पूर्णिया के कार्यपालक अभियंता द्विजेन्द्र मिश्र ₹1.04 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार, आवास से ₹8.36 लाख नकद बरामद
सारांश
मुख्य बातें
बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने 3 सितंबर 2026 को भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बीएसईआईडीसीएल), पूर्णिया के कार्यपालक अभियंता द्विजेन्द्र कुमार मिश्र को ₹1.04 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद उनके आवास की तलाशी में ₹8.36 लाख नकद, एक हुंडई आई-20 कार, सोने-चांदी के आभूषण और करीब ₹1 करोड़ के पारिवारिक निवेश से जुड़े दस्तावेज़ भी बरामद हुए।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
आरोपी को पटना के बेली रोड स्थित नेहरू पथ पर पटना जू के निकट गोल्फ क्लब के गेट के बगल से पकड़ा गया। पुलिस निरीक्षक अणु प्रिया के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक विकाश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में धावादल गठित किया गया था, जिसने यह कार्रवाई अंजाम दी।
शिकायत और सत्यापन
पटना निवासी राम सागर शर्मा ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, उन्होंने बीएसईआईडीसीएल के तहत कटिहार जिले के एक सरकारी विद्यालय में निर्माण कार्य पूरा किया था, जिसके एवज में प्रथम भुगतान के रूप में ₹1,54,19,329 उनके खाते में आए थे। आरोप है कि इसी राशि का 2 प्रतिशत कमीशन माँगते हुए कार्यपालक अभियंता ने कुल ₹3 लाख रिश्वत की माँग की। ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें ₹1.04 लाख रिश्वत माँगने की पुष्टि हुई। इसके बाद निगरानी थाने में कांड संख्या 104/26 दर्ज किया गया।
आवास से बरामदगी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के रूपसपुर स्थित लखन इन्क्लेव आवास की तलाशी ली गई। वहाँ से ₹8.36 लाख नकद, रूपसपुर में एक फ्लैट के दस्तावेज़, करीब ₹1 करोड़ के पारिवारिक निवेश से संबंधित कागज़ात, एक हुंडई आई-20 कार, दो बैंक लॉकर के कागज़ात और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए। आभूषणों का मूल्यांकन अधिकृत एजेंसी से कराया जा रहा है। ब्यूरो ने बताया कि आगे की तलाशी और अनुसंधान जारी है।
आरोपी की पृष्ठभूमि
निगरानी ब्यूरो के अनुसार, द्विजेन्द्र कुमार मिश्र वर्ष 2021 में जल संसाधन विभाग से कार्यपालक अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 2023 से वे एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से शिक्षा विभाग में टेक्नो फैसिलिटी एंड मैनेजमेंट सर्विसेज के तहत बीएसईआईडीसीएल, पूर्णिया में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत थे। पूछताछ के बाद उन्हें निगरानी के विशेष न्यायालय, पटना में पेश किया जाएगा।
बिहार में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान का व्यापक चित्र
यह मामला वर्ष 2026 में निगरानी ब्यूरो का 104वाँ प्राथमिकी मामला है। इनमें 96 ट्रैप मामले शामिल हैं, जिनमें अब तक 96 आरोपियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। इन मामलों में ₹36.13 लाख से अधिक की रिश्वत बरामद हुई है। इसके अतिरिक्त ₹37,000 मूल्य की एक नई वाशिंग मशीन भी जब्त की गई है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में 101 ट्रैप मामले दर्ज हुए थे और ₹37.80 लाख रिश्वत बरामद हुई थी। वर्ष 2026 में औसतन 11.8 ट्रैप मामले प्रतिमाह दर्ज हो रहे हैं, जबकि 2025 में यह औसत 8.4 था — यानी पिछले वर्ष की तुलना में ट्रैप मामलों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह आँकड़ा बताता है कि बिहार में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान तेज़ी से विस्तार पा रहा है।