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पूर्णिया में ₹1 लाख के लिए खुद के अपहरण की झूठी कहानी रची, पुलिस ने रातभर की कार्रवाई के बाद किया पर्दाफाश

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पूर्णिया में ₹1 लाख के लिए खुद के अपहरण की झूठी कहानी रची, पुलिस ने रातभर की कार्रवाई के बाद किया पर्दाफाश

सारांश

पैसों की तंगी से परेशान एक युवक ने खुद के अपहरण का नाटक रचा और ₹1 लाख की फिरौती माँगी — पुलिस रातभर दौड़ती रही, सीसीटीवी खंगाले, टीमें तैनात कीं। जब सच सामने आया तो 'पीड़ित' ही आरोपी निकला। पूर्णिया का यह मामला झूठी सूचनाओं से पुलिस तंत्र पर पड़ने वाले बोझ की बड़ी मिसाल है।

मुख्य बातें

पूर्णिया के अमौर थाना क्षेत्र के बागढर गाँव के सबा जफर (26 वर्ष) ने कथित तौर पर खुद के अपहरण की झूठी साजिश रची।
परिजनों से ₹1 लाख वसूलने के मकसद से फिरौती की माँग की झूठी कहानी गढ़ी गई।
बायसी एसडीपीओ जितेंद्र पांडे के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने रातभर सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जाँच के बाद युवक को जलालगढ़ से बरामद किया।
अमौर थाना कांड संख्या 457/26 के तहत अपहरण की साजिश का मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई जारी है।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि झूठी सूचनाएँ देकर आपातकालीन तंत्र को बाधित न करें।

बिहार के पूर्णिया जिले के अमौर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 26 वर्षीय युवक सबा जफर ने कथित तौर पर आर्थिक तंगी से उबरने के लिए अपने ही अपहरण और ₹1 लाख की फिरौती की झूठी साजिश रची। पुलिस ने रातभर टोल प्लाजा और रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी खंगालने के बाद युवक को जलालगढ़ से सकुशल बरामद किया, जहाँ असली सच्चाई उजागर हुई।

मुख्य घटनाक्रम

अमौर थाना क्षेत्र के बागढर गाँव, वार्ड नंबर 11 के निवासी अब्दुल करीम ने पुलिस को सूचना दी कि उनका बेटा सबा जफर घर से अचानक लापता हो गया है। इसके कुछ ही समय बाद कथित अपहरण और ₹1 लाख की फिरौती की माँग की जानकारी सामने आई, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बायसी एसडीपीओ जितेंद्र पांडे के नेतृत्व में तत्काल एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई। वरीय पुलिस अधीक्षक के दिशा-निर्देशों पर यह टीम एक्शन में आई।

पुलिस की कार्रवाई

जाँच टीम ने टोल प्लाजा से लेकर रेलवे स्टेशनों तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। डीआईयू की सहायता से तकनीकी और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर रातभर की मशक्कत के बाद सबा जफर को जलालगढ़ से सकुशल बरामद किया गया।

गौरतलब है कि जिस युवक को बचाने के लिए पुलिस ने रात भर कड़ी मेहनत की, बरामदगी के बाद वही युवक पुलिस के लिए आरोपी बन गया।

राज का खुलासा

बरामदगी के बाद पुलिस के अनुसार, सबा जफर ने स्वयं स्वीकार किया कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ था। कथित तौर पर आर्थिक तंगी के कारण उसे ₹1 लाख की सख्त जरूरत थी और परिजनों से यह रकम हासिल करने के मकसद से उसने खुद के अपहरण और फिरौती की पूरी झूठी कहानी रची थी।

यह ऐसे समय में सामने आया है जब पुलिस संसाधनों पर झूठी सूचनाओं का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिससे वास्तविक आपराधिक मामलों की जाँच प्रभावित होती है।

कानूनी कार्रवाई

अमौर थाना कांड संख्या 457/26 के तहत अपहरण की साजिश रचने को लेकर मामला दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने आम जनता से स्पष्ट अपील की है कि झूठी या भ्रामक सूचनाएँ देकर पुलिस का समय और संसाधन बर्बाद न करें, क्योंकि इससे वास्तविक आपातकालीन मामलों में त्वरित कार्रवाई बाधित होती है।

एसडीपीओ की प्रतिक्रिया

बायसी एसडीपीओ जितेंद्र पांडे ने बताया कि सूचना मिलते ही वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल टीम गठित की गई और पूरी रात छापेमारी कर वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर युवक को बरामद किया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की झूठी सूचनाएँ पुलिस तंत्र पर अनावश्यक दबाव डालती हैं।

आगे इस मामले में न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किए जाने की संभावना है और युवक के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जिसकी कीमत अंततः वास्तविक पीड़ित चुकाते हैं। बिहार में ऐसे मामले जहाँ व्यक्तिगत लाभ के लिए पुलिस मशीनरी को दुरुपयोग किया जाता है, चिंताजनक दर से सामने आ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या मौजूदा कानूनी प्रावधान ऐसे दुरुपयोग के लिए पर्याप्त निरोधक हैं, या इस तरह की साजिशों पर कड़े दंड की जरूरत है ताकि असली आपात स्थितियों में पुलिस की प्रतिक्रिया-क्षमता बनी रहे।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्णिया के इस झूठे अपहरण मामले में क्या हुआ?
बिहार के पूर्णिया जिले के बागढर गाँव के 26 वर्षीय सबा जफर ने कथित तौर पर ₹1 लाख हासिल करने के लिए खुद के अपहरण और फिरौती की झूठी कहानी रची। पुलिस ने रातभर की तकनीकी जाँच के बाद उसे जलालगढ़ से बरामद किया, जहाँ उसने साजिश की बात स्वीकार की।
सबा जफर के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
अमौर थाना कांड संख्या 457/26 के तहत अपहरण की साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है और आगे की विधिक प्रक्रिया जारी है। पुलिस के अनुसार न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किए जाने की भी संभावना है।
पुलिस ने सबा जफर को कैसे खोजा?
बायसी एसडीपीओ जितेंद्र पांडे के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने टोल प्लाजा और रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और डीआईयू की मदद से तकनीकी एवं वैज्ञानिक अनुसंधान किया। रातभर की मशक्कत के बाद युवक को जलालगढ़ से बरामद किया गया।
झूठी अपहरण की सूचना देने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
झूठी सूचना देकर पुलिस को गुमराह करना और अपहरण की साजिश रचना दंडनीय अपराध है। इस मामले में अमौर थाने में कांड दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस ने जनता को आगाह किया है कि ऐसी भ्रामक सूचनाएँ वास्तविक आपातकालीन मामलों में कार्रवाई बाधित करती हैं।
इस घटना का पुलिस तंत्र पर क्या असर पड़ा?
पुलिस को रातभर टोल प्लाजा, रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों की जाँच में संसाधन और समय लगाना पड़ा, जो अन्य वास्तविक मामलों में उपयोग हो सकता था। एसडीपीओ जितेंद्र पांडे ने कहा कि इस तरह की झूठी सूचनाएँ पुलिस तंत्र पर अनावश्यक दबाव डालती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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