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भारतमाला परियोजना: गुजरात में ₹65,000 करोड़ से 1,068 किमी आधुनिक सड़कें, मोदी के 12 वर्षों की उपलब्धि

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भारतमाला परियोजना: गुजरात में ₹65,000 करोड़ से 1,068 किमी आधुनिक सड़कें, मोदी के 12 वर्षों की उपलब्धि

सारांश

मोदी के 12 वर्षों में भारतमाला परियोजना के तहत गुजरात में ₹65,000 करोड़ से 1,068 किमी आधुनिक सड़कें बनीं। मुंद्रा-कंडला जैसे बंदरगाहों से उद्योगों की कनेक्टिविटी मजबूत हुई और लॉजिस्टिक्स लागत घटी — यह 'विकसित भारत 2047' की नींव का अहम हिस्सा है।

मुख्य बातें

भारतमाला परियोजना के तहत गुजरात में ₹65,000 करोड़ की लागत से 45 प्रोजेक्ट ( 1,557 किमी ) स्वीकृत; 1,068 किमी निर्माण पूर्ण।
परियोजना वर्ष 2017 में शुरू हुई; लक्ष्य — देशभर में 50 आर्थिक कॉरिडोर और 550 जिलों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ना।
राजस्थान के सांचौर से गुजरात के सांतलपुर तक 125 किमी का 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्मित।
अमृतसर-जामनगर के बीच 1,256 किमी के आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण प्रस्तावित।
मुंद्रा , कंडला , हजीरा बंदरगाहों की औद्योगिक केंद्रों से कनेक्टिविटी मजबूत; लॉजिस्टिक्स लागत में कमी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में NHAI के साथ समन्वय से परियोजनाएँ समय पर पूर्ण।

भारतमाला परियोजना के तहत गुजरात में ₹65,000 करोड़ की लागत से 1,557 किलोमीटर के 45 सड़क प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 1,068 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 26 मई 2014 को पदभार संभालने के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह उपलब्धि राज्य के सड़क अवसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने जो सड़क आधुनिकीकरण का अभियान शुरू किया था, वह अब राष्ट्रीय स्तर पर भारतमाला के रूप में साकार हो रहा है।

भारतमाला परियोजना: उद्देश्य और दायरा

वर्ष 2017 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई भारतमाला परियोजना देशभर में राजमार्ग विकास की एक व्यापक योजना है। इसका मुख्य लक्ष्य कार्गो आवाजाही को सुगम बनाना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना और आर्थिक कॉरिडोर, सीमावर्ती सड़कों, समुद्र तटीय मार्गों तथा एक्सप्रेसवे के जरिए देशभर में कनेक्टिविटी बढ़ाना है। इस परियोजना के अंतर्गत देशभर में 50 आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने, 550 जिलों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने तथा सड़क यात्रा के औसत समय में उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

यह परियोजना उत्तरी राज्यों को पूर्वी क्षेत्रों से जोड़ने के साथ-साथ जामनगर, कंडला और मुंद्रा जैसे बंदरगाहों के माध्यम से उत्तरी राज्यों को वैश्विक आयात-निर्यात सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है।

गुजरात की रणनीतिक भूमिका

1,600 किलोमीटर से अधिक के समुद्र तट, प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर और मुंद्रा, कंडला तथा हजीरा जैसे बड़े बंदरगाहों के कारण भारतमाला परियोजना में गुजरात को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल किया गया। विकसित सड़क नेटवर्क ने इन बंदरगाहों को राज्य के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से अधिक तेज और कुशल तरीके से जोड़ा है। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे औद्योगिक केंद्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि गुजरात भारत के सबसे व्यस्त फ्रेट कॉरिडोरों में से एक है। बेहतर और यातायात-मुक्त परिवहन के चलते लॉजिस्टिक्स खर्च में भी कमी आई है, जिससे स्थानीय उद्योगों और व्यवसायों को सीधा लाभ मिला है।

प्रमुख परियोजनाएँ और उपलब्धियाँ

भारतमाला के अंतर्गत गुजरात में कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएँ साकार हुई हैं। राजस्थान के सांचौर से गुजरात के पाटण जिले के सांतलपुर तक 125 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्मित किया गया है। इसके अतिरिक्त, अमृतसर-जामनगर के बीच 1,256 किलोमीटर के आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण प्रस्तावित है।

अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे तथा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भी इस परियोजना के अहम मार्ग हैं, जो राज्य के आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं। समुद्र तट और बंदरगाहों को जोड़ने वाले सड़क मार्गों पर विशेष ध्यान देने से बंदरगाह-राजमार्ग कनेक्टिविटी और मजबूत हुई है।

राज्य सरकार की भूमिका और रोज़गार

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण में तेजी, समय पर अनुमोदन और परियोजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया है। इसी समन्वय के कारण गुजरात में भारतमाला के कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो सके हैं।

राजमार्ग निर्माण से निर्माण, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में रोज़गार के अवसर भी उत्पन्न हुए हैं। स्थानीय व्यवसायों को बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिला है, जिससे सुदूर क्षेत्रों तक विकास की पहुँच संभव हुई है।

विकसित भारत 2047 का आधार

भारत जब वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, तब भारतमाला परियोजना उस दिशा में एक ठोस अवसंरचनात्मक आधार प्रदान कर रही है। आने वाले वर्षों में शेष स्वीकृत परियोजनाओं के पूर्ण होने के साथ गुजरात की लॉजिस्टिक्स दक्षता और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता में और वृद्धि अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि लॉजिस्टिक्स लागत में वास्तविक कितनी कमी आई और क्या इसका लाभ छोटे उद्यमों तक पहुँचा। गुजरात की बंदरगाह-राजमार्ग कनेक्टिविटी निस्संदेह मजबूत हुई है, पर 1,557 किमी में से अभी भी लगभग 489 किमी का कार्य बाकी है — क्रियान्वयन की गति पर नज़र रखना ज़रूरी है। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए सड़क अवसंरचना ज़रूरी शर्त है, पर पर्याप्त नहीं — रोज़गार सृजन के दावों को स्वतंत्र सत्यापन की दरकार है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतमाला परियोजना क्या है और इसका गुजरात से क्या संबंध है?
भारतमाला परियोजना वर्ष 2017 में शुरू की गई केंद्र सरकार की राजमार्ग विकास योजना है, जिसका लक्ष्य देशभर में 50 आर्थिक कॉरिडोर और 550 जिलों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ना है। गुजरात को इसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य माना गया है क्योंकि यहाँ मुंद्रा, कंडला और हजीरा जैसे प्रमुख बंदरगाह हैं।
गुजरात में भारतमाला के तहत अब तक कितना काम पूरा हुआ है?
गुजरात में भारतमाला के प्रथम चरण में ₹65,000 करोड़ की लागत से 1,557 किलोमीटर के 45 प्रोजेक्ट स्वीकृत हैं, जिनमें से 1,068 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्य प्रगति पर है।
अमृतसर-जामनगर आर्थिक कॉरिडोर क्या है?
अमृतसर-जामनगर आर्थिक कॉरिडोर लगभग 1,256 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित मार्ग है, जो पंजाब से गुजरात के जामनगर बंदरगाह तक उत्तरी और पश्चिमी भारत को जोड़ेगा। यह कॉरिडोर व्यापार और लॉजिस्टिक्स को गति देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतमाला परियोजना से गुजरात के उद्योगों को क्या फायदा हुआ है?
अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे औद्योगिक केंद्रों के बीच यात्रा समय में कमी आई है और लॉजिस्टिक्स खर्च घटा है। बंदरगाहों से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण आयात-निर्यात सुगम हुआ है और स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिला है।
गुजरात में भारतमाला परियोजना के क्रियान्वयन में राज्य सरकार की क्या भूमिका है?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार NHAI के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण में तेजी, समय पर अनुमोदन और परियोजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित कर रही है। इसी समन्वय के कारण गुजरात में अवसंरचना निर्माण की गति तेज रही है।
राष्ट्र प्रेस
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