30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शक्ति के बिना कुछ संभव नहीं — भारतदुर्गा मंदिर शिलान्यास पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शक्ति के बिना कुछ संभव नहीं — भारतदुर्गा मंदिर शिलान्यास पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

सारांश

नागपुर में भारतदुर्गा मंदिर शिलान्यास पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा — शक्ति के बिना सत्य भी नहीं चलता। भारत को पश्चिमी मानसिकता छोड़कर स्वयं को भारत बनाना होगा। राम मंदिर के बाद यह दूसरा बड़ा सांस्कृतिक संकल्प है।

मुख्य बातें

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 24 अप्रैल 2025 को नागपुर में भारतदुर्गा मंदिर के शिलान्यास समारोह को संबोधित किया।
भागवत ने कहा — शक्ति के बिना कुछ नहीं होता , सत्य को भी दुनिया में स्थापित करने के लिए शक्ति जरूरी है।
डेढ़ सौ वर्षों की अंग्रेजी दासता ने भारतीय मन पर पश्चिमी सोच की परत चढ़ाई है जिसे उतारना जरूरी है।
दुर्गा की पूजा केवल पुजारियों तक सीमित नहीं — हर भारतवासी को अपने आचरण से यह पूजा करनी होगी।
राम मंदिर का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि भारत विश्व गुरु बनेगा — इस पर दुविधा नहीं, संकल्प चाहिए।
यह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (जनवरी 2024) के बाद दूसरा बड़ा मंदिर शिलान्यास है जिसमें भागवत की केंद्रीय भूमिका रही।

नागपुर, 24 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित भारतदुर्गा मंदिर के शिलान्यास समारोह में स्पष्ट संदेश दिया कि शक्ति के बिना न सत्य टिकता है और न राष्ट्र। उन्होंने कहा कि भारत को सच्चे अर्थों में दुर्गा की पूजा करनी है तो पहले स्वयं को भारत बनाना होगा — भारत को जानना, पहचानना और मानना होगा।

शक्ति और सत्य का अटूट संबंध

मोहन भागवत ने समारोह में कहा कि शक्ति के बिना कुछ भी संभव नहीं होता। सत्य को भी इस संसार में स्थापित करने के लिए शक्ति का सहारा लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहाँ सत्य को उसके मूल स्वरूप में ग्रहण करने की परंपरा रही है, इसलिए यहाँ शक्ति की अनिवार्यता भले कम रही हो, लेकिन शेष विश्व आज भी 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' के सिद्धांत पर चलता है।

भागवत का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी सामरिक और सांस्कृतिक उपस्थिति को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। राम मंदिर के बाद अब भारतदुर्गा मंदिर जैसे आयोजन सांस्कृतिक पुनर्जागरण की उस श्रृंखला का हिस्सा हैं जिसे संघ परिवार दशकों से आगे बढ़ा रहा है।

मंदिर निर्माण और सामूहिक उत्तरदायित्व

संघ प्रमुख ने कहा कि भारतदुर्गा मंदिर का निर्माण होगा और उसकी व्यवस्था भी सुचारु रूप से बनेगी। मंदिर में प्रतिदिन विधिवत पूजा-अर्चना होगी और वे स्वयं भी समय-समय पर यहाँ आते रहेंगे। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि दुर्गा की पूजा केवल पुजारियों और व्यवस्थापकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — यह पूजा प्रत्येक भारतवासी को अपने जीवन और आचरण से करनी होगी।

यह वक्तव्य महत्त्वपूर्ण है क्योंकि संघ का दर्शन हमेशा से व्यक्तिगत चरित्र निर्माण को सामूहिक राष्ट्र निर्माण का आधार मानता आया है। मंदिर को वे केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के केंद्र के रूप में देखते हैं।

पश्चिमी मानसिकता से मुक्ति की पुकार

भागवत ने कहा कि डेढ़ सौ वर्षों की अंग्रेजी दासता ने भारतीयों के मन और बुद्धि पर पश्चिमी विचारों की ऐसी परत चढ़ा दी है जिसे उतारे बिना भारत अपनी आत्मा को नहीं पहचान सकता। उन्होंने आह्वान किया कि रोजमर्रा के आचरण से लेकर राष्ट्रीय नीतियों तक — हर स्तर पर भारतीयों को भारत की दृष्टि से सोचना और जीना होगा।

यह चिंतन उस व्यापक बहस को छूता है जो आज शिक्षा नीति, भाषा नीति और सांस्कृतिक पहचान को लेकर देश में चल रही है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपराओं को प्राथमिकता देना इसी दिशा में एक नीतिगत कदम माना जा रहा है।

भारत विश्व गुरु — संकल्प और दुविधा

संघ प्रमुख ने स्वीकार किया कि आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखकर यह तय करना कठिन लगता है कि भारत विश्व गुरु बनेगा या नहीं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी ऐसी ही दुविधा थी, लेकिन संकल्प और एक-एक कदम की यात्रा ने उसे संभव किया।

उन्होंने कहा कि संतों की घोषणा है — भारत विश्व गुरु बनेगा, जो खो गया है वह वापस आएगा, भारत शक्ति संपन्न और शील संपन्न दोनों बनेगा। इस दुविधा से मुक्त होकर हर नागरिक को अपना दायित्व निभाना होगा।

गौरतलब है कि जनवरी 2024 में अयोध्या राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद यह दूसरा बड़ा मंदिर शिलान्यास है जिसमें मोहन भागवत की केंद्रीय भूमिका रही। यह संघ की उस रणनीति का हिस्सा है जो सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और हिंदू जागरण का संदेश देती है।

आने वाले समय में भारतदुर्गा मंदिर के निर्माण की प्रगति और उससे जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम देश भर में संघ की विस्तारित उपस्थिति का प्रतीक बनेंगे। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनता है या सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन का नया अध्याय।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस भू-राजनीतिक यथार्थ की स्वीकृति है जिसे भारत आज पाकिस्तान और चीन के संदर्भ में जी रहा है। विरोधाभास यह है कि जब भागवत पश्चिमी मानसिकता छोड़ने की बात करते हैं, तो मुख्यधारा की मीडिया इसे केवल धार्मिक बयान मानकर छोड़ देती है — जबकि यह शिक्षा, भाषा और विदेश नीति तक फैला हुआ एक समग्र राष्ट्रीय दर्शन है जिस पर गंभीर बहस होनी चाहिए।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतदुर्गा मंदिर का शिलान्यास कहाँ और कब हुआ?
भारतदुर्गा मंदिर का शिलान्यास 24 अप्रैल 2025 को नागपुर में हुआ। इस समारोह में RSS प्रमुख मोहन भागवत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
मोहन भागवत ने शक्ति और सत्य के बारे में क्या कहा?
मोहन भागवत ने कहा कि शक्ति के बिना कुछ भी नहीं होता — सत्य को भी दुनिया में प्रचलित करने के लिए शक्ति का सहारा लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शेष विश्व 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' के सिद्धांत पर चलता है।
भागवत ने भारत को विश्व गुरु बनाने के बारे में क्या कहा?
संघ प्रमुख ने कहा कि राम मंदिर की तरह भारत के विश्व गुरु बनने पर भी दुविधा नहीं करनी चाहिए। संतों की घोषणा है कि भारत शक्ति संपन्न और शील संपन्न बनेगा — इसके लिए हर नागरिक को एक-एक कदम बढ़ाना होगा।
RSS का भारतदुर्गा मंदिर से क्या संबंध है?
भारतदुर्गा मंदिर नागपुर में स्थापित हो रहा है, जो RSS का मुख्यालय शहर है। मोहन भागवत ने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि यहाँ प्रतिदिन विधिवत पूजा होगी और वे स्वयं भी आते रहेंगे।
भागवत ने पश्चिमी मानसिकता पर क्या टिप्पणी की?
मोहन भागवत ने कहा कि डेढ़ सौ साल की अंग्रेजी दासता ने भारतीयों के मन और बुद्धि पर पश्चिमी विचारों की परत चढ़ा दी है। उन्होंने आह्वान किया कि इसे उतारकर रोजमर्रा के जीवन से लेकर राष्ट्रीय विचार तक — सब कुछ भारतीय दृष्टि से करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले