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12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: भारत के एक प्रस्ताव को 175 देशों का समर्थन, 90 दिन से भी कम में बनी वैश्विक परंपरा

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12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: भारत के एक प्रस्ताव को 175 देशों का समर्थन, 90 दिन से भी कम में बनी वैश्विक परंपरा

सारांश

भारत का एक प्रस्ताव, 175 देशों का समर्थन और 90 दिनों से भी कम का सफर — यही है 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की असली कहानी। वैश्विक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संकट के इस दौर में योग अब सिर्फ व्यायाम नहीं, एक वैश्विक जीवन-दर्शन है।

मुख्य बातें

21 जून 2026 को विश्व भर में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में इस दिवस का प्रस्ताव रखा।
11 दिसंबर 2014 को यूएन महासभा ने प्रस्ताव पारित कर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया।
प्रस्ताव को 175 सदस्य देशों का समर्थन मिला — यूएन महासभा के किसी प्रस्ताव के लिए अब तक की सबसे बड़ी संख्या।
प्रस्ताव से मान्यता तक का सफर 90 दिनों से भी कम में पूरा हुआ — यूएन इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि।
योग की उत्पत्ति 5,000 वर्ष पुरानी भारतीय शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पद्धति से हुई है।

21 जून 2026 को दुनिया भर में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। वैश्विक तनाव, सशस्त्र संघर्षों और बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच योग की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक गहरी हो गई है। यह दिवस महज एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक यात्रा का प्रमाण है जो नई दिल्ली से शुरू होकर संयुक्त राष्ट्र महासभा तक पहुँची और 90 दिनों से भी कम समय में वैश्विक मान्यता पा गई।

योग की जड़ें और वैश्विक विस्तार

'योग' शब्द संस्कृत भाषा से आया है, जिसका अर्थ है 'जोड़ना' या 'एकत्र होना'। इसका मूल भाव शरीर और चेतना को एकीकृत करना है — मनुष्य को स्वयं से, प्रकृति से और समूचे विश्व से जोड़ना। 5,000 वर्ष पुरानी इस भारतीय शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पद्धति की जड़ें प्राचीन भारतीय ग्रंथों में मिलती हैं।

विश्व के सर्वाधिक प्रभावशाली योग गुरुओं में से एक बीकेएस अयंगर के अनुसार, 'योग रोज़मर्रा की जिंदगी में संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने के तरीके विकसित करता है और व्यक्ति को अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक करने की क्षमता प्रदान करता है।' यह परिभाषा योग को केवल व्यायाम की श्रेणी से ऊपर उठाती है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की ऐतिहासिक पहल

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की नींव सितंबर 2014 में रखी गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र के उद्घाटन संबोधन में इसका प्रस्ताव रखा। मोदी ने अपने भाषण में कहा, 'योग हमारी पुरातन पारंपरिक अमूल्य देन है। योग मन व शरीर, विचार व कर्म, संयम व उपलब्धि की एकात्मकता का और मानव व प्रकृति के बीच सामंजस्य का मूर्त रूप है। यह स्वास्थ्य व कल्याण का समग्र दृष्टिकोण है।'

यूएन में भारत के तत्कालीन राजदूत अशोक मुखर्जी ने महासभा में औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 11 दिसंबर 2014 को महासभा ने यह प्रस्ताव पारित कर 21 जून को प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया।

रिकॉर्ड समर्थन और ऐतिहासिक उपलब्धि

इस प्रस्ताव को 175 सदस्य देशों ने सह-प्रायोजक के रूप में समर्थन दिया — जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के किसी भी प्रस्ताव के लिए अब तक की सबसे बड़ी संख्या थी। गौरतलब है कि यह पहली बार था जब किसी देश ने यूएन में 90 दिनों से भी कम समय में किसी ऐसी पहल का प्रस्ताव रखा और उसे लागू भी करवाया। यह तथ्य अपने आप में भारत की कूटनीतिक क्षमता और योग की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

पश्चिम से पूर्व तक: बदलती धारणा

एक-दो दशक पहले तक पश्चिमी देश योग को मुख्यतः शरीर को सुडौल बनाने वाली शारीरिक कसरत मानते थे। भारत के प्रमुख योग संस्थानों और शिक्षकों की निरंतर कोशिशों से यह धारणा बदली। शोध और अनुभव ने दर्शाया कि योग कई बीमारियों से लड़ने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने और शांतिपूर्ण जीवन जीने में सहायक है।

आज की प्रासंगिकता

आज जब दुनिया युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रही है, तब योग एक जीवन-पद्धति के रूप में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया भर में करोड़ों लोग प्रतिवर्ष 21 जून को सामूहिक योग आयोजनों में हिस्सा लेते हैं — यह सिलसिला 2015 में पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से शुरू हुआ और अब एक सुदृढ़ वैश्विक परंपरा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या योग की मूल आध्यात्मिक और समग्र स्वास्थ्य परंपरा को भी वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। पश्चिमी देशों में योग के व्यावसायीकरण ने इसे अक्सर उसकी गहरी जड़ों से काट दिया है। भारत के लिए यह अवसर है कि वह महज आयोजनों से आगे बढ़कर योग की प्रामाणिक विरासत को वैश्विक स्वास्थ्य नीति से जोड़े।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। 11 दिसंबर 2014 को यूएन महासभा ने यह प्रस्ताव पारित किया और 2015 से हर साल 21 जून को यह दिवस मनाया जाने लगा।
21 जून को ही योग दिवस क्यों मनाया जाता है?
21 जून उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति कहते हैं। यह तिथि कई संस्कृतियों में विशेष महत्व रखती है और भारतीय परंपरा में भी इसका आध्यात्मिक महत्व है, इसीलिए इसे योग दिवस के लिए चुना गया।
175 देशों का समर्थन क्यों महत्वपूर्ण है?
यूएन महासभा के किसी भी प्रस्ताव के लिए 175 सह-प्रायोजक देश अब तक की सबसे बड़ी संख्या थी। यह आँकड़ा योग की वैश्विक स्वीकार्यता और भारत की कूटनीतिक पहुँच दोनों को दर्शाता है।
योग का 5,000 साल पुराना इतिहास क्या है?
योग की उत्पत्ति भारत की प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक परंपरा में हुई, जिसकी जड़ें वेदों और उपनिषदों जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलती हैं। इसका मूल उद्देश्य मन, शरीर और आत्मा में सामंजस्य स्थापित करना है।
12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का क्या महत्व है?
वैश्विक तनाव, युद्ध और मानसिक स्वास्थ्य संकट के मौजूदा दौर में 12वां योग दिवस विशेष रूप से प्रासंगिक है। यह दिवस याद दिलाता है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन-पद्धति है जो दुनिया भर के करोड़ों लोगों को जोड़ती है।
राष्ट्र प्रेस
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