5 नवंबर 2026
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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: बिश्नोई गैंग ने रिक्शाचालकों-दुकानदारों के UPI खातों से शूटरों को फंड किया

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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: बिश्नोई गैंग ने रिक्शाचालकों-दुकानदारों के UPI खातों से शूटरों को फंड किया

सारांश

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बिश्नोई गैंग का वित्तीय नेटवर्क उजागर — रिक्शाचालकों और दुकानदारों के UPI खातों को ढाल बनाकर हरियाणा से मुंबई तक शूटरों को फंड पहुँचाया गया। साथ ही दिल्ली में ₹20 करोड़ रंगदारी का नया मामला भी सामने आया।

मुख्य बातें

मुंबई क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने रिक्शाचालकों और दुकानदारों के UPI खातों के ज़रिए शूटरों को फंड पहुँचाया।
कथित मास्टरमाइंड अनिल पंडित विदेश में है; उसके भाई अभिषेक पंडित की पत्नी सुनेहा पंडित ने हरियाणा के करनाल से QR कोड स्कैन कर रकम ट्रांसफर की।
एक दुकानदार के खाते में ₹1,510 भेजे गए; उसे मात्र ₹10 कमीशन देकर ₹1,500 नकद लिए गए।
शूटर फूल सिंह , रेहान और ऋतिक पर वारदात से पहले रेकी और फंड ट्रांसफर में शामिल होने का आरोप है।
अभिषेक पंडित पर क्रिप्टो वॉलेट और हवाला नेटवर्क से गैंग का वित्त संचालित करने का शक; वह भी फिलहाल वांछित है।
दिल्ली में अस्पताल संचालक शकील सैफी से ₹20 करोड़ रंगदारी माँगने का नया मामला निहाल विहार थाने में दर्ज।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग की जाँच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के वित्तीय नेटवर्क से जुड़ा एक अहम खुलासा किया है। जाँच के अनुसार, गैंग ने मुंबई में तैनात शूटरों तक रकम पहुँचाने के लिए स्थानीय ऑटो-रिक्शा चालकों और छोटे दुकानदारों के बैंक खातों और यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया। यह तरीका न केवल पैसों की ट्रेल छिपाने के लिए बनाया गया था, बल्कि जाँच एजेंसियों को गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश का हिस्सा भी था।

कैसे काम करता था यह वित्तीय नेटवर्क

क्राइम ब्रांच की जाँच में सामने आया है कि शूटर पहले रिक्शा चालकों और दुकानदारों से थोड़े कमीशन का लालच देकर उनके यूपीआई क्यूआर कोड हासिल करते थे। इन कोड की तस्वीरें कथित तौर पर विदेश में बैठे गैंग के मुख्य गुर्गे अनिल पंडित को भेजी जाती थीं। अनिल ये तस्वीरें अपने छोटे भाई अभिषेक पंडित तक पहुँचाता था, जिसके निर्देश पर उसकी पत्नी सुनेहा पंडित हरियाणा के करनाल से इन क्यूआर कोड को स्कैन कर रकम ट्रांसफर करती थी।

रकम खाते में आने के बाद मुंबई में मौजूद शूटर संबंधित व्यक्ति को कमीशन देकर बाकी रकम नकद निकाल लेते थे। इस प्रक्रिया में हरियाणा से मुंबई तक पैसों की आवाजाही पूरी तरह आम नागरिकों के खातों की आड़ में होती थी।

वारदात से पहले रेकी में भी हुआ खातों का दुरुपयोग

क्राइम ब्रांच के अनुसार, वारदात से पहले रेकी के दौरान शूटरों ने मुंबई में आवाजाही के लिए ऑटो-रिक्शा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। किराया और रोज़मर्रा के खर्च के बहाने चालकों को बताया जाता था कि उनका कोई दोस्त या रिश्तेदार सीधे खाते में पैसे भेज देगा।

इसी तरह होटल, ढाबों और दुकानों पर भी यह तरीका अपनाया गया। जाँच के दौरान एक दुकानदार के क्यूआर कोड पर ₹1,510 ट्रांसफर किए जाने का मामला सामने आया — जिसमें दुकानदार को मात्र ₹10 का कमीशन दिया गया और बाकी ₹1,500 नकद ले लिए गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गैंग ने वित्तीय लेनदेन के सीधे सुराग से बचने के लिए आम लोगों के खातों का इस्तेमाल किया।

अभियुक्तों की भूमिका और मनी ट्रेल

क्राइम ब्रांच के अनुसार, शूटर फूल सिंह, रेहान और ऋतिक को कथित तौर पर अनिल पंडित लगातार निर्देश देता था। अनिल पंडित फिलहाल विदेश में बताया जाता है। उसका छोटा भाई अभिषेक पंडित भी फिलहाल वांछित है और खुफिया एजेंसियों को शक है कि वह भी विदेश में छिपा हुआ है। उस पर क्रिप्टो वॉलेट और हवाला नेटवर्क के ज़रिए गैंग के वित्तीय लेनदेन संचालित करने का आरोप है। हरियाणा में उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।

डिजिटल फोरेंसिक और तकनीकी निगरानी की मदद से क्राइम ब्रांच ने इस मनी ट्रेल की कई कड़ियों का पता लगाया है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुनेहा पंडित ने कुल कितनी रकम शूटरों और साजिश में शामिल अन्य अभियुक्तों तक पहुँचाई।

दिल्ली अस्पताल संचालक से ₹20 करोड़ रंगदारी का मामला

इसी बीच, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर दिल्ली में एक अस्पताल संचालक से ₹20 करोड़ की रंगदारी मांगने का मामला भी सामने आया है। शिकायतकर्ता शकील सैफी, जो निहाल विहार स्थित सैफी अस्पताल के मालिक हैं, ने दिल्ली के निहाल विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

एफआईआर के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को उनके व्हाट्सऐप नंबर पर एक वॉयस नोट आया, जिसमें ₹20 करोड़ की माँग की गई। अगले दिन 3 नवंबर को ब्रिटेन के कंट्री कोड वाले एक नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को बिश्नोई गैंग का अनिल पंडित बताते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया और दावा किया कि शकील सैफी के दोनों बेटों की रेकी करवाई जा चुकी है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

आगे क्या होगा जाँच में

गौरतलब है कि यह मामला केवल एक फायरिंग की घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और बहुस्तरीय आपराधिक नेटवर्क की परतें उघाड़ रहा है — जिसमें विदेश में बैठे संचालक, हरियाणा में बैठे फाइनेंसर और मुंबई की सड़कों पर काम करने वाले स्थानीय शूटर शामिल हैं। जाँच एजेंसियाँ अब सुनेहा पंडित द्वारा ट्रांसफर की गई कुल रकम, अभिषेक पंडित के ठिकाने और क्रिप्टो-हवाला नेटवर्क के तार तलाशने में जुटी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें संगठित अपराध ने ढाल बना लिया। यह पहली बार नहीं है जब गैंग-फाइनेंसिंग ने आम नागरिकों को अनजाने में अपराध की जंजीर में फंसाया हो — लेकिन UPI के इस पैमाने पर दुरुपयोग कानून प्रवर्तन और फिनटेक नियामकों दोनों के लिए नई चुनौती है। असली सवाल यह है कि जब विदेश में बैठे संचालक, हवाला नेटवर्क और क्रिप्टो वॉलेट एक साथ काम कर रहे हों, तो क्या मौजूदा फोरेंसिक ढाँचा इस बहुस्तरीय ट्रेल को समय रहते तोड़ने में सक्षम है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बिश्नोई गैंग ने पैसे कैसे पहुँचाए?
जाँच के अनुसार, गैंग ने रिक्शाचालकों और दुकानदारों को कमीशन का लालच देकर उनके UPI क्यूआर कोड हासिल किए और हरियाणा के करनाल से उन खातों में रकम ट्रांसफर करवाई। मुंबई में मौजूद शूटर फिर कमीशन काटकर बाकी रकम नकद ले लेते थे।
इस मनी ट्रेल में अनिल पंडित की क्या भूमिका है?
मुंबई क्राइम ब्रांच के अनुसार, कथित तौर पर विदेश में बैठा अनिल पंडित मुंबई के शूटरों को निर्देश देता था और QR कोड की तस्वीरें अपने भाई अभिषेक पंडित तक पहुँचाता था। आरोप है कि अभिषेक की पत्नी सुनेहा पंडित इन कोड को स्कैन कर करनाल से रकम ट्रांसफर करती थी।
अभिषेक पंडित पर क्या आरोप हैं और वह कहाँ है?
अभिषेक पंडित फिलहाल वांछित है और खुफिया एजेंसियों को संदेह है कि वह विदेश में छिपा हुआ है। उस पर क्रिप्टो वॉलेट और हवाला नेटवर्क के ज़रिए गैंग का वित्तीय संचालन करने का आरोप है और हरियाणा में उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
दिल्ली में ₹20 करोड़ रंगदारी का मामला क्या है?
दिल्ली के निहाल विहार स्थित सैफी अस्पताल के मालिक शकील सैफी ने शिकायत दर्ज कराई है कि 2 नवंबर 2026 को उन्हें व्हाट्सऐप वॉयस नोट और 3 नवंबर को ब्रिटेन के नंबर से कॉल कर ₹20 करोड़ की माँग की गई। कॉल करने वाले ने खुद को बिश्नोई गैंग का अनिल पंडित बताया और परिवार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया।
क्या रिक्शाचालक और दुकानदार इस मामले में अभियुक्त हैं?
जाँच में अभी तक यही सामने आया है कि आम नागरिकों को कमीशन का लालच देकर उनके खातों का दुरुपयोग किया गया — उन्हें पूरी साजिश की जानकारी नहीं थी। क्राइम ब्रांच की जाँच मुख्य रूप से गैंग के संचालकों और शूटरों पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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