वंडालूर चिड़ियाघर में H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि, गुरुवार-शुक्रवार दो दिन बंद रहेगा पार्क
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई के बाहरी इलाके में स्थित अरिगनर अन्ना जूलॉजिकल पार्क, वंडालूर में 22 अक्टूबर 2026 को H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। चिड़ियाघर में रखे गए जलीय पक्षियों में यह वायरस पाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने गुरुवार और शुक्रवार को आम जनता के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
कैसे हुई वायरस की पुष्टि
संक्रमण की पुष्टि भोपाल, मध्य प्रदेश स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज (NIHSAD) की प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर की गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जलीय पक्षी H5N1 वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। हालाँकि, उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि कितने पक्षी पॉजिटिव पाए गए, किसी की मृत्यु हुई अथवा नहीं, और सैंपलिंग किन परिस्थितियों में की गई थी।
प्रशासन के तत्काल कदम
पुष्टि मिलते ही पार्क प्रशासन ने पक्षी बाड़ों और संबंधित क्षेत्रों में कीटाणुशोधन एवं गहरी सफाई का अभियान शुरू कर दिया है। बायोसिक्योरिटी उपायों को और सख्त कर दिया गया है। प्रवेश पर रोक केवल पक्षी क्षेत्र तक नहीं, बल्कि पूरे पार्क परिसर पर लागू है।
आगंतुकों को सूचित किया गया है कि वे 23 और 24 अक्टूबर को अपनी यात्रा टाल दें। प्रशासन ने इस दौरान संक्रमण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
वंडालूर चिड़ियाघर: क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर
लगभग 1,260 एकड़ में फैला वंडालूर जूलॉजिकल पार्क दक्षिण भारत के सबसे बड़े चिड़ियाघरों में से एक है और चेन्नई का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहाँ 150 से अधिक प्रजातियों के हजारों जीव-जंतु हैं, जिनमें शेर, बाघ, मगरमच्छ, सांप, कछुए और विविध पक्षी शामिल हैं। हर वर्ष लाखों पर्यटक यहाँ आते हैं।
गौरतलब है कि H5N1 वायरस मुख्यतः पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, घनिष्ठ संपर्क की स्थिति में यह मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकता है। यही कारण है कि चिड़ियाघर जैसी सार्वजनिक जगहों पर इसका प्रकोप अतिरिक्त सतर्कता की माँग करता है।
क्या होगा आगे
दो दिन की बंदी के बाद पार्क खोलने का निर्णय कीटाणुशोधन की प्रगति और संक्रमण नियंत्रण की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, तब तक बायोसिक्योरिटी टीमें पूरे परिसर की निगरानी जारी रखेंगी। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण के स्रोत की पहचान हुई है या नहीं, और क्या अन्य प्रजातियों की जाँच की जाएगी।