राबड़ी देवी के सरकारी आवास विवाद पर भड़की BJP, सरावगी बोले — 'लोकतंत्र में कोई कानून से ऊपर नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने 30 मई 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने सरकारी आवास खाली करने से इनकार किया था। सरावगी ने स्पष्ट कहा कि बिहार में अब कानून का राज है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली हो, नियमों से ऊपर नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
सरावगी ने कहा कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति या परिवार की निजी जागीर नहीं होती — यह जनता के करों से निर्मित और संचालित सार्वजनिक संपत्ति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आवासों का आवंटन और पुनः आवंटन सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के तहत ही होता है, और किसी भी सरकारी आदेश की अवहेलना लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संवैधानिक मूल्यों का अपमान है।
उन्होंने कहा, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू परिवार की राजनीति हमेशा से सत्ता को निजी अधिकार समझने की रही है, इसीलिए वे आज भी सरकारी संसाधनों को जनता की धरोहर नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत संपत्ति मानते हैं।
BJP का राजद पर हमला
सरावगी ने आरोप लगाया कि लालू यादव के परिवार की आदत सरकारी संसाधनों और जनता के धन की लूट-खसोट की राजनीति से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने लंबे समय तक इस मानसिकता के दुष्परिणाम भोगे हैं और अब प्रदेश ऐसी प्रवृत्तियों को स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने राबड़ी देवी के उस बयान को उनके 'अहंकार और कानून के प्रति असम्मान' का प्रतीक बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार चाहे तो बलपूर्वक आवास खाली करवाए। सरावगी ने तंज कसते हुए कहा — 'यह राजतंत्र नहीं, लोकतंत्र है, लेकिन आप अभी भी खुद को रानी समझ रही हैं।'
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या राबड़ी देवी नहीं चाहतीं कि कोई दलित समाज का व्यक्ति बड़े घर में रहे, या केवल उन्हीं को यह अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार द्वारा दिए गए आदेश को ही वर्तमान सरकार जमीन पर उतार रही है।
JDU की प्रतिक्रिया
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी आवास के सवाल पर हठधर्मिता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि राबड़ी देवी विधान परिषद में विपक्ष की नेता हैं और उनका आचरण सार्वजनिक महत्व का है।
नीरज कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से राबड़ी देवी को तीन नोटिस भेजे जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महुआबाग में किलाबंदी वाला मकान बन रहा है और कौटिल्य नगर में वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी की जा रही है, इसलिए उन्हें आवास की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद तब सामने आया जब राबड़ी देवी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे सरकारी आवास खाली नहीं करेंगी और सरकार चाहे तो बलपूर्वक खाली करवाए। यह बयान बिहार की राजनीति में तीखी बहस का केंद्र बन गया। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन विपक्ष पर प्रशासनिक अनुशासन के मुद्दे पर हमलावर है।
आगे क्या होगा
तीन नोटिस भेजे जाने के बाद अब सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। कानूनी और प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, नोटिस की अनदेखी होने पर संबंधित विभाग अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और गर्म हो सकता है।