बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती: पटना में उम्मीदवारों का हंगामा, 1,200 खाली महिला कोटा पदों को पुरुष अभ्यर्थियों से भरने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती प्रक्रिया में महिला कोटे के 1,200 से अधिक पद खाली रहने के विरोध में उम्मीदवारों ने 9 अक्टूबर 2026 को पटना में प्रदर्शन तेज कर दिया। अभ्यर्थियों की मांग है कि इन रिक्त पदों को संबंधित श्रेणियों के योग्य पुरुष उम्मीदवारों से भरा जाए। मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने की योजना बनाई गई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया।
मुख्य घटनाक्रम
उम्मीदवारों के अनुसार, प्रदर्शन का कार्यक्रम सुबह 11 बजे गांधी मैदान में धरने से शुरू होना था, जिसके बाद कलश यात्रा और गेट नंबर 10 से डाक बंगला क्रॉसिंग तक मार्च निकाला जाना था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्हें शांतिपूर्ण धरना, कलश यात्रा और मार्च की पूर्व अनुमति मिली थी, लेकिन प्रशासन ने उन्हें तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ने से रोक दिया।
प्रशासन ने गेट नंबर 10 पर बैरिकेड्स लगाए और गांधी मैदान व आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए। सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बावजूद उम्मीदवार गेट नंबर 10 के पास एकत्रित होते रहे।
उम्मीदवारों की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि ड्राइवर भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं के लिए आरक्षित 1,200 से अधिक पद अभी रिक्त पड़े हैं। उनकी माँग है कि लागू भर्ती नियमों के अनुसार संबंधित श्रेणियों के योग्य पुरुष उम्मीदवारों से इन खाली पदों को भरा जाए, ताकि सरकारी पद रिक्त न रहें और अन्य योग्य आवेदकों को रोजगार के अवसर मिल सकें।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी राधे श्याम कुमार ने बताया कि वे और उनके साथी कई दिनों से गर्दनीबाग में धरना दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रखने में पारिवारिक दबाव भी झेलना पड़ रहा है — परिवार के सदस्य सवाल उठाते हैं कि पढ़ाई छोड़कर विरोध प्रदर्शन में समय क्यों लगाया जाए। उन्होंने कहा, 'अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए उम्मीदवारों को अपनी आवाज उठानी होगी।'
सब-इंस्पेक्टर भर्ती की मिसाल
उम्मीदवारों ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उस भर्ती में जो प्रावधान अपनाए गए, वैसे ही प्रावधान ड्राइवर भर्ती अभियान के लिए भी लागू किए जाने चाहिए। उनके अनुसार, महिला उम्मीदवारों को सीटें आवंटित करने के बाद जो पद खाली बचते हैं, उन्हें पुरुष आवेदकों के लिए उपलब्ध माना जाना चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस बैरिकेड्स और बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री आवास तक पहुँचने से रोके रखा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण था।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विभिन्न सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ रहा है। गौरतलब है कि महिला आरक्षण के खाली पदों को पुरुष उम्मीदवारों से भरे जाने का मुद्दा अन्य राज्यों की भर्तियों में भी विवाद का विषय रहा है। उम्मीदवारों ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी माँगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।