टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: बिश्नोई गैंग ने रिक्शाचालकों-दुकानदारों के UPI खातों से शूटरों को फंड किया
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई क्राइम ब्रांच ने टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग की जाँच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के वित्तीय नेटवर्क से जुड़ा एक अहम खुलासा किया है। जाँच के अनुसार, गैंग ने मुंबई में तैनात शूटरों तक रकम पहुँचाने के लिए स्थानीय ऑटो-रिक्शा चालकों और छोटे दुकानदारों के बैंक खातों और यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया। यह तरीका न केवल पैसों की ट्रेल छिपाने के लिए बनाया गया था, बल्कि जाँच एजेंसियों को गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश का हिस्सा भी था।
कैसे काम करता था यह वित्तीय नेटवर्क
क्राइम ब्रांच की जाँच में सामने आया है कि शूटर पहले रिक्शा चालकों और दुकानदारों से थोड़े कमीशन का लालच देकर उनके यूपीआई क्यूआर कोड हासिल करते थे। इन कोड की तस्वीरें कथित तौर पर विदेश में बैठे गैंग के मुख्य गुर्गे अनिल पंडित को भेजी जाती थीं। अनिल ये तस्वीरें अपने छोटे भाई अभिषेक पंडित तक पहुँचाता था, जिसके निर्देश पर उसकी पत्नी सुनेहा पंडित हरियाणा के करनाल से इन क्यूआर कोड को स्कैन कर रकम ट्रांसफर करती थी।
रकम खाते में आने के बाद मुंबई में मौजूद शूटर संबंधित व्यक्ति को कमीशन देकर बाकी रकम नकद निकाल लेते थे। इस प्रक्रिया में हरियाणा से मुंबई तक पैसों की आवाजाही पूरी तरह आम नागरिकों के खातों की आड़ में होती थी।
वारदात से पहले रेकी में भी हुआ खातों का दुरुपयोग
क्राइम ब्रांच के अनुसार, वारदात से पहले रेकी के दौरान शूटरों ने मुंबई में आवाजाही के लिए ऑटो-रिक्शा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। किराया और रोज़मर्रा के खर्च के बहाने चालकों को बताया जाता था कि उनका कोई दोस्त या रिश्तेदार सीधे खाते में पैसे भेज देगा।
इसी तरह होटल, ढाबों और दुकानों पर भी यह तरीका अपनाया गया। जाँच के दौरान एक दुकानदार के क्यूआर कोड पर ₹1,510 ट्रांसफर किए जाने का मामला सामने आया — जिसमें दुकानदार को मात्र ₹10 का कमीशन दिया गया और बाकी ₹1,500 नकद ले लिए गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गैंग ने वित्तीय लेनदेन के सीधे सुराग से बचने के लिए आम लोगों के खातों का इस्तेमाल किया।
अभियुक्तों की भूमिका और मनी ट्रेल
क्राइम ब्रांच के अनुसार, शूटर फूल सिंह, रेहान और ऋतिक को कथित तौर पर अनिल पंडित लगातार निर्देश देता था। अनिल पंडित फिलहाल विदेश में बताया जाता है। उसका छोटा भाई अभिषेक पंडित भी फिलहाल वांछित है और खुफिया एजेंसियों को शक है कि वह भी विदेश में छिपा हुआ है। उस पर क्रिप्टो वॉलेट और हवाला नेटवर्क के ज़रिए गैंग के वित्तीय लेनदेन संचालित करने का आरोप है। हरियाणा में उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
डिजिटल फोरेंसिक और तकनीकी निगरानी की मदद से क्राइम ब्रांच ने इस मनी ट्रेल की कई कड़ियों का पता लगाया है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुनेहा पंडित ने कुल कितनी रकम शूटरों और साजिश में शामिल अन्य अभियुक्तों तक पहुँचाई।
दिल्ली अस्पताल संचालक से ₹20 करोड़ रंगदारी का मामला
इसी बीच, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर दिल्ली में एक अस्पताल संचालक से ₹20 करोड़ की रंगदारी मांगने का मामला भी सामने आया है। शिकायतकर्ता शकील सैफी, जो निहाल विहार स्थित सैफी अस्पताल के मालिक हैं, ने दिल्ली के निहाल विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
एफआईआर के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को उनके व्हाट्सऐप नंबर पर एक वॉयस नोट आया, जिसमें ₹20 करोड़ की माँग की गई। अगले दिन 3 नवंबर को ब्रिटेन के कंट्री कोड वाले एक नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को बिश्नोई गैंग का अनिल पंडित बताते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया और दावा किया कि शकील सैफी के दोनों बेटों की रेकी करवाई जा चुकी है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।
आगे क्या होगा जाँच में
गौरतलब है कि यह मामला केवल एक फायरिंग की घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और बहुस्तरीय आपराधिक नेटवर्क की परतें उघाड़ रहा है — जिसमें विदेश में बैठे संचालक, हरियाणा में बैठे फाइनेंसर और मुंबई की सड़कों पर काम करने वाले स्थानीय शूटर शामिल हैं। जाँच एजेंसियाँ अब सुनेहा पंडित द्वारा ट्रांसफर की गई कुल रकम, अभिषेक पंडित के ठिकाने और क्रिप्टो-हवाला नेटवर्क के तार तलाशने में जुटी हैं।