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बिहार के 29 जिलों में बनेंगे हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह, ₹330 करोड़ होंगे खर्च

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बिहार के 29 जिलों में बनेंगे हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह, ₹330 करोड़ होंगे खर्च

सारांश

बिहार में परीक्षा व्यवस्था को स्कूलों-कॉलेजों से अलग करने की दिशा में बड़ा कदम — 29 जिलों में ₹330 करोड़ की लागत से हाईटेक वज्रगृह बनेंगे जहाँ एक साथ 4,000 परीक्षार्थी बैठ सकेंगे और सीसीटीवी निगरानी से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

मुख्य बातें

बिहार सरकार ने 29 जिलों में 29 हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह बनाने को मंजूरी दी।
परियोजना पर ₹330.07 करोड़ खर्च होंगे; प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है।
प्रत्येक चार मंजिला (जी+3) भवन में एक साथ 4,000 परीक्षार्थी बैठ सकेंगे।
पूरी परीक्षा प्रक्रिया 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी , फायर अलार्म और आपदा प्रबंधन व्यवस्था से लैस होगी।
नए भवनों से BPSC सहित विभिन्न आयोगों की परीक्षाओं के लिए शिक्षण संस्थानों पर निर्भरता घटेगी।
पटना के बापू परीक्षा परिसर ( 2023 में उद्घाटित) में 16,600+ परीक्षार्थियों की क्षमता इसी मॉडल का उदाहरण है।

बिहार सरकार ने राज्य के 29 जिलों में 29 बहुउद्देशीय हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह निर्मित करने की योजना को मंजूरी दे दी है, जिस पर ₹330.07 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित परीक्षा सुविधा देना तथा स्कूलों-कॉलेजों में नियमित पठन-पाठन की निरंतरता बनाए रखना है। परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है।

परियोजना का स्वरूप और संरचना

बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के अनुसार, 27 जिलों में 29 स्थानों पर चार मंजिला (जी+3) परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह बनाए जाएंगे। प्रत्येक भवन के लिए एक से डेढ़ एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। हर भवन में एक साथ लगभग 4,000 परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आयोजित की जा सकेगी।

यह परियोजना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश के अनुरूप तैयार की गई है। पूरी परीक्षा प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में संपन्न होगी।

सुविधाएं और तकनीकी ढाँचा

नए परीक्षा भवनों में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी एवं रिकॉर्डिंग, फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं होंगी। वज्रगृह में परीक्षाओं से जुड़ी गोपनीय सामग्री के साथ-साथ निर्वाचन से संबंधित संवेदनशील सामग्री भी सुरक्षित रखी जा सकेगी।

आवश्यकता के अनुसार उत्तर पुस्तिकाओं की बारकोडिंग और स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। परीक्षा समाप्त होने के बाद इन भवनों का उपयोग उत्तर पुस्तिकाओं के सुरक्षित भंडारण और मूल्यांकन केंद्र के रूप में भी होगा।

शिक्षण संस्थानों पर निर्भरता घटेगी

वर्तमान में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार तकनीकी सेवा आयोग और बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग सहित विभिन्न आयोगों की परीक्षाएं विद्यालयों और महाविद्यालयों में होती हैं। इससे शिक्षण संस्थानों की नियमित कक्षाएं बाधित होती हैं।

नए समर्पित भवनों के निर्माण से इस निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। संबंधित विद्यालय या महाविद्यालय इन भवनों का उपयोग अपनी आंतरिक परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए भी कर सकेंगे।

कुम्हरार का बापू परीक्षा परिसर — एक मॉडल

पटना स्थित कुम्हरार के बापू परीक्षा परिसर को आधुनिक परीक्षा व्यवस्था के उदाहरण के रूप में विकसित किया जा चुका है। वर्ष 2023 में उद्घाटित इस पाँच मंजिला परिसर में एक साथ 16,600 से अधिक परीक्षार्थियों के बैठने की क्षमता है, जबकि करीब 3,500 अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा की सुविधा उपलब्ध है।

गौरतलब है कि राज्य में पहले से नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों में परीक्षा भवन-सह-क्षेत्रीय कार्यालय संचालित हैं, जिनका उपयोग ऑनलाइन परीक्षा केंद्र, निःशुल्क कोचिंग और क्षेत्रीय कार्यालय के रूप में हो रहा है। 29 जिलों में नए भवन बनने से समर्पित परीक्षा आधारभूत संरचना का और विस्तार होगा।

आगे की राह

परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। यह कदम बिहार में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता का है — राज्य में बड़े सरकारी निर्माण कार्य अक्सर समयसीमा से आगे खिंचते रहे हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि 29 भवन और प्रति भवन 4,000 परीक्षार्थियों की क्षमता के बावजूद, BPSC जैसी परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार बैठते हैं — यानी स्कूलों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म होने में समय लगेगा। वज्रगृह में निर्वाचन सामग्री भी रखे जाने का प्रावधान बहुउद्देशीय उपयोगिता को बढ़ाता है, पर इससे परीक्षा-केंद्रित प्राथमिकता बनाए रखना प्रशासन के लिए एक चुनौती होगी।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार के 29 जिलों में बनने वाले हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह क्या हैं?
ये राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत बहुउद्देशीय चार मंजिला भवन हैं जो परीक्षाओं के लिए समर्पित रहेंगे। हर भवन में लगभग 4,000 परीक्षार्थी एक साथ परीक्षा दे सकेंगे और वज्रगृह में गोपनीय सामग्री सुरक्षित रखी जाएगी।
इस परियोजना पर कुल कितना खर्च आएगा?
इस परियोजना पर करीब ₹330.07 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है।
इन भवनों से विद्यार्थियों को क्या फायदा होगा?
अभी BPSC, बिहार कर्मचारी चयन आयोग जैसी परीक्षाएं स्कूलों-कॉलेजों में होती हैं, जिससे पढ़ाई बाधित होती है। नए समर्पित भवनों से शिक्षण संस्थानों पर यह निर्भरता घटेगी और विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई में व्यवधान कम होगा।
परीक्षा भवनों में सुरक्षा की क्या व्यवस्था होगी?
भवनों में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी एवं रिकॉर्डिंग, फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था होगी। उत्तर पुस्तिकाओं की बारकोडिंग और स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
बापू परीक्षा परिसर और इन नए भवनों में क्या अंतर है?
पटना के कुम्हरार स्थित बापू परीक्षा परिसर 2023 में उद्घाटित एक पाँच मंजिला केंद्र है जिसमें 16,600 से अधिक परीक्षार्थियों की क्षमता है। नए भवन चार मंजिला होंगे और प्रत्येक में 4,000 परीक्षार्थी बैठ सकेंगे — ये राज्य के 29 जिलों में विकेंद्रीकृत परीक्षा ढाँचा खड़ा करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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