अनिल मेनन पहली बार आईएसएस पहुंचे, सोयुज एमएस-29 से 8 महीने के मिशन पर रवाना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के तहत 15 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर सुरक्षित पहुंच गए। रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से उड़ान भरने वाले मेनन अप्रैल 2027 तक कक्षीय प्रयोगशाला में रहेंगे और वैज्ञानिक अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी प्रदर्शन से जुड़े कई प्रयोगों में भाग लेंगे।
मिशन का मुख्य घटनाक्रम
कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सुबह 10:47 बजे (ईडीटी) प्रक्षेपण के बाद, सोयुज एमएस-29 ने लगभग तीन घंटे और दो कक्षीय चक्कर पूरे किए। यान दोपहर 1:52 बजे (ईडीटी) आईएसएस के प्रिचल मॉड्यूल से जुड़ा। मेनन के साथ रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी स्टेशन पहुंचे — यह दोनों का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है।
आईएसएस पर मौजूदा क्रू
नए दल के आगमन के बाद अगले लगभग दो सप्ताह के लिए आईएसएस पर क्रू सदस्यों की संख्या 10 हो गई है। स्टेशन पर पहले से मौजूद सदस्यों में नासा की जेसिका मीर, जैक हैथवे और क्रिस विलियम्स; यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) की सोफी एडेनोट; तथा रोस्कोस्मोस के सर्गेई कुड-स्वेरचकोव, सर्गेई मिकाएव और आंद्रे फेड्याएव शामिल हैं।
मेनन के प्रयोग और वैज्ञानिक कार्य
आठ महीने के इस मिशन में मेनन कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाओं पर काम करेंगे। वे माइक्रोग्रैविटी में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल के उत्पादन को बेहतर बनाने पर शोध करेंगे, जिससे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और उन्नत मेडिकल डिवाइस के लिए आवश्यक कंपोनेंट का बड़े पैमाने पर निर्माण संभव हो सकेगा।
इसके अतिरिक्त, मेनन ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों का उपयोग करके अल्ट्रासाउंड प्रक्रियाएं भी संचालित करेंगे। नासा के अनुसार, इस शोध का उद्देश्य भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों में पृथ्वी से चिकित्सा सहायता पर निर्भरता कम करना है। वे उन अध्ययनों में परीक्षण विषय के रूप में भी भाग लेंगे जिनमें यह देखा जाएगा कि अंतरिक्ष में रक्त प्रवाह किस प्रकार बदलता है।
गौरतलब है कि मेनन माइक्रोग्रैविटी में बायोप्रिंटिंग वैस्कुलर कंस्ट्रक्ट्स का परीक्षण भी करेंगे, जिसका लक्ष्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझना और नए उपचार विकसित करना है।
एक्सपीडिशन 75 और कमान परिवर्तन
नासा के अनुसार, 26 जुलाई को एक्सपीडिशन 75 आधिकारिक रूप से शुरू होगा — जब विलियम्स, कुड-स्वेरचकोव और मिकाएव अपना आठ महीने का मिशन पूरा कर स्टेशन छोड़ेंगे। इससे एक दिन पहले, 25 जुलाई को कमान सौंपने का समारोह होगा, जिसमें स्टेशन की कमान कुड-स्वेरचकोव से जेसिका मीर को सौंपी जाएगी।
आईएसएस का महत्व और भविष्य की राह
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से लगातार मानव उपस्थिति बनी हुई है। माइक्रोग्रैविटी वातावरण इसे चिकित्सा, इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान और पदार्थ विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अद्वितीय अनुसंधान के लिए उपयुक्त बनाता है। यह स्टेशन चंद्रमा और मंगल पर भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी में भी अहम भूमिका निभाता है। मेनन का यह मिशन भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की अंतरिक्ष अन्वेषण में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।