बिहार एआई नीति 2026: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का लक्ष्य, 5 वर्षों में 5 लाख युवाओं को AI प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 22 अक्टूबर 2026 को बिहार एआई नीति 2026 की समीक्षा बैठक में अगले पाँच वर्षों में राज्य के 5 लाख विद्यार्थियों और युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया। इस नीति के तहत बिहार को नई तकनीक, नवाचार और डिजिटल उद्यमिता के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है।
नीति की मुख्य रूपरेखा
बैठक में सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के ज़रिए नीति के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। इनमें निवेश प्रोत्साहन, कौशल विकास और AI के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की योजनाएँ शामिल हैं। सरकार की रणनीति के अनुसार प्रत्येक वर्ष 1 लाख युवाओं को AI प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि पाँच वर्षों में 5 लाख का लक्ष्य पूरा किया जा सके।
निवेश और रोज़गार पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में AI कंपनियों, स्टार्टअप्स और डिजिटल उद्यमों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ रोज़गार सृजन को भी प्राथमिकता दी जाए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के राज्य AI नीतियाँ अपनाकर तकनीकी निवेश में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की होड़ में हैं।
वार्षिक AI महोत्सव की योजना
नीति के तहत अगले पाँच वर्षों तक प्रत्येक वर्ष बिहार में एक बड़े AI कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस मंच के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञों, प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप्स और विद्यार्थियों को एक साथ लाने की परिकल्पना है। बड़े AI मॉडल सहित आधुनिक तकनीकों के विकास और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा।
क्रियान्वयन तंत्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संबंधित विभाग को बिहार एआई नीति 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक विशेष टीम गठित करने और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का निर्देश दिया। बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह एवं संजय कुमार सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आगे का रास्ता
गौरतलब है कि बिहार परंपरागत रूप से तकनीकी निवेश की दौड़ में अन्य राज्यों से पीछे रहा है। यदि यह नीति अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करती है, तो यह राज्य के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है। क्रियान्वयन की गति और निजी क्षेत्र की भागीदारी ही तय करेगी कि बिहार की AI महत्वाकांक्षा कागज़ों से ज़मीन तक कितनी उतर पाती है।