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डॉ. बिधान चंद्र रॉय: गांधी-नेहरू के चिकित्सक जिनकी नाड़ी-परीक्षण की अद्भुत शक्ति थी अतुलनीय

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डॉ. बिधान चंद्र रॉय: गांधी-नेहरू के चिकित्सक जिनकी नाड़ी-परीक्षण की अद्भुत शक्ति थी अतुलनीय

सारांश

1 जुलाई को जन्मे और उसी तारीख को दिवंगत हुए डॉ. बिधान चंद्र रॉय — गांधी और नेहरू के निजी चिकित्सक — की स्मृति में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। नाड़ी देखकर रोग बताने की उनकी अद्भुत क्षमता और भारत रत्न से सम्मानित इस महान चिकित्सक-राजनेता की विरासत आज भी अतुलनीय है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को डॉ.
बिधान चंद्र रॉय की स्मृति में मनाया जाता है; इसकी शुरुआत 1991 में भारत सरकार ने की।
रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को पटना में हुआ और निधन भी 1 जुलाई 1962 को — एक अद्भुत ऐतिहासिक संयोग।
वे लंदन में एक साथ एमआरसीपी और एफआरसीएस अर्जित करने वाले पहले भारतीय चिकित्सक थे।
महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी चिकित्सक रहे; नाड़ी और चेहरा देखकर रोग-निदान की विलक्षण क्षमता के लिए प्रसिद्ध।
1948 में पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने; 1961 में भारत रत्न से सम्मानित।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को भारत के महान चिकित्सक, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता डॉ. बिधान चंद्र रॉय की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिवस देश के समस्त चिकित्सकों की निस्वार्थ सेवा और मानवता के प्रति समर्पण को सम्मान देने का अवसर है। 1 जुलाई 1882 को जन्मे और 1 जुलाई 1962 को दिवंगत हुए डॉ. रॉय का जीवन स्वयं में एक ऐतिहासिक संयोग है।

प्रारंभिक जीवन और चिकित्सा शिक्षा

डॉ. बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को पटना में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पटना कॉलेज में प्राप्त की और चिकित्सा की पढ़ाई कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए जब वे लंदन गए, तो सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल में प्रवेश पाने के लिए उन्हें अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा।

अदम्य परिश्रम और दृढ़ संकल्प से उन्होंने एमआरसीपी (MRCP) और एफआरसीएस (FRCS) दोनों प्रतिष्ठित उपाधियाँ एक साथ अर्जित कीं — ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय चिकित्सक थे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की स्थापना में भी उनकी निर्णायक भूमिका रही।

नाड़ी विज्ञान में अद्वितीय दक्षता

डॉ. रॉय की चिकित्सकीय प्रतिभा का सबसे उल्लेखनीय पहलू उनकी नाड़ी-परीक्षण की असाधारण क्षमता थी। जब भी कोई रोगी उनके पास आता, वे केवल उसका चेहरा और नाड़ी देखकर ही रोग की पहचान और उपचार बता देते थे। यह कौशल उन्हें समकालीन चिकित्सकों से सर्वथा अलग करता था।

उनकी इसी असाधारण दक्षता के कारण महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जैसे राष्ट्रीय महापुरुष उन पर पूर्ण विश्वास रखते थे और उनकी चिकित्सकीय सेवाएँ ग्रहण करते थे। गांधीजी के वे निकट सहयोगी और निजी चिकित्सक थे।

स्वतंत्रता संग्राम और राजनीतिक योगदान

भारत लौटने के बाद डॉ. रॉय ने चिकित्सा सेवा के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भागीदारी की। 1931 में वे कलकत्ता के महापौर निर्वाचित हुए। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1948 में वे पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने।

मुख्यमंत्री के रूप में उनके नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहकर अपना संपूर्ण जीवन जनसेवा को समर्पित किया।

भारत रत्न और राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस

1961 में भारत सरकार ने डॉ. रॉय को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया। उनका निधन 1 जुलाई 1962 को हुआ — ठीक उनकी जन्मतिथि के दिन — जो इतिहास का एक अविस्मरणीय संयोग है।

भारत सरकार ने 1991 में यह निर्णय लिया कि प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह दिवस केवल डॉ. रॉय की विरासत को नहीं, बल्कि देश के हर उस चिकित्सक के समर्पण को सलाम करता है जो मानवता की सेवा में अपना जीवन अर्पित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि उनकी असली ऊँचाई उनकी चिकित्सकीय प्रतिभा में थी। एक ऐसे युग में जब आधुनिक नैदानिक उपकरण दुर्लभ थे, नाड़ी-परीक्षण से रोग-निदान की उनकी क्षमता भारतीय चिकित्सा परंपरा और आधुनिक पश्चिमी विज्ञान के अद्वितीय संगम का प्रमाण थी। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस को केवल औपचारिकता न बनाकर यदि उनके जीवन से प्रेरणा ली जाए — विशेषकर जनसेवा को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर रखने की उनकी प्रतिबद्धता — तो यह दिवस सच्चे अर्थों में सार्थक होगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन महान चिकित्सक, स्वतंत्रता सेनानी और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जन्म और पुण्यतिथि है। भारत सरकार ने 1991 में इस दिवस की आधिकारिक घोषणा की।
डॉ. बिधान चंद्र रॉय की नाड़ी विज्ञान में क्या विशेषता थी?
डॉ. रॉय केवल रोगी का चेहरा और नाड़ी देखकर उसके रोग की पहचान और उपचार बता देते थे। यह असाधारण दक्षता उन्हें अपने समकालीन चिकित्सकों से अलग करती थी और इसी कारण महात्मा गांधी तथा प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जैसे महापुरुष उन पर विश्वास रखते थे।
डॉ. बिधान चंद्र रॉय को भारत रत्न कब मिला?
डॉ. बिधान चंद्र रॉय को 1961 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका निधन अगले ही वर्ष 1 जुलाई 1962 को हुआ — ठीक उनकी जन्मतिथि के दिन।
डॉ. रॉय ने लंदन में कौन-सी चिकित्सा उपाधियाँ प्राप्त कीं?
डॉ. रॉय ने लंदन के सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल से एमआरसीपी (MRCP) और एफआरसीएस (FRCS) दोनों उपाधियाँ एक साथ अर्जित कीं। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय चिकित्सक थे।
डॉ. बिधान चंद्र रॉय का राजनीतिक योगदान क्या था?
डॉ. रॉय 1931 में कलकत्ता के महापौर बने और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद 1948 में वे पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने और अपने कार्यकाल में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास किया।
राष्ट्र प्रेस
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