पटना में दारोगा अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन, BPSSC की मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पटना में 5 अक्टूबर 2026 को दारोगा अभ्यर्थियों ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी घोषित परिणाम को मान्य करने और परीक्षा रद्द करने के निर्णय को वापस लेने की माँग लेकर जेपी गोलंबर के निकट बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।
मुख्य घटनाक्रम
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया, परंतु पुलिस ने मौर्य लोक के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर धक्का-मुक्की हुई और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल के साथ-साथ महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था।
सात दिनों से जारी आंदोलन
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि वे पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग में धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी माँगों पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई। इसी के चलते सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों के हाथों में विभिन्न पोस्टर नज़र आए — एक पोस्टर पर लिखा था, 'दो कचौड़ी, एक समोसा, बीपीएसएससी का क्या भरोसा,' जो आयोग के निर्णय पर अभ्यर्थियों की नाराज़गी को व्यक्त करता था।
परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि बिहार में दारोगा के 1,799 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी और मुख्य परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका था। इसके बाद परीक्षा में अनियमितता के आरोप सामने आने पर BPSSC ने मुख्य परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा को रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों की माँग और आगे की राह
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पूरी चयन प्रक्रिया में कड़ी मेहनत की है और परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने और घोषित परिणाम को मान्यता देने की माँग की है। यह प्रदर्शन बिहार में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर बढ़ती चिंताओं और अभ्यर्थियों के आक्रोश की व्यापक तस्वीर को सामने रखता है।