भवानीसागर बांध का जलस्तर 56.59 फीट पर, दो दिनों में 2.21 फीट की बढ़त; ईरोड किसानों को राहत
सारांश
मुख्य बातें
भवानीसागर बांध के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद ईरोड जिले के किसानों को लंबे इंतज़ार के बाद राहत मिली है। 9 अक्टूबर 2026 की शाम 6 बजे तक बांध का जलस्तर 56.59 फीट पर पहुँच गया, जबकि पानी का प्रवाह बढ़कर 3,488 क्यूसेक के करीब हो गया — यह दो दिनों में आई उल्लेखनीय तेज़ी है।
जलस्तर में हुई वृद्धि का विवरण
7 अक्टूबर की शाम 6 बजे बांध का जलस्तर 54.38 फीट था। यह 9 अक्टूबर की शाम 6 बजे तक बढ़कर 56.59 फीट हो गया — अर्थात् महज़ दो दिनों में 2.21 फीट की बढ़त। इसी अवधि में जल प्रवाह भी तेज़ हुआ: 8 अक्टूबर की शाम को यह 2,436 क्यूसेक था, जो 9 अक्टूबर की शाम तक 3,488 क्यूसेक पर पहुँच गया।
पृष्ठभूमि: महीनों की गिरावट के बाद सुधार
गौरतलब है कि भवानीसागर बांध का पूर्ण जलाशय स्तर 105 फीट है, और बांध अभी भी अपने पूर्ण स्तर से काफ़ी नीचे है। कई महीनों तक जलग्रहण क्षेत्र में कम वर्षा के चलते बांध का जलस्तर पहले लगभग 50 फीट तक गिर गया था, जिससे जिले के किसानों में सिंचाई को लेकर गहरी चिंता व्याप्त हो गई थी।
बांध को भवानी नदी से पानी मिलता है, जो नीलगिरि से मेट्टुपालयम होते हुए बहती है। इसके अलावा मोयार नदी से भी जल आपूर्ति होती है, जो गुडालूर पहाड़ियों से थेंगुमराहाड़ा होते हुए जलाशय तक पहुँचती है।
गाद हटाने का काम भी हुआ
जलस्तर में भारी गिरावट के दौरान जलाशय के तल के कुछ हिस्से उजागर हो गए थे, जिससे गाद हटाने का कार्य संभव हो सका। खुले क्षेत्रों से गाद निकालने की अनुमति दे दी गई थी, और किसान तब से यह काम करते रहे हैं — जो एक दीर्घकालिक लाभ है।
सिंचाई पर रोक से जलस्तर को मिला सहारा
इस बीच, प्रशासन ने सिंचाई के लिए बांध से पानी छोड़ना फ़िलहाल बंद कर रखा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा और सिंचाई पर लगाई गई रोक — दोनों के संयुक्त प्रभाव से ही जलाशय के जलस्तर में यह सुधार हो सका है।
किसानों और क्षेत्र पर असर
ईरोड जिले के किसानों ने इस वृद्धि का स्वागत किया है। भवानीसागर बांध जिले का प्रमुख सिंचाई स्रोत है, और महीनों से घटते जलस्तर ने कृषि-चक्र को प्रभावित किया था। अब जलस्तर में सुधार से किसानों की उम्मीदें बढ़ी हैं, हालाँकि जलाशय को पूर्ण क्षमता तक पहुँचने के लिए निरंतर और पर्याप्त जल प्रवाह की आवश्यकता बनी रहेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब कई जिलों में खरीफ़ सीज़न की सिंचाई माँग चरम पर रहती है। बांध का पुनर्भरण जहाँ तत्काल राहत देता है, वहीं दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए जलग्रहण क्षेत्र में और बारिश की प्रतीक्षा बनी हुई है।