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बिहार में 2 करोड़ 12 लाख किसान आईडी का लक्ष्य, बाढ़ पीड़ित किसानों को मुआवजे का वादा: मंत्री विजय कुमार सिन्हा

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बिहार में 2 करोड़ 12 लाख किसान आईडी का लक्ष्य, बाढ़ पीड़ित किसानों को मुआवजे का वादा: मंत्री विजय कुमार सिन्हा

सारांश

बिहार सरकार ने एक साथ तीन कृषि मोर्चों पर सक्रियता दिखाई — 2 करोड़ 12 लाख किसान आईडी का लक्ष्य, बाढ़ पीड़ितों को मुआवजे का वादा, और उर्वरक माफिया पर नकेल। मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने संकेत दिया कि डिजिटल पारदर्शिता और सख्त निगरानी से किसान-हितों की रक्षा होगी।

मुख्य बातें

बिहार में एग्रीस्टैक के तहत 2 करोड़ 12 लाख किसान आईडी बनाने का लक्ष्य; अब तक 48 लाख पंजीकरण हो चुके हैं।
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि अभियान की निगरानी मुख्य सचिव स्तर पर होगी; राजस्व विभाग का सहयोग लिया जाएगा।
गोपालगंज सहित बाढ़ प्रभावित जिलों के किसानों को मुआवजा देने के लिए सरकार ने तैयारी का दावा किया।
उर्वरक डीलरों की संभावित हड़ताल को लेकर सरकार ने कंपनियों और होलसेलर के साथ बैठक की; ₹266 का खाद ₹400 में बेचने वाले 'माफिया तत्वों' पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
एग्रीस्टैक से उर्वरक, बीज, सब्सिडी और फसल मूल्य में पूर्ण पारदर्शिता का लक्ष्य।

बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 4 अक्टूबर 2026 को पटना में बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कृषि संबंधी उच्च-स्तरीय बैठक में तीन अहम फैसले लिए गए — किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) बनाने की रफ्तार बढ़ाई जाएगी, बाढ़ से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा, और उर्वरक डीलरों की संभावित हड़ताल की चिंताओं का समाधान किया जाएगा। सरकार के अनुसार, राज्य में कुल 2 करोड़ 12 लाख किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म पर किया जाना है।

एग्रीस्टैक अभियान: अब तक का हाल और आगे की योजना

मंत्री सिन्हा ने बताया कि पहले के कार्यकाल में कृषि विभाग के साथ मिलकर लगभग 48 लाख किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं, लेकिन बीच में अभियान की गति धीमी पड़ गई। उन्होंने कहा, 'एग्रीस्टैक के माध्यम से हमारी डबल इंजन वाली सरकार उर्वरक, बीज, कीटनाशक, सब्सिडी और फसलों के उचित मूल्य जैसे मामलों में किसानों के लिए पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है।'

उन्होंने आगे कहा कि शेष 1 करोड़ 64 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण शीघ्र पूरा करने के लिए राजस्व विभाग का सहयोग लिया जा रहा है और इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी मुख्य सचिव स्तर पर की जा रही है।

उर्वरक डीलरों की हड़ताल की चेतावनी पर सरकार का जवाब

उर्वरक डीलरों की संभावित हड़ताल पर मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईमानदार डीलरों को हड़ताल की कोई जरूरत नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग ₹266 का उर्वरक ₹400 में बेचना चाहते हैं, वही तत्व परेशान हैं। सरकार ने कंपनियों और थोक विक्रेताओं के साथ बैठक कर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत सरकार के नियमों के अनुसार हर कंपनी को होलसेलर या रिटेलर तक सीधे डिलीवरी देनी होगी। मंत्री ने कहा कि 'खाद्य माफिया' की हेराफेरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजे की तैयारी

बाढ़ राहत को लेकर मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्होंने गोपालगंज का दौरा किया और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा, 'सरकार बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारा प्रशासन हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।' गौरतलब है कि बिहार हर वर्ष बाढ़ से भारी कृषि क्षति झेलता है, और समय पर मुआवजे की माँग किसानों की पुरानी शिकायत रही है।

आम किसानों पर असर

एग्रीस्टैक के तहत फार्मर आईडी बनने से बिहार के किसान केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी योजनाओं का सीधा लाभ डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में उर्वरक वितरण की पारदर्शिता और बाढ़ के बाद मुआवजे में देरी दोनों ही मुद्दे किसानों के बीच चर्चा में हैं। यदि 2 करोड़ 12 लाख किसानों का पंजीकरण समयबद्ध तरीके से पूरा हो जाता है, तो यह देश के सबसे बड़े कृषि डिजिटलीकरण अभियानों में से एक होगा।

सरकार का अगला कदम होगा राजस्व विभाग के साथ समन्वय बढ़ाना और जिलावार पंजीकरण लक्ष्य तय करना, ताकि अभियान में फिर से देरी न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि मुख्य सचिव-स्तरीय निगरानी के बावजूद गति कैसे बनाए रखी जाएगी — खासकर तब जब राजस्व विभाग की प्राथमिकताएँ अक्सर बँटी रहती हैं। उर्वरक माफिया पर सरकार की बयानबाजी सशक्त है, लेकिन वास्तविक परिणाम तभी दिखेंगे जब जिला स्तर पर आपूर्ति-श्रृंखला की जवाबदेही तय होगी।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में एग्रीस्टैक के तहत किसान आईडी क्या है?
एग्रीस्टैक केंद्र सरकार की डिजिटल कृषि पहल है जिसके तहत हर किसान को एक विशिष्ट पहचान संख्या (फार्मर आईडी) दी जाती है। इससे सब्सिडी, बीज, उर्वरक और फसल-मूल्य जैसी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुँचाया जा सकता है।
बिहार में कितने किसानों की आईडी बनाने का लक्ष्य है?
बिहार सरकार का लक्ष्य कुल 2 करोड़ 12 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाना है। अब तक लगभग 48 लाख पंजीकरण हो चुके हैं और शेष के लिए अभियान में तेजी लाई जा रही है।
बिहार में बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा?
मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार सरकार बाढ़ से हुए कृषि नुकसान की भरपाई के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने गोपालगंज का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
उर्वरक डीलरों की हड़ताल पर बिहार सरकार का क्या रुख है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार उर्वरक डीलरों को हड़ताल करने की जरूरत नहीं। जो डीलर ₹266 का उर्वरक ₹400 में बेचना चाहते हैं, उन्हें 'खाद्य माफिया' बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एग्रीस्टैक से बिहार के किसानों को क्या फायदा होगा?
एग्रीस्टैक के माध्यम से किसानों को उर्वरक, बीज, कीटनाशक, सब्सिडी और फसल के उचित मूल्य में पूर्ण पारदर्शिता मिलेगी। डिजिटल पंजीकरण से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों को मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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