5 नवंबर 2026
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ऑलिव रिडले कछुओं की सुरक्षा: तमिलनाडु वन विभाग ने चेन्नई तट पर गश्त शुरू की, दिसंबर में घोंसला मौसम

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ऑलिव रिडले कछुओं की सुरक्षा: तमिलनाडु वन विभाग ने चेन्नई तट पर गश्त शुरू की, दिसंबर में घोंसला मौसम

सारांश

दिसंबर से पहले तमिलनाडु वन विभाग ने चेन्नई तट पर ऑलिव रिडले कछुओं के लिए बहुस्तरीय संरक्षण अभियान शुरू किया है। मरीना बीच से उथंडी तक गश्त, स्वयंसेवक प्रशिक्षण और मरीन एलीट फोर्स की तैनाती — सब एक साथ।

मुख्य बातें

तमिलनाडु वन विभाग ने 5 नवंबर 2026 से चेन्नई के तटवर्ती इलाकों में ऑलिव रिडले कछुओं के संरक्षण के लिए गश्त शुरू की।
गश्त सप्ताह में तीन से चार बार , प्रत्येक बार दो से तीन घंटे तक चलेगी।
मरीना बीच से नीलंकरई और उथंडी तक का तटीय क्षेत्र मुख्यालय वन्यजीव रेंज के अधीन होगा; पुलिकट रेंज अपने क्षेत्र में गश्त करेगी।
मरीन एलीट फोर्स (MEF) ने मत्स्य विभाग के साथ मिलकर मछली पकड़ने की गतिविधियों पर निगरानी शुरू की।
घोंसला बनाने का मौसम दिसंबर 2026 में शुरू होने की संभावना; विभाग स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण भी देगा।

तमिलनाडु वन विभाग ने 5 नवंबर 2026 को चेन्नई के तटवर्ती इलाकों में लुप्तप्राय ऑलिव रिडले समुद्री कछुओं की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय संरक्षण अभियान शुरू किया है। यह कदम वार्षिक घोंसला बनाने के मौसम से ठीक पहले उठाया गया है, जिसके दिसंबर 2026 में शुरू होने की संभावना है। चेन्नई वन्यजीव प्रभाग ने समुद्र तट और नौकाओं के माध्यम से नियमित गश्त आरंभ करते हुए एक व्यापक संरक्षण रणनीति को अमल में लाया है।

गश्त की रूपरेखा और क्षेत्र

चेन्नई के वन्यजीव वार्डन भार्गव तेजा के अनुसार विभाग की मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के तहत नवंबर से ही गश्त प्रारंभ कर दी गई है। यह गश्त सप्ताह में तीन से चार बार, प्रत्येक बार दो से तीन घंटे तक चलेगी और उन संवेदनशील तटीय इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहाँ कछुए घोंसले बनाते हैं।

मुख्यालय की वन्यजीव रेंज मरीना बीच से लेकर नीलंकरई और उथंडी तक के तटीय क्षेत्रों की निगरानी करेगी। इसके साथ ही पुलिकट रेंज भी अपने अधिकार-क्षेत्र में इसी तरह के संरक्षण कार्य संचालित करेगी।

संरक्षण के प्रमुख उपाय

अधिकारी संवेदनशील गश्ती क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें चिह्नित करेंगे, नियमित रूप से समुद्र तट की सफाई करेंगे और ऐसी रुकावटों को हटाएंगे जो कछुओं के घोंसला बनाने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकती हैं। विभाग स्वयंसेवकों को कछुआ संरक्षण तकनीकों, घोंसलों की पहचान और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देने की भी योजना बना रहा है, ताकि खतरे की स्थिति में समय रहते कार्रवाई हो सके।

मरीन एलीट फोर्स की भूमिका

मरीन एलीट फोर्स (MEF) ने मत्स्य विभाग के साथ मिलकर चेन्नई तट पर नौकाओं के जरिए गश्त शुरू की है। यह विशेष बल ट्रॉलरों और मछली पकड़ने वाली नावों की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखेगा, ताकि सरकार द्वारा समुद्री वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगाए गए मछली पकड़ने के प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

गौरतलब है कि संवेदनशील तटीय इलाकों में मशीनी ट्रॉलरों का संचालन ऑलिव रिडले कछुओं के लिए एक बड़ा खतरा है, क्योंकि ये कछुए अनजाने में मछली पकड़ने के जालों में फँस जाते हैं। यह समस्या हर प्रजनन मौसम में सामने आती रही है।

ऑलिव रिडले का महत्व और खतरे

ऑलिव रिडले कछुए हर वर्ष अंडे देने के लिए तमिलनाडु के तटों पर आते हैं। संरक्षण प्रयासों में मुख्य रूप से इन कछुओं की अनजाने में होने वाली मौतों को रोकना, अंडे देने वाली जगहों को मानवीय हस्तक्षेप से बचाना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि अंडे व उनसे निकले बच्चे सुरक्षित रहें। यह ऐसे समय में आया है जब समुद्री कछुओं की वैश्विक आबादी पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

आगे की राह

वन अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले प्रजनन मौसम में समन्वित गश्त, प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी से संरक्षण प्रयासों को और मज़बूती मिलेगी। विभाग का यह प्रयास न केवल स्थानीय जैव विविधता के लिए बल्कि तमिलनाडु के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सप्ताह में तीन-चार घंटे की गश्त अवैध ट्रॉलिंग के व्यापक दबाव के सामने पर्याप्त है। मरीन एलीट फोर्स की तैनाती एक सकारात्मक कदम है, परंतु मछुआरा समुदाय के साथ दीर्घकालिक जागरूकता के बिना प्रवर्तन अकेले नतीजे नहीं दे सकता। स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीन पर उनकी संख्या और क्षमता कितनी है। समुद्री जैव विविधता के लिए यह वार्षिक दो-तीन माह का प्रयास तब तक अधूरा है जब तक पूरे साल तटीय प्रबंधन को नीतिगत प्राथमिकता न मिले।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑलिव रिडले कछुए तमिलनाडु के तट पर कब आते हैं?
ऑलिव रिडले कछुए हर वर्ष अंडे देने के लिए तमिलनाडु के तट पर आते हैं और इस बार घोंसला बनाने का मौसम दिसंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए वन विभाग ने नवंबर से ही तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।
तमिलनाडु वन विभाग ने चेन्नई तट पर क्या कदम उठाए हैं?
विभाग ने समुद्र तट और नौकाओं के जरिए गश्त शुरू की है, जो सप्ताह में तीन से चार बार दो से तीन घंटे चलेगी। इसके अलावा तट की सफाई, बाधाओं को हटाना और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देना भी इस अभियान का हिस्सा है।
मरीन एलीट फोर्स की इस अभियान में क्या भूमिका है?
मरीन एलीट फोर्स (MEF) ने मत्स्य विभाग के साथ मिलकर चेन्नई तट पर नौकाओं से गश्त शुरू की है। यह बल ट्रॉलरों और मछली पकड़ने वाली नावों की निगरानी करता है ताकि समुद्री वन्यजीव संरक्षण प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित हो।
ऑलिव रिडले कछुओं के लिए मछली पकड़ना खतरनाक क्यों है?
संवेदनशील तटीय इलाकों में मशीनी ट्रॉलरों का संचालन ऑलिव रिडले कछुओं के लिए बड़ा खतरा है, क्योंकि ये कछुए अनजाने में मछली पकड़ने के जालों में फँस जाते हैं। इससे इनकी अनजाने में मौत हो सकती है, जो इनकी पहले से कमज़ोर आबादी को और नुकसान पहुँचाती है।
चेन्नई में कछुआ संरक्षण गश्त किन क्षेत्रों को कवर करती है?
मुख्यालय वन्यजीव रेंज मरीना बीच से नीलंकरई और उथंडी तक के तटीय इलाकों की निगरानी करेगी, जबकि पुलिकट रेंज अपने अधिकार-क्षेत्र में संरक्षण कार्य संचालित करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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