टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: मकोका कोर्ट में 11 आरोपी पेश, क्राइम ब्रांच ने माँगी 10 दिन की कस्टडी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई की विशेष मकोका अदालत में 29 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले के 11 आरोपियों को पेश किया गया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने अदालत से 10 दिनों की पुलिस कस्टडी की माँग की, यह कहते हुए कि जाँच के दौरान डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों के बीच हुई वॉइस चैट बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर एक संगठित टीम के रूप में काम कर रहे थे।
मकोका की धाराएँ और मुख्य आरोपी
क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि सभी 11 आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धाराएँ लगाई गई हैं। पुलिस के मुताबिक, इस मामले का कथित मुख्य गैंग लीडर अनिल पंडित है, जो फिलहाल फरार है। जाँच एजेंसी का दावा है कि उसी के निर्देश पर वारदात को अंजाम दिया गया।
गौरतलब है कि मकोका एक कड़ा कानून है जो संगठित अपराध से जुड़े मामलों में लागू होता है और इसके तहत जमानत मिलना अत्यंत कठिन होता है।
हथियारों के स्रोत और डिजिटल साक्ष्य
पुलिस ने 10 दिनों की कस्टडी की माँग करते हुए अदालत को बताया कि बरामद हथियारों में से एक हथियार विदेशी मूल का होने की बात सामने आई है। क्राइम ब्रांच आरोपियों से हथियारों के स्रोत और ज़मीनी स्तर पर उन्हें मदद पहुँचाने वाले व्यक्तियों की पहचान करना चाहती है।
जाँच एजेंसी के अनुसार, आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए सिग्नल जैसे विदेशी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर एक-दूसरे से संपर्क करते थे। क्राइम ब्रांच ने इन डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों के वॉइस सैंपल रिकॉर्ड करने की अनुमति भी अदालत से माँगी।
बचाव पक्ष की दलीलें
आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने पुलिस कस्टडी की माँग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस पहले ही हथियार बरामद कर चुकी है और आरोपियों के बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी अन्य माध्यमों से हासिल की जा सकती है। इसलिए, आरोपियों को पुलिस हिरासत में रखने के बजाय न्यायिक हिरासत में भेजा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान आरोपी नंबर नौ समीर की स्वास्थ्य स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया। बचाव पक्ष ने बताया कि समीर की केवल एक किडनी काम कर रही है और उसकी मेडिकल रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई।
अदालत में भाषा पर टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत में एक दिलचस्प वाकया भी हुआ। जज ने आरोपियों से पूछा कि क्या उन्हें मराठी आती है, तो आरोपियों ने जवाब दिया कि उन्हें मराठी नहीं आती। इस पर जज ने हिंदी में टिप्पणी करते हुए कहा कि वे महाराष्ट्र में थे और उन्हें मराठी नहीं आती।
आगे क्या होगा
अदालत ने सुनवाई पूरी सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट किया कि हथियारों के स्रोत, कथित गैंग नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के संबंध में आगे की जाँच के लिए आरोपियों से आमने-सामने बैठकर पूछताछ करना अनिवार्य है। यह मामला मुंबई में संगठित अपराध और बॉलीवुड हस्तियों की सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंताओं की ओर भी ध्यान खींचता है।