच पहली स्टाफ वार्ता कब हुई?
यह वार्ता 5 नवंबर 2026 को आयोजित हुई। यह दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पहली औपचारिक स्टाफ-स्तरीय बैठक थी, जो भारतीय और इतालवी नौसेना प्रमुखों के दिशा-निर्देशों पर आधारित थी।
इस वार्ता में किन विषयों पर चर्चा हुई?
वार्ता में समुद्री सहयोग बढ़ाने, सूचनाओं के आदान-प्रदान, सैन्य प्रशिक्षण और विशेष रूप से पनडुब्बी गतिविधियों की निगरानी एवं समुद्री डोमेन अवेयरनेस पर सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत-इटली रक्षा सहयोग की पृष्ठभूमि क्या है?
इसी वर्ष नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इटली के रक्षा मंत्री के बीच द्विपक्षीय वार्ता हो चुकी है। उस बैठक में आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा उत्पादन सहयोग और पश्चिम एशिया सहित क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी।
इस नौसेना वार्ता का महत्व क्यों है?
यह पहली स्टाफ वार्ता दोनों देशों के बीच समुद्री संबंधों को एक संस्थागत और नियमित ढाँचा देने की दिशा में पहला ठोस कदम है। इससे भविष्य में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, तकनीकी साझेदारी और सामरिक सूचना साझाकरण के रास्ते खुलने की संभावना है।
क्या भारत और इटली के बीच कोई साझा सामरिक मूल्य हैं?
हाँ, दोनों देशों ने शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान के साझा मूल्यों पर आधारित अपनी रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया है। इटली के NATO सदस्य होने के कारण यह साझेदारी भारत के यूरोपीय सुरक्षा ढाँचे से जुड़ाव की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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