बिहार: जनआशीर्वाद रैली में आचार संहिता उल्लंघन, विधायक अनंत सिंह समेत तीन पर FIR
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में 18 अक्टूबर 2026 को आयोजित जनआशीर्वाद रैली को लेकर मोकामा विधायक अनंत कुमार सिंह, जन सुराज के एमएलसी प्रत्याशी अनुज कुमार और उनके एक सहयोगी के विरुद्ध तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। पुलिस के अनुसार, इस रैली में कथित तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया गया और अनुमति से कहीं अधिक वाहनों का इस्तेमाल हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
बाढ़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO)-1 राम कृष्णा ने सोमवार को बताया कि रैली का आयोजन मोकामा विधायक अनंत कुमार सिंह की ओर से बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में किया गया था। इस रैली में एमएलसी चुनाव के प्रत्याशी अनुज कुमार के पक्ष में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।
पुलिस के अनुसार, काफिले में अनुमत संख्या से कहीं अधिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया गया। कई वाहनों में सायरन और हूटर का प्रयोग भी कथित तौर पर किया जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है।
आरोप: जेसीबी से पुष्पवर्षा और विधि-व्यवस्था पर असर
एसडीपीओ राम कृष्णा के मुताबिक, शहर के विभिन्न स्थानों पर जेसीबी मशीनें लगाकर अनियंत्रित तरीके से पुष्पवर्षा की जा रही थी। इन गतिविधियों से सामान्य विधि-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। गौरतलब है कि एमएलसी चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता के तहत ऐसे आयोजनों पर कड़े प्रतिबंध होते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी उल्लंघनों पर सख्ती बरतने के निर्देश दे रखे हैं और फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें (FST) सक्रिय रूप से निगरानी में तैनात हैं।
कार्रवाई: दो थानों में तीन FIR
प्रतिनियुक्त फ्लाइंग स्क्वॉड टीम (FST) के पदाधिकारियों की ओर से चुनावी नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की गई। बाढ़ थाना और मोकामा थाना में कुल तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इन FIR में विधायक अनंत कुमार सिंह, एमएलसी प्रत्याशी अनुज कुमार और उनके एक सहयोगी को आरोपित किया गया है।
पुलिस का रुख
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में आवश्यक विधि-सम्मत कार्रवाई की जा रही है। एसडीपीओ के अनुसार, रैली के दौरान कथित उल्लंघनों से जुड़े दर्ज मामलों में आगे की कार्रवाई नियमानुसार होगी। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।
आगे क्या
अनंत कुमार सिंह बिहार की राजनीति में एक विवादास्पद लेकिन प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं और यह मामला एमएलसी चुनाव के नतीजों से पहले राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है। जाँच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।