15 जुलाई 2026
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अनिल मेनन पहली बार आईएसएस पहुंचे, सोयुज एमएस-29 से 8 महीने के मिशन पर रवाना

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अनिल मेनन पहली बार आईएसएस पहुंचे, सोयुज एमएस-29 से 8 महीने के मिशन पर रवाना

सारांश

भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने पहली बार अंतरिक्ष में कदम रखा — सोयुज एमएस-29 से बैकोनूर रवाना होकर आईएसएस पहुंचे। अप्रैल 2027 तक चलने वाले इस 8 महीने के मिशन में वे सेमीकंडक्टर क्रिस्टल, AI-आधारित अल्ट्रासाउंड और बायोप्रिंटिंग पर अहम शोध करेंगे।

मुख्य बातें

अनिल मेनन 15 जुलाई 2026 को सोयुज एमएस-29 से आईएसएस पहुंचे — यह उनका पहला अंतरिक्ष मिशन है।
यान बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सुबह 10:47 बजे (ईडीटी) रवाना हुआ और दोपहर 1:52 बजे (ईडीटी) आईएसएस के प्रिचल मॉड्यूल से जुड़ा।
मेनन के साथ रोस्कोस्मोस के प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी आईएसएस पहुंचे; तीनों अप्रैल 2027 तक स्टेशन पर रहेंगे।
मिशन के दौरान मेनन माइक्रोग्रैविटी में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल उत्पादन, AI-आधारित अल्ट्रासाउंड और बायोप्रिंटिंग वैस्कुलर कंस्ट्रक्ट्स पर शोध करेंगे।
26 जुलाई को एक्सपीडिशन 75 शुरू होगा; 25 जुलाई को कमान जेसिका मीर को सौंपी जाएगी।
आईएसएस पर अगले करीब दो सप्ताह के लिए क्रू सदस्यों की संख्या 10 हो गई है।

भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के तहत 15 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर सुरक्षित पहुंच गए। रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से उड़ान भरने वाले मेनन अप्रैल 2027 तक कक्षीय प्रयोगशाला में रहेंगे और वैज्ञानिक अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी प्रदर्शन से जुड़े कई प्रयोगों में भाग लेंगे।

मिशन का मुख्य घटनाक्रम

कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सुबह 10:47 बजे (ईडीटी) प्रक्षेपण के बाद, सोयुज एमएस-29 ने लगभग तीन घंटे और दो कक्षीय चक्कर पूरे किए। यान दोपहर 1:52 बजे (ईडीटी) आईएसएस के प्रिचल मॉड्यूल से जुड़ा। मेनन के साथ रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी स्टेशन पहुंचे — यह दोनों का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है।

आईएसएस पर मौजूदा क्रू

नए दल के आगमन के बाद अगले लगभग दो सप्ताह के लिए आईएसएस पर क्रू सदस्यों की संख्या 10 हो गई है। स्टेशन पर पहले से मौजूद सदस्यों में नासा की जेसिका मीर, जैक हैथवे और क्रिस विलियम्स; यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) की सोफी एडेनोट; तथा रोस्कोस्मोस के सर्गेई कुड-स्वेरचकोव, सर्गेई मिकाएव और आंद्रे फेड्याएव शामिल हैं।

मेनन के प्रयोग और वैज्ञानिक कार्य

आठ महीने के इस मिशन में मेनन कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाओं पर काम करेंगे। वे माइक्रोग्रैविटी में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल के उत्पादन को बेहतर बनाने पर शोध करेंगे, जिससे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और उन्नत मेडिकल डिवाइस के लिए आवश्यक कंपोनेंट का बड़े पैमाने पर निर्माण संभव हो सकेगा।

इसके अतिरिक्त, मेनन ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों का उपयोग करके अल्ट्रासाउंड प्रक्रियाएं भी संचालित करेंगे। नासा के अनुसार, इस शोध का उद्देश्य भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों में पृथ्वी से चिकित्सा सहायता पर निर्भरता कम करना है। वे उन अध्ययनों में परीक्षण विषय के रूप में भी भाग लेंगे जिनमें यह देखा जाएगा कि अंतरिक्ष में रक्त प्रवाह किस प्रकार बदलता है।

गौरतलब है कि मेनन माइक्रोग्रैविटी में बायोप्रिंटिंग वैस्कुलर कंस्ट्रक्ट्स का परीक्षण भी करेंगे, जिसका लक्ष्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझना और नए उपचार विकसित करना है।

एक्सपीडिशन 75 और कमान परिवर्तन

नासा के अनुसार, 26 जुलाई को एक्सपीडिशन 75 आधिकारिक रूप से शुरू होगा — जब विलियम्स, कुड-स्वेरचकोव और मिकाएव अपना आठ महीने का मिशन पूरा कर स्टेशन छोड़ेंगे। इससे एक दिन पहले, 25 जुलाई को कमान सौंपने का समारोह होगा, जिसमें स्टेशन की कमान कुड-स्वेरचकोव से जेसिका मीर को सौंपी जाएगी।

आईएसएस का महत्व और भविष्य की राह

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से लगातार मानव उपस्थिति बनी हुई है। माइक्रोग्रैविटी वातावरण इसे चिकित्सा, इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान और पदार्थ विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अद्वितीय अनुसंधान के लिए उपयुक्त बनाता है। यह स्टेशन चंद्रमा और मंगल पर भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी में भी अहम भूमिका निभाता है। मेनन का यह मिशन भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की अंतरिक्ष अन्वेषण में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह मिशन ऐसे समय में आया है जब नासा और रोस्कोस्मोस के बीच सहयोग भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद जारी है — जो अपने आप में एक उल्लेखनीय तथ्य है। सेमीकंडक्टर और AI-आधारित चिकित्सा शोध की दिशा में किए जाने वाले प्रयोग व्यावसायिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि इन परिणामों को पृथ्वी पर व्यावहारिक उत्पादों तक पहुंचाने में कितना समय लगता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनिल मेनन कौन हैं और उनका आईएसएस मिशन क्या है?
अनिल मेनन भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री हैं जो 15 जुलाई 2026 को सोयुज एमएस-29 से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे। यह उनका पहला अंतरिक्ष मिशन है और वे अप्रैल 2027 तक आईएसएस पर रहेंगे।
अनिल मेनन आईएसएस पर कौन-से प्रयोग करेंगे?
मेनन माइक्रोग्रैविटी में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल उत्पादन, AI और ऑगमेंटेड रियलिटी से अल्ट्रासाउंड, रक्त प्रवाह अध्ययन और बायोप्रिंटिंग वैस्कुलर कंस्ट्रक्ट्स पर शोध करेंगे। इन प्रयोगों का लक्ष्य भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों और पृथ्वी पर चिकित्सा व तकनीकी क्षेत्रों को लाभ पहुंचाना है।
सोयुज एमएस-29 कब और कहां से लॉन्च हुआ?
सोयुज एमएस-29 कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से 15 जुलाई 2026 को सुबह 10:47 बजे (ईडीटी) लॉन्च हुआ। लगभग तीन घंटे और दो कक्षीय चक्कर पूरे करने के बाद यान दोपहर 1:52 बजे (ईडीटी) आईएसएस के प्रिचल मॉड्यूल से जुड़ा।
एक्सपीडिशन 75 कब शुरू होगा और कमान किसे मिलेगी?
एक्सपीडिशन 75 का आगाज 26 जुलाई 2026 को होगा, जब क्रिस विलियम्स, सर्गेई कुड-स्वेरचकोव और सर्गेई मिकाएव आईएसएस छोड़ेंगे। 25 जुलाई को कमान सौंपने के समारोह में स्टेशन की जिम्मेदारी कुड-स्वेरचकोव से जेसिका मीर को सौंपी जाएगी।
आईएसएस पर अभी कितने अंतरिक्ष यात्री हैं?
मेनन, डुब्रोव और किकिना के आगमन के बाद आईएसएस पर अगले करीब दो सप्ताह के लिए क्रू सदस्यों की संख्या 10 हो गई है। इनमें नासा, ESA और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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