तमिलनाडु में वन सुरक्षा का हाईटेक मिशन: 1 टन पानी वाले ड्रोन बुझाएंगे आग, सैटेलाइट से होगी वन्यजीवों की निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 7 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य के जंगलों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगाम लगाने के लिए हेवी-लिफ्ट ड्रोन, स्मार्ट इलेक्ट्रिक फेंसिंग और सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली तैनात की जाएगी। राज्य के वन मंत्री आर.वी. रंजीत कुमार के अनुसार, यह पहल जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बढ़ते वन अग्निकांडों और जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर शुरू की जा रही है। वन मंत्री ने दावा किया कि इस तरह की एकीकृत तकनीकी व्यवस्था लागू करने वाला तमिलनाडु देश का पहला राज्य बन सकता है।
ड्रोन आधारित अग्निशमन प्रणाली
वन विभाग ने ऐसे हेवी-लिफ्ट ड्रोन तैयार कर लिए हैं जो एक बार में 1 टन तक पानी लेकर उड़ान भर सकते हैं और आग प्रभावित क्षेत्रों में तेज़ी से पहुँचकर बड़े पैमाने पर जल छिड़काव कर सकते हैं। इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये उन दुर्गम और दूरदराज़ के जंगली इलाकों तक भी पहुँच सकते हैं, जहाँ पारंपरिक दमकल वाहन और राहत दल समय पर नहीं पहुँच पाते। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में गर्मियों के दौरान लंबे सूखे और बढ़ते तापमान के कारण वन अग्निकांडों की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर तकनीकी नियंत्रण
मानव और वन्यजीव के बीच टकराव को कम करने के लिए सरकार स्मार्ट इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाएगी, जो हाथियों और अन्य जंगली जानवरों को ग्रामीण व कृषि क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकेगी। इससे न केवल लोगों पर होने वाले हमलों में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी राहत मिलने की संभावना है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के नीलगिरि और कोयंबटूर जैसे ज़िलों में हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएँ लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं।
सैटेलाइट कैमरों से रियल-टाइम निगरानी
वन विभाग जंगलों और वन्यजीवों के आवाजाही वाले रास्तों पर सैटेलाइट आधारित कैमरे भी लगाएगा। ये कैमरे जंगली जानवरों की गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी वन अधिकारियों तक पहुँचाएंगे, जिससे अधिकारी समय रहते अलर्ट जारी कर सकेंगे और जानवरों के आबादी वाले इलाकों में पहुँचने से पहले ज़रूरी कदम उठा सकेंगे। यह प्रणाली वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा — दोनों को एक साथ साधने का प्रयास है।
जलवायु परिवर्तन की पृष्ठभूमि
वन मंत्री रंजीत कुमार ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्मियों में लंबे सूखे की अवधि जंगलों में आग लगने के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। इस पहल का उद्देश्य एक ओर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण को मज़बूत करना और वन सीमा पर रहने वाले किसानों को होने वाले नुकसान को कम करना है।
आगे की राह
सरकार की ओर से इस परियोजना की विस्तृत समयसीमा और बजट का खुलासा अभी नहीं किया गया है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जो वन अग्निकांड और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी समान चुनौतियों से जूझ रहे हैं।