बिहार के पर्यटन और उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाएं विदेश सेवा अधिकारी: सीएम सम्राट चौधरी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 22 अक्टूबर 2026 को पटना के लोकसेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में बिहार मूल के विदेश सेवा अधिकारियों से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों ने अपने अंतर्राष्ट्रीय कार्य-अनुभव साझा करते हुए बिहार के पर्यटन स्थलों और राज्य के उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के ठोस सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विदेश सेवा में कार्यरत बिहारी अधिकारी राज्य की सकारात्मक छवि को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
संकल्प सभागार में आयोजित इस बैठक में मालदीव में डिप्टी हाई कमिश्नर कुमार गौरव, रोम स्थित भारतीय दूतावास में काउंसलर आकाश गुप्ता, इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में काउंसलर नीतेश कुमार, मस्कट स्थित भारतीय दूतावास में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन तविशी बेहल पांडेय, भारतीय विदेश विभाग में सेंट्रल अमेरिका के निदेशक डॉ. राजीव रंजन, पेरिस स्थित भारतीय दूतावास में काउंसलर नवीन कुमार तथा भारतीय विदेश विभाग में नॉर्थ की निदेशक मनुस्मृति ने भाग लिया। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत एवं मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
पर्यटन संभावनाओं पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने गयाजी, सुल्तानगंज, मुंगेर और औरंगाबाद के प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार बौद्ध सर्किट के विकास और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पहले से काम कर रही है। इन स्थलों की वैश्विक ब्रांडिंग में विदेश सेवा के अधिकारियों का नेटवर्क और अनुभव निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
छठ महापर्व को अंतर्राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने छठ महापर्व को बिहार की सबसे बड़ी लोक-आस्था की परंपरा बताते हुए कहा कि इस पर्व को वैश्विक स्तर पर प्रचारित किया जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि विदेश में कार्यरत बिहारी अधिकारी इस अद्वितीय सांस्कृतिक परंपरा को दुनिया के सामने रखें, ताकि विभिन्न देशों से पर्यटक इस पर्व को प्रत्यक्ष अनुभव करने बिहार आएं। पटना सहित राज्य के अनेक घाटों पर इस पर्व के दौरान लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
आर्थिक विकास और रोजगार पर असर
सीएम चौधरी ने रेखांकित किया कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलने से राज्य में पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियाँ सभी एक साथ बढ़ेंगी। उन्होंने बिहार मूल के सभी प्रवासी नागरिकों और अधिकारियों से अपील की कि वे अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ जन्मभूमि के विकास में भी सक्रिय योगदान दें। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को शॉल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
क्या होगा आगे
अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों पर राज्य सरकार गंभीरता से विचार करेगी, ऐसा मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया। यह बैठक बिहार को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार की बढ़ती सक्रियता का संकेत है। आने वाले समय में राज्य की ब्रांडिंग रणनीति को विदेशों में तैनात अधिकारियों के साथ समन्वित करने के प्रयास और तेज होने की उम्मीद है।