5 अक्टूबर 2026
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पटना में दारोगा अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन, BPSSC की मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की माँग

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पटना में दारोगा अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन, BPSSC की मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की माँग

सारांश

बिहार में दारोगा के 1,799 पदों की मुख्य परीक्षा रद्द होने से नाराज़ अभ्यर्थी सात दिनों के धरने के बाद पटना की सड़कों पर उतरे। मुख्यमंत्री आवास कूच की कोशिश में पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। माँग है — परिणाम मान्य हो, दोषियों पर कार्रवाई हो।

मुख्य बातें

5 अक्टूबर 2026 को पटना के जेपी गोलंबर पर दारोगा अभ्यर्थियों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया।
BPSSC ने परीक्षा में अनियमितता के आरोपों के बाद दारोगा मुख्य परीक्षा रद्द कर दी थी, जो 1,799 पदों के लिए आयोजित थी।
अभ्यर्थी सात दिनों से गर्दनीबाग में धरने पर बैठे हैं; ठोस सुनवाई न होने पर सड़क पर उतरे।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच की कोशिश की; पुलिस ने मौर्य लोक पर बैरिकेडिंग कर रोका।
अभ्यर्थियों की माँग — परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लिया जाए और घोषित परिणाम को मान्यता दी जाए।

पटना में 5 अक्टूबर 2026 को दारोगा अभ्यर्थियों ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी घोषित परिणाम को मान्य करने और परीक्षा रद्द करने के निर्णय को वापस लेने की माँग लेकर जेपी गोलंबर के निकट बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।

मुख्य घटनाक्रम

अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया, परंतु पुलिस ने मौर्य लोक के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर धक्का-मुक्की हुई और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल के साथ-साथ महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था।

सात दिनों से जारी आंदोलन

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि वे पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग में धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी माँगों पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई। इसी के चलते सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों के हाथों में विभिन्न पोस्टर नज़र आए — एक पोस्टर पर लिखा था, 'दो कचौड़ी, एक समोसा, बीपीएसएससी का क्या भरोसा,' जो आयोग के निर्णय पर अभ्यर्थियों की नाराज़गी को व्यक्त करता था।

परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि बिहार में दारोगा के 1,799 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी और मुख्य परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका था। इसके बाद परीक्षा में अनियमितता के आरोप सामने आने पर BPSSC ने मुख्य परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा को रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

अभ्यर्थियों की माँग और आगे की राह

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पूरी चयन प्रक्रिया में कड़ी मेहनत की है और परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने और घोषित परिणाम को मान्यता देने की माँग की है। यह प्रदर्शन बिहार में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर बढ़ती चिंताओं और अभ्यर्थियों के आक्रोश की व्यापक तस्वीर को सामने रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब जब परिणाम घोषित हो चुका है तो उसे रद्द करने का भार उन अभ्यर्थियों पर क्यों डाला जा रहा है जो निर्दोष हैं। सात दिनों के धरने के बावजूद सरकारी संवाद की अनुपस्थिति बताती है कि प्रशासनिक प्रतिक्रिया की गति अभी भी अभ्यर्थियों की तात्कालिकता से मेल नहीं खाती।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BPSSC ने दारोगा मुख्य परीक्षा क्यों रद्द की?
परीक्षा में अनियमितता के आरोप सामने आने के बाद बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने दारोगा मुख्य परीक्षा को रद्द कर दिया। यह परीक्षा बिहार में दारोगा के 1,799 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी और परिणाम भी घोषित किया जा चुका था।
पटना में दारोगा अभ्यर्थी क्या माँग कर रहे हैं?
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी BPSSC के परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लेने और पहले से घोषित परिणाम को मान्यता देने की माँग कर रहे हैं। साथ ही उनका कहना है कि परीक्षा रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पटना में प्रदर्शन कहाँ हुआ और पुलिस ने क्या किया?
अभ्यर्थी 5 अक्टूबर 2026 को जेपी गोलंबर के पास एकत्रित हुए और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया। पुलिस ने मौर्य लोक पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोका; धक्का-मुक्की की भी कुछ घटनाएँ हुईं और भारी पुलिस बल के साथ महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया।
अभ्यर्थी कब से आंदोलन कर रहे हैं?
अभ्यर्थी 5 अक्टूबर 2026 से सात दिन पहले यानी लगभग 28 सितंबर से गर्दनीबाग में धरने पर बैठे हैं। ठोस सुनवाई न होने के कारण सोमवार को वे बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए।
बिहार दारोगा भर्ती 2026 में कुल कितने पद हैं?
बिहार में दारोगा के कुल 1,799 पदों पर नियुक्ति के लिए यह परीक्षा आयोजित की गई थी। मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अनियमितता के आरोपों के चलते BPSSC ने इसे रद्द कर दिया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
राष्ट्र प्रेस
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